नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने नोएडा से साइबर निवेश ठगी के एक कथित नेटवर्क से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। द्वारका स्थित साइबर थाना पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 40 मोबाइल फोन, 146 सिम कार्ड, 86 डेबिट कार्ड, तीन लैपटॉप और बैंकिंग से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को शेयर बाजार में निवेश कर ऊंचा मुनाफा दिलाने का झांसा देने वाले नेटवर्क से जुड़े थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जैतपुर निवासी पीयूष बाला (28), उडुपी निवासी भरत जी. पूजारी (32) और उत्तर प्रदेश निवासी सूरज कुमार (24) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों को नोएडा के सेक्टर-137 स्थित एक आवासीय सोसायटी से पकड़ा गया। उनके पास से बरामद डिजिटल और बैंकिंग सामग्री की जांच की जा रही है।
मामला द्वारका सेक्टर-16 की रहने वाली एक महिला की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता के अनुसार, जून में सोशल मीडिया पर सामग्री देखते समय उन्हें निवेश से संबंधित एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन के बाद उन्हें ‘Funds Invest’ नाम के टेलीग्राम समूह में जोड़ा गया। समूह में मौजूद सदस्य और संचालक कथित तौर पर शेयर बाजार में निवेश के सुझाव देते थे और बहुत अधिक रिटर्न का लालच देकर रकम लगाने के लिए प्रेरित करते थे।
शिकायत के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों में से एक ने महिला से व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया। उसने कथित तौर पर निवेश की अलग-अलग योजनाओं के बारे में जानकारी दी और रकम भेजने के लिए बैंक खातों का विवरण उपलब्ध कराया। महिला ने 16 जुलाई को उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक खाते में ₹3 लाख और 19 जुलाई को डीसीबी बैंक के खाते में ₹2.50 लाख ट्रांसफर किए। इस तरह कथित तौर पर कुल ₹5.50 लाख आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में भेजे गए।
शिकायत के आधार पर 19 जुलाई को द्वारका साइबर थाने में ई-एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319, 61(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने डीसीबी बैंक खाते के लाभार्थी की जानकारी जुटाई और तकनीकी तथा वित्तीय सुरागों के आधार पर आगे बढ़ी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस के अनुसार, जांच में मिले सुरागों के आधार पर टीम ने नोएडा के सेक्टर-137 स्थित आवासीय सोसायटी में छापा मारा और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे इंस्टाग्राम के माध्यम से अन्य लोगों के संपर्क में आए थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी बैंक खातों के लॉगिन और भुगतान सत्यापन से जुड़े काम संभालते थे।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों के पास मोबाइल फोन और बैंकिंग सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी थी। इनमें पासबुक, चेकबुक, बैंक खाते की स्वागत किट, डेबिट कार्ड और सिम कार्ड शामिल थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये दस्तावेज और बैंकिंग साधन किन लोगों से प्राप्त किए गए तथा इनके जरिए कितने खातों का संचालन किया जा रहा था।
बरामदगी में 28 चेकबुक, 18 पासबुक, तीन पासपोर्ट, ₹1 लाख नकद और एक वाई-फाई राउटर भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिलने से जांच का दायरा बढ़ गया है। इन उपकरणों और सिम कार्ड से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में दर्ज छह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की शिकायतें भी मिलीं, जिनका संबंध आरोपियों से बरामद बैंक खातों से बताया गया है। इन शिकायतों में करीब ₹4 लाख की कथित ठगी सामने आई है। पुलिस अब इन मामलों के बीच संबंध और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और बैंकिंग दस्तावेजों का डिजिटल तथा वित्तीय विश्लेषण जारी है। जांच का प्रमुख उद्देश्य रकम के पूरे लेनदेन का पता लगाना, कथित ठगी से जुड़े अन्य खातों की पहचान करना और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचना है। मामले में आगे की जांच जारी है।
