वी-केवाईसी आंकड़ों के विश्लेषण में लखीमपुर खीरी, बरेली और वाराणसी समेत कई जिलों में संदिग्ध बैंक खाता खोलने के प्रयासों के संकेत; जोखिम वाले इलाकों में ठगी का पैटर्न तेजी से दूसरे जिलों तक पहुंचने का भी दावा

म्यूल अकाउंट ठगी के 10 बड़े हॉटस्पॉट सामने आए, यूपी के 8 जिले सबसे ज्यादा जोखिम वाले

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By Roopa
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नई दिल्ली। बैंक खातों का इस्तेमाल कर होने वाली साइबर ठगी और अवैध धन हस्तांतरण के बीच उत्तर भारत के 10 जिलों को म्यूल अकाउंट गतिविधियों के लिहाज से अधिक जोखिम वाला पाया गया है। धोखाधड़ी रोकथाम कंपनी आईडीफाई के वीडियो-केवाईसी (वी-केवाईसी) आंकड़ों के विश्लेषण में उत्तर प्रदेश के आठ जिलों के अलावा हरियाणा का पानीपत और राजस्थान का जोधपुर सामने आए हैं। अध्ययन में अप्रैल 2025 से जून 2026 के बीच करीब 130 जिलों से मिले वी-केवाईसी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

विश्लेषण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी, बरेली, वाराणसी, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, लखनऊ और गाजियाबाद में विशेष निगरानी की जरूरत बताई गई है। वी-केवाईसी अस्वीकृति दर के आधार पर लखीमपुर खीरी 14.03 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर रहा। इसके बाद बरेली 13.37 प्रतिशत, वाराणसी 12.32 प्रतिशत, सहारनपुर 10.32 प्रतिशत और मुजफ्फरनगर 9.77 प्रतिशत रहा। पानीपत में यह दर 9.52 प्रतिशत, फिरोजाबाद में 8.81 प्रतिशत, जोधपुर में 7.61 प्रतिशत, लखनऊ में 6 प्रतिशत और गाजियाबाद में 5.91 प्रतिशत दर्ज की गई।

हालांकि, ये आंकड़े किसी जिले के सभी लोगों या बैंक खातों को ठगी से जुड़ा साबित नहीं करते। वी-केवाईसी में आवेदन या प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले जोखिम संकेतों को आधार बनाया गया है। कंपनी के अनुसार, किसी आवेदन को अस्वीकार किए जाने के पीछे पहचान की नकल, दस्तावेजों में छेड़छाड़, किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा आवेदक को निर्देश देना या संदिग्ध व्यवहार जैसे कारण हो सकते हैं। इसलिए इन जिलों को संभावित या उभरते जोखिम वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाना चाहिए।

म्यूल अकाउंट आम तौर पर ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी या अन्य अवैध गतिविधियों से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक को खाते के इस्तेमाल के बदले कमीशन या रकम देने का लालच दिया जाता है। इससे अपराधियों को ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसकी असली उत्पत्ति छिपाने में मदद मिल सकती है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

अध्ययन में दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान हर तिमाही करीब 16 जिलास्तरीय धोखाधड़ी हॉटस्पॉट सामने आए। इनमें से 85 से 90 प्रतिशत मामलों की बाद में कानून प्रवर्तन कार्रवाई या सार्वजनिक रिपोर्टों के जरिये पुष्टि होने की बात कही गई है। कंपनी के अनुसार, कुछ मामलों में वी-केवाईसी से मिले संकेत सार्वजनिक रूप से ठगी सामने आने से करीब दो महीने पहले मिल गए थे। करीब 33 प्रतिशत क्षेत्रों में कंपनी का पूर्वानुमान आई4सी के आंकड़ों से पहले सामने आने का भी दावा किया गया है।

विश्लेषण का एक अहम पहलू यह है कि किसी जिले में जोखिम घटने का मतलब यह नहीं कि पूरा ठगी नेटवर्क समाप्त हो गया। 15 महीने के आंकड़ों के अध्ययन में करीब 81 प्रतिशत जिलास्तरीय जोखिम बढ़ोतरी केवल एक महीने तक चली, जबकि सिर्फ 6.5 प्रतिशत मामले तीन महीने या उससे ज्यादा समय तक बने रहे। किसी नए हॉटस्पॉट के उसी राज्य में सामने आने की संभावना 39 प्रतिशत बताई गई है, जबकि जोखिम वाले क्षेत्र के स्थानांतरण की औसत दूरी करीब 190 किलोमीटर रही।

इससे संकेत मिलता है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए केवल पहले से चिन्हित हॉटस्पॉट की निगरानी पर्याप्त नहीं हो सकती। किसी जिले में जोखिम बढ़ने पर उसके आसपास के जिलों में भी खाते खोलने और वी-केवाईसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना उपयोगी हो सकता है। पहले चिन्हित हो चुके इलाके दोबारा सक्रिय होने की संभावना भी अध्ययन में सामने आई है।

ग्राहकों के लिए भी यह चेतावनी महत्वपूर्ण है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाता खोलना, अपना खाता दूसरे व्यक्ति को रकम प्राप्त करने के लिए देना या बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी और अन्य प्रमाणीकरण जानकारी साझा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। खासकर ऐसे प्रस्तावों से सावधान रहना चाहिए जिनमें केवल खाता उपलब्ध कराने के बदले आसानी से पैसे देने का लालच दिया जाए।

वी-केवाईसी जोखिम की पहचान के लिए कंपनी ने न्यूनतम नमूना संख्या, न्यूनतम धोखाधड़ी मात्रा और जेड-स्कोर रैंकिंग जैसे चरणों का इस्तेमाल किया। जेड-स्कोर रैंकिंग में किसी जिले को शामिल करने के लिए एक महीने में कम से कम 30 अस्वीकृत कॉल का मानदंड रखा गया। अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि बैंकिंग प्रक्रिया के शुरुआती चरण में मिलने वाले संकेतों का इस्तेमाल संभावित म्यूल अकाउंट नेटवर्क की पहचान के लिए शुरुआती चेतावनी तंत्र के रूप में किया जा सकता है।

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