IAS Pooja Singhal के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल रोकने से इनकार करते हुए अभियोजन मंजूरी के सवाल को आगे के उचित चरण के लिए खुला रखा है।

₹19 करोड़ की बरामदगी का जिक्र, IAS Pooja Singhal केस में ट्रायल रोकने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Team The420
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की पूर्व खनन सचिव IAS Pooja Singhal के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिलहाल ट्रायल रोकने से इनकार कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से मामले में संज्ञान लेने के आदेश को रद्द करने से भी राहत नहीं दी। हालांकि, पीठ ने अभियोजन की मंजूरी से जुड़े सवाल को खुला रखा और कहा कि इस मुद्दे पर मामले की आगे की कार्यवाही के उचित चरण में अन्य साक्ष्यों के साथ विचार किया जाएगा।

तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान Pooja Singhal की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत आवश्यक पूर्व मंजूरी इस मामले में नहीं ली गई। बचाव पक्ष ने कहा कि संबंधित आरोप उनके आधिकारिक पद और कर्तव्यों से जुड़े कार्यों से संबंधित हैं, इसलिए अभियोजन के लिए वैधानिक मंजूरी का सवाल महत्वपूर्ण है।

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धारा 197 के तहत ऐसे कुछ लोक सेवकों के खिलाफ अदालत द्वारा अपराध का संज्ञान लेने से पहले पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होती है, जिन्हें सरकार की मंजूरी के बिना पद से हटाया नहीं जा सकता। यह प्रावधान उस स्थिति में लागू होता है, जब आरोपी अधिकारी पर ऐसा अपराध करने का आरोप हो, जो उसके आधिकारिक कर्तव्य का निर्वहन करते हुए या उसका दावा करते हुए किया गया हो।

Pooja Singhal की ओर से यह भी दलील दी गई कि जिस मूल भ्रष्टाचार मामले से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जुड़ी है, उसमें वह आरोपी नहीं थीं। उनके वकील ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जिन गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वे उनके आधिकारिक पद से जुड़े कार्यों के दौरान हुई थीं। इसी आधार पर अभियोजन मंजूरी की अनुपस्थिति को चुनौती दी गई।

जांच एजेंसी की ओर से अदालत में इस दलील का विरोध किया गया। बताया गया कि जब अभियोजन मंजूरी नहीं होने की आपत्ति उठाई गई थी, तब नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत ‘स्वतः मानी गई मंजूरी’ से संबंधित प्रावधान का हवाला दिया गया था। एजेंसी की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में निचली अदालत काफी पहले ही अपराध का संज्ञान ले चुकी है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हुई बरामदगी का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि Pooja Singhal से जुड़े मामले में ₹19 करोड़ से अधिक की रकम बरामद होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद अदालत ने इस स्तर पर ट्रायल रोकने या निचली अदालत के संज्ञान आदेश को रद्द करने का आदेश नहीं दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन मंजूरी का सवाल केवल कानूनी व्याख्या का विषय नहीं है, बल्कि इसमें तथ्यात्मक पहलू भी शामिल हैं। अदालत के अनुसार यह भी देखा जाना जरूरी है कि कथित अपराध के समय संबंधित अधिकारी वास्तव में अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रही थीं या नहीं।

पीठ ने अभियोजन मंजूरी के मुद्दे को फिलहाल खुला रखते हुए कहा कि इस सवाल पर मामले की आगे की कार्यवाही के उचित चरण में अन्य साक्ष्यों के साथ विचार किया जाएगा। यानी अदालत ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि Pooja Singhal के मामले में अभियोजन मंजूरी अनिवार्य थी या नहीं। यह मुद्दा ट्रायल के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय किया जा सकता है।

यह मामला वर्ष 2022 में सामने आया था। उस समय Pooja Singhal झारखंड के खनन विभाग की सचिव थीं। जांच एजेंसी ने 11 मई 2022 को उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के क्रियान्वयन से जुड़े करीब ₹18 करोड़ के कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में हुई थी।

जांच के दौरान Pooja Singhal और उनसे जुड़े परिसरों पर तलाशी भी ली गई थी। इसके बाद मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच आगे बढ़ी। एजेंसी ने कथित वित्तीय लेनदेन और बरामदगी को जांच का हिस्सा बनाया, जबकि Singhal की ओर से अदालत में अभियोजन मंजूरी और उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े कानूनी सवाल उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगी है। IAS Pooja Singhal के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल आगे बढ़ेगा, जबकि अभियोजन मंजूरी से जुड़ा सवाल न्यायिक प्रक्रिया के अगले उचित चरण में साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा।

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