बरेली में डॉक्टर का ऑनलाइन अपॉइंटमेंट दिलाने के नाम पर WhatsApp से APK फाइल डाउनलोड कराकर खाते से ₹5.06 लाख निकालने का मामला सामने आया है।

डॉक्टर का ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के चक्कर में फंसा जाल, एपीके फाइल डाउनलोड कराते ही खाते से ₹5.06 लाख साफ

Team The420
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बरेली। डॉक्टर के यहां ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के लिए गूगल पर मोबाइल नंबर खोजना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर डॉक्टर का अपॉइंटमेंट दिलाने के नाम पर उसे व्हाट्सऐप के जरिए एपीके फाइल डाउनलोड कराई और इसके बाद उसके बैंक खाते से करीब ₹5.06 लाख निकाल लिए। बरेली में इस तरह का यह पहला मामला सामने आने की बात कही जा रही है। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

इफको कॉलोनी निवासी सर्वेश शर्मा ने साइबर थाना प्रभारी को दी शिकायत में बताया कि 24 अगस्त को उनके बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई थी। बच्चे को डॉक्टर को दिखाने के लिए उन्होंने अयूब खां चौराहे के पास स्थित नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ के यहां अपॉइंटमेंट लेने का फैसला किया। डॉक्टर का संपर्क नंबर हासिल करने के लिए उन्होंने मोबाइल फोन पर गूगल सर्च किया।

सर्वेश को इंटरनेट पर एक मोबाइल नंबर दिखाई दिया। उन्होंने उस नंबर पर फोन कर डॉक्टर के यहां मरीज का नंबर लगाने के बारे में जानकारी मांगी। आरोप है कि कॉल उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को अपॉइंटमेंट से संबंधित व्यवस्था का जानकार बताते हुए कहा कि मरीज का नंबर लगाने का तरीका बदल गया है। उसने सर्वेश से कहा कि अपॉइंटमेंट के लिए उनके व्हाट्सऐप नंबर पर एक फाइल भेजी जा रही है, जिसे डाउनलोड करने के बाद प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

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कुछ ही देर बाद सर्वेश के व्हाट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी गई। साइबर अपराधी ने कथित तौर पर इसे डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा। सर्वेश ने आरोपी के बताए तरीके से फाइल डाउनलोड कर ली। हालांकि, इसके बाद भी डॉक्टर का अपॉइंटमेंट नहीं हो सका। बाद में उन्होंने डॉक्टर के क्लीनिक पर सीधे पहुंचकर बच्चे को दिखाया और दवा ली।

उस समय उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि मोबाइल में डाउनलोड की गई फाइल के जरिए उनके साथ साइबर धोखाधड़ी की जा चुकी है। करीब 19 दिन बाद 12 सितंबर को जब सर्वेश बैंक शाखा पहुंचे, तब उन्हें खाते से बड़ी रकम निकाले जाने की जानकारी मिली। बैंक रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि उनके खाते से लगभग ₹5.06 लाख की रकम निकल चुकी थी। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत साइबर पुलिस से की।

साइबर पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने डॉक्टर के अपॉइंटमेंट के बहाने पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। पुलिस को आशंका है कि व्हाट्सऐप पर भेजी गई एपीके फाइल में मैलवेयर हो सकता है। ऐसी संदिग्ध फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का रास्ता बना सकती है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि फाइल ने मोबाइल में किस तरह काम किया और इसके बाद बैंक खाते से रकम निकालने के लिए अपराधियों ने किस माध्यम का इस्तेमाल किया।

पुलिस बैंक खाते से हुए लेनदेन, रकम निकासी के तरीके, संबंधित मोबाइल नंबर और एपीके फाइल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसके अलावा जिस नंबर से सर्वेश को कॉल किया गया और जिस नंबर पर व्हाट्सऐप के जरिए फाइल भेजी गई, उसकी भी पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ताओं के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इस वारदात के पीछे एक व्यक्ति था या किसी संगठित साइबर गिरोह का हाथ है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लोगों को गूगल या अन्य इंटरनेट माध्यमों से मिले अनजान मोबाइल नंबरों पर बिना सत्यापन भरोसा न करने की सलाह दी है। खासकर डॉक्टर, अस्पताल, बैंक, कूरियर या किसी अन्य सेवा का संपर्क नंबर खोजते समय आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित माध्यम से नंबर की पुष्टि करने पर जोर दिया गया है।

साइबर पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करना जोखिम भरा हो सकता है। एंड्रॉयड पैकेज किट यानी एपीके फाइल सामान्य एप्लीकेशन की तरह दिख सकती है, लेकिन यदि वह किसी अज्ञात स्रोत से भेजी गई हो तो उसमें दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर छिपा हो सकता है। ऐसी फाइल के जरिए मोबाइल और उसमें मौजूद जानकारी को नुकसान पहुंचाने या उसका दुरुपयोग करने की आशंका रहती है।

पीड़ित की तहरीर पर साइबर थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि गूगल पर डॉक्टर के नाम से दिखाई देने वाला मोबाइल नंबर किसने सक्रिय किया था और क्या इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया है।

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