अमेरिकी संघीय सरकार और रक्षा विभाग से कथित मान्यता का दावा कर निवेशकों को आकर्षित करने का आरोप; आधिकारिक जैसे दस्तावेज, राष्ट्रीय प्रतीक और कथित ‘डिप्लोमैट’ के जरिए कंपनी की विश्वसनीयता बढ़ाने की कोशिश, तीन प्रमोटर गिरफ्तार होकर जमानत पर बाहर

‘इंडो-यूएस पीस ट्रीटी’ के नाम पर निवेश का झांसा? होटल ऑफिस और हेलिकॉप्टर से बनाया अंतरराष्ट्रीय कंपनी का भ्रम

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By Roopa
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नई दिल्ली। दिल्ली की एक कंपनी पर कथित तौर पर अमेरिकी सरकार और रक्षा विभाग से जुड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का हवाला देकर निवेशकों को आकर्षित करने और उनसे रकम जुटाने का आरोप लगा है। कंपनी ने खुद को अमेरिका की संघीय सरकार और अमेरिकी रक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त ‘प्रिंसिपल डेवलपर’ के रूप में पेश किया था। आरोप है कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए आलीशान होटल में कार्यालय, निजी हेलिकॉप्टर, सरकारी संस्थानों जैसे दिखने वाले दस्तावेज, राष्ट्रीय प्रतीक और एक कथित ‘डिप्लोमैट’ की मौजूदगी का इस्तेमाल किया गया।

मामला वीपीवीवी टेक्नो कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। शिकायतों के मुताबिक, कंपनी ने निवेशकों को बताया कि वह ‘इंडो-यूएस पैसिफिक पीस ट्रीटी’ नाम से बताए गए एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यक्रम को लागू करने वाली है। कंपनी की ओर से कथित तौर पर इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहल के तौर पर प्रस्तुत किया गया और निवेशकों के सामने इससे जुड़े बड़े कारोबारी अवसरों की तस्वीर रखी गई।

कंपनी से संपर्क करने वाले निवेशकों में संजीव राव भी शामिल थे। उन्होंने पिछले साल सितंबर में कंपनी में ₹1.08 लाख का निवेश किया था। शिकायत के अनुसार, राव को कंपनी के बारे में एक परिचित के जरिए जानकारी मिली थी, जिसने पहले ही उसमें निवेश किया था। कंपनी की ओर से किए गए दावों और उसके कारोबारी तौर-तरीकों से प्रभावित होकर उन्होंने भी निवेश किया। बाद में सामने आए घटनाक्रम के बाद कंपनी की गतिविधियां जांच के दायरे में आ गईं।

आरोप है कि कंपनी ने अपनी विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जिनका स्वरूप आधिकारिक दिखाई देता था। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर सरकारी संस्थानों से जुड़ी भाषा और राष्ट्रीय प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया था। इससे निवेशकों के बीच यह धारणा बनाने की कोशिश किए जाने का आरोप है कि कंपनी को अमेरिकी सरकारी संस्थाओं का समर्थन या मान्यता हासिल है।

जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, कंपनी ने निवेशकों को प्रभावित करने के लिए अपने कार्यालय की व्यवस्था भी खास तरीके से की थी। उसका कार्यालय एक आलीशान होटल में बनाया गया था। इसके अलावा निजी हेलिकॉप्टर और एक कथित राजनयिक को भी कंपनी की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और प्रभाव से जोड़कर पेश किए जाने का आरोप है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि इन व्यवस्थाओं का इस्तेमाल निवेशकों को प्रभावित करने और कंपनी की कारोबारी छवि मजबूत करने के लिए किस तरह किया गया।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

मामले में पुलिस ने कंपनी के तीन प्रमोटरों वेंकिता वेंकट, हितेश कुमार और राहुल राजीव नायर को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। तीनों पर निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने और कंपनी की वास्तविक स्थिति के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देकर निवेश कराने से जुड़े आरोपों की जांच की गई। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद तीनों को अदालत से जमानत मिल गई। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

जांच का सबसे अहम हिस्सा कंपनी के अमेरिकी सरकार और रक्षा विभाग से कथित संबंधों के दावे से जुड़ा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कंपनी को वास्तव में किसी अमेरिकी सरकारी संस्था से ऐसी कोई मान्यता, मंजूरी या अधिकार मिला था या नहीं। साथ ही, ‘इंडो-यूएस पैसिफिक पीस ट्रीटी’ के नाम पर बताए गए प्रोजेक्ट की वास्तविकता और उसमें कंपनी की कथित भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस कंपनी के दस्तावेज, प्रचार सामग्री और निवेशकों के साथ किए गए दावों की पड़ताल कर रही है। बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि कंपनी ने कितने लोगों से निवेश कराया और कथित परियोजना के नाम पर कुल कितनी राशि जुटाई गई।

इस मामले में होटल कार्यालय, हेलिकॉप्टर और कथित राजनयिक जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। आरोप है कि इन साधनों के जरिए कंपनी ने खुद को एक सामान्य निजी संस्था के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर के सरकारी प्रोजेक्ट से जुड़ी इकाई के रूप में पेश किया। इससे संभावित निवेशकों के बीच कंपनी की विश्वसनीयता बढ़ाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है।

अब जांच एजेंसियां कंपनी की कथित सरकारी मान्यता, इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों, निवेशकों से किए गए वादों और धन के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। पुलिस के सामने यह स्पष्ट करना अहम है कि कंपनी ने जिस अंतरराष्ट्रीय परियोजना और अमेरिकी संस्थाओं से जुड़ाव का दावा किया था, उसकी वास्तविक स्थिति क्या थी और निवेश जुटाने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

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