बदायूं के इस्लामनगर थाने में डेढ़ किलो अफीम के साथ पकड़े तीन लोगों को कथित तौर पर ₹8 लाख लेकर छोड़ने के आरोप की जांच CO बिल्सी को सौंपी गई है।

बदायूं में अफीम तस्करों को छोड़ने के लिए रातभर जुटाए ₹8 लाख, पुलिस पर रिश्वत लेकर रिहाई का आरोप

Team The420
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बदायूं। इस्लामनगर थाना क्षेत्र में करीब डेढ़ किलो अफीम के साथ पकड़े गए तीन कथित तस्करों को ₹8 लाख लेकर छोड़ने के आरोप ने पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है। आरोप है कि बरेली के सिरौली क्षेत्र के शिवपुरी गांव से जुड़े दो लोगों और बदायूं के दबतोरी गांव के एक युवक को पुलिस ने अफीम के साथ पकड़ा था। इसके बाद उन्हें थाने के पिछले गेट से पुलिसकर्मियों के आवास की ओर ले जाकर कथित तौर पर सौदेबाजी की गई और ₹8 लाख लेकर छोड़ दिया गया।

मामला सामने आने के बाद शिवपुरी गांव में भी हलचल मची हुई है। आरोपियों को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए गांव में रातभर चंदा जुटाए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि रकम जुटाने के लिए कई ग्रामीणों ने अपनी क्षमता के अनुसार पैसे दिए। इसके बाद कई वाहनों से लोग इस्लामनगर थाने पहुंचे और नकद ₹8 लाख देकर तीनों आरोपियों को छुड़ाने का दावा किया जा रहा है। अब रकम वापस न मिलने की आशंका से चंदा देने वाले लोग कथित तौर पर आरोपियों और उनके परिजनों से पैसे लौटाने की मांग कर रहे हैं।

आरोप है कि इस्लामनगर थाने में तैनात दो चर्चित सिपाही काफी समय से वहीं डटे हुए हैं। इन्हीं सिपाहियों ने कथित तौर पर ग्राहक बनकर सिरौली इलाके के लोगों से अफीम खरीदने का सौदा किया था। इसी दौरान दो कथित तस्करों के साथ बदायूं के दबतोरी गांव का एक युवक भी पहुंचा। पुलिस ने एक दरोगा के साथ मिलकर तीनों को करीब डेढ़ किलो अफीम के साथ पकड़ लिया।

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इसके बाद आरोप है कि तीनों को थाने के मुख्य रास्ते से न ले जाकर पिछले गेट से थाना परिसर में स्थित पुलिसकर्मियों के आवास की ओर ले जाया गया। वहीं कथित तौर पर उन्हें छोड़ने के लिए रकम को लेकर बातचीत हुई। इसी दौरान शिवपुरी गांव निवासी एक शिक्षक के बेटे ने आरोपियों को छुड़ाने के लिए ₹8 लाख देने पर सहमति जताई। बताया जा रहा है कि उसने रकम ऑनलाइन भेजने की पेशकश भी की, लेकिन पुलिसकर्मी ऑनलाइन भुगतान लेने के लिए तैयार नहीं हुए।

इसके बाद नकद रकम जुटाने की कवायद शुरू हुई। आरोप है कि शिवपुरी गांव में रातभर चंदा किया गया। ग्रामीणों से रकम जुटाने के बाद कई गाड़ियों में लोग इस्लामनगर थाने पहुंचे। वहां ₹8 लाख नकद देने के बाद तीनों आरोपियों को कथित तौर पर पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में किस स्तर पर किस पुलिसकर्मी की भूमिका रही और रकम वास्तव में किसे दी गई, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच शुरू कराई गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सीओ बिल्सी को जांच सौंपी है। एसएसपी ने कहा कि आरोपों की जांच कराई जा रही है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर थाना प्रभारी समेत उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा सकती है, जिनकी भूमिका सामने आएगी।

मामले में आरोपियों और उन्हें छुड़ाने के लिए रकम जुटाने वाले लोगों के बीच भी तनाव की स्थिति बताई जा रही है। ग्रामीणों को अब चंदे के रूप में जुटाई गई रकम के फंसने की चिंता है। दूसरी ओर, जिन लोगों पर कथित रूप से पुलिस तक रकम पहुंचाने में मदद करने का आरोप है, वे भी जांच और संभावित कार्रवाई को लेकर दबाव में बताए जा रहे हैं।

घटनाक्रम को लेकर पुलिस विभाग के भीतर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। यह आरोप भी सामने आया है कि कार्रवाई में शामिल दरोगा को कथित सौदे में हिस्सा नहीं मिला और उसी के कारण मामले की जानकारी बाहर आई। हालांकि, यह दावा अभी जांच का विषय है। इसी तरह थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारियों को कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी होने और इंटरनेट कॉल के जरिए बातचीत होने की चर्चा भी है।

पुलिस जांच में अब यह स्पष्ट किया जाना है कि तीनों लोगों को किस आधार पर पकड़ा गया, बरामद अफीम का क्या हुआ, उन्हें थाने में कितनी देर रखा गया, ₹8 लाख की रकम किसने ली और बाद में तीनों को किस प्रक्रिया के तहत छोड़ा गया। साथ ही पुलिसकर्मियों की भूमिका, कथित चंदे और नकद भुगतान से जुड़े तथ्यों की भी जांच होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तय हो सकेगी।

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