अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुनर्गठित SIT ने जांच के दौरान 105 कथित घटनाओं की पहचान की है और जांच पूरी होने की जानकारी अदालत में दी गई है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच का अंतिम पड़ाव, 105 घटनाएं चिन्हित; अब रकम और आरोपियों की भूमिका पर नजर

Team The420
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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित चोरी की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। 4 जून को गणना कक्ष के शौचालय में नकदी छिपाए जाने की घटना सामने आने के बाद शुरू हुई पड़ताल में पहले करीब 70 घटनाओं से जुड़े सीसीटीवी साक्ष्य मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पुनर्गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, दस्तावेज और गवाहों के बयानों की विस्तृत जांच की। 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर बताया कि जांच में चढ़ावा चोरी की 105 घटनाओं की पहचान हुई है और एसआईटी की जांच पूरी हो चुकी है। अब अदालत के सामने कथित तौर पर चोरी हुई कुल रकम और आरोपियों की भूमिका से जुड़े तथ्य रखे जाने हैं।

4 जून को सामने आई थी नकदी छिपाने की घटना

मामले की शुरुआत 4 जून को हुई, जब राम मंदिर के चढ़ावे की रकम की गणना के दौरान गणना कक्ष के शौचालय में नकदी छिपाए जाने की घटना सामने आई। इसके बाद मंदिर परिसर और चढ़ावे की गणना से जुड़े स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की गई। शुरुआती पड़ताल में सामने आए दृश्य आगे की जांच के लिए अहम आधार बने।

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7 जून को आरोप सार्वजनिक हुए

7 जून को सपा नेता पवन पांडेय ने मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से करोड़ों रुपये की कथित चोरी के आरोप लगाए। उसी शाम सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया के जरिए मामला उठाया। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट की ओर से आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया गया और जांच को लेकर गतिविधियां तेज हुईं।

8 और 10 जून को हुईं अहम बैठकें

8 जून को मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने चढ़ावे की चोरी से जुड़े आरोपों को खारिज किया। इसी दौरान मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे और अधिकारियों के साथ मामले पर चर्चा की। 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की। उसी दिन नृपेंद्र मिश्र ने अधिकारियों के साथ बैठक कर घटनाक्रम की जानकारी ली।

11 जून को पूर्व लेखाकार के दावे से बढ़ा विवाद

11 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह का एक वीडियो सामने आया। उन्होंने दावा किया कि 2021-22 में उन्होंने चढ़ावे से जुड़ी चोरी पकड़ी थी और उससे संबंधित सीसीटीवी फुटेज कथित तौर पर हटा दिए गए थे। उनके इन दावों की बाद की जांच में भी पड़ताल की गई।

13 जून को पहली एसआईटी बनी

ट्रस्ट के आग्रह पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मामले की जांच के लिए पहली एसआईटी गठित की। टीम ने ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और चढ़ावे की गणना से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की। 15 से 20 जून के बीच पूछताछ के साथ दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले गए।

15 जून को चंपत राय और गोपाल राय समेत कर्मचारियों से सवाल-जवाब हुए। 16 जून को ट्रस्ट से जुड़े करीब 11 महीने के दस्तावेजों की जांच की गई। 17 जून को बैंक अधिकारियों और नोट गिनने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ हुई। 18 जून को डॉ. अनिल मिश्र समेत अन्य लोगों से जानकारी ली गई। 19 जून को चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राय से अलग-अलग पूछताछ के साथ एसबीआई अधिकारियों से भी जानकारी जुटाई गई। 20 जून को संदिग्धों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड एकत्र करने के बाद टीम लखनऊ रवाना हुई।

23 जून को मिली 70 घटनाओं की जानकारी

पहली एसआईटी ने 23 जून को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को करीब 20 पन्नों की प्राथमिक रिपोर्ट सौंपी। जांच में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच 42 दिनों के दौरान चढ़ावे की रकम से जुड़ी करीब 70 कथित चोरी की घटनाओं के सीसीटीवी साक्ष्य मिलने की जानकारी सामने आई।

25 जून को एफआईआर, अगले दिन आठ गिरफ्तार

25 जून को रामजन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। नामजद आरोपियों में रामशंकर यादव, अनुकूल मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल थे। 26 जून को एफआईआर में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

25 जुलाई को एसआईटी का पुनर्गठन

मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जुलाई को एसआईटी का पुनर्गठन किया। आईजी किरण एस की अध्यक्षता में नई टीम गठित की गई। जांच को आगे बढ़ाते हुए सीसीटीवी फुटेज के साथ बैंकिंग रिकॉर्ड, दस्तावेज और गवाहों के बयान दोबारा जांचे गए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फॉरेंसिक ऑडिटर को भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया।

अगस्त और सितंबर में जांच का दायरा बढ़ा

पुनर्गठित एसआईटी ने पहले सामने आए करीब 70 मामलों से जुड़े साक्ष्यों के अलावा अन्य सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान, बैंकिंग लेनदेन और दस्तावेजों का मिलान किया। इस विस्तृत जांच के दौरान कथित चोरी की घटनाओं की संख्या बढ़कर 105 हो गई। इससे जांच का दायरा शुरुआती अनुमान से काफी व्यापक हो गया।

21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में 105 घटनाओं का खुलासा

21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर बताया कि जांच के दौरान चढ़ावा चोरी की 105 घटनाओं की पहचान की गई है। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

अब मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर अदालत के सामने रखे जाने वाले तथ्य होंगे। 105 घटनाओं में कुल कितनी रकम कथित तौर पर चोरी हुई, अलग-अलग घटनाओं में किस तरह के साक्ष्य मिले, गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका क्या रही और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का स्वरूप क्या है—इन सवालों पर अदालत में विस्तृत जानकारी सामने आनी बाकी है। जांच पूरी होने के बाद अब इन तथ्यों पर कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होगी।

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