हैदराबाद। तेलंगाना के सिद्धिपेट जिले में एक युवक की मौत से जुड़े कथित वित्तीय धोखाधड़ी और धन संचलन मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने क्यूनेट समेत 16 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला वर्गल मंडल के वेलूर गांव निवासी बडुगु हरिकृष्ण की मौत से जुड़ा है। शिकायत और एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि हरिकृष्ण ने डिजिटल ऋण मंचों से रकम उधार लेकर ऑनलाइन सट्टेबाजी, गेमिंग ऐप और क्यूनेट से जुड़े निवेश में पैसा लगाया था। इन गतिविधियों में उसे करीब ₹4 लाख का नुकसान होने की बात सामने आई है।
हरिकृष्ण की 9 अक्टूबर 2025 को उसके घर में मौत हो गई थी। घटना के बाद उसके पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक स्तर पर सिद्धिपेट जिले के गोवरारम थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच आगे बढ़ने के बाद मामला तेलंगाना अपराध जांच विभाग को सौंप दिया गया। 4 मार्च 2026 को जांच सीआईडी के पास पहुंची। बाद में राज्य सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने का फैसला किया।
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सीबीआई ने सीआईडी से प्राप्त दस्तावेजों और जांच रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद मामले को नियमित मामला बनाते हुए अपनी एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में क्यूनेट, वीहान डायरेक्ट सेलिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड तथा उससे जुड़े कुछ निदेशकों और कथित प्रत्यक्ष बिक्री सहयोगियों समेत कुल 16 आरोपियों को नामजद किया गया है। केंद्रीय एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटेगी कि कथित निवेश और धन संचलन की गतिविधियां किस तरीके से संचालित हो रही थीं और इनमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
जांच का एक प्रमुख हिस्सा हरिकृष्ण के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा होगा। सीबीआई यह पता करेगी कि उसने डिजिटल ऋण मंचों से कितनी रकम उधार ली, वह पैसा किन गतिविधियों में लगाया गया और कथित नुकसान किस तरह हुआ। इसके साथ ही क्यूनेट और संबंधित संस्थाओं से जुड़े लेनदेन, खातों तथा निवेश से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता के साथ पुरस्कार चिट्स और धन संचलन योजनाएं प्रतिबंधित अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। इन प्रावधानों के तहत कथित धन संचलन और निवेश गतिविधियों की प्रकृति की जांच की जाएगी। हालांकि एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और किसी आरोपी की भूमिका अंतिम रूप से जांच पूरी होने तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
जांच के दौरान हरिकृष्ण की आर्थिक स्थिति और उसकी मौत से पहले की परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। शिकायत में बताया गया है कि वह आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था। यह भी सामने आया है कि उसने मौत से पहले एक नोट छोड़ा था, जिसमें आर्थिक कठिनाइयों का उल्लेख था। सीबीआई इस नोट समेत उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी और यह समझने का प्रयास करेगी कि उसके ऊपर आर्थिक दबाव किस तरह बना तथा इसमें कथित निवेश गतिविधियों की क्या भूमिका थी।
मामले की जांच को सीबीआई तक पहुंचने की प्रक्रिया भी कई चरणों में पूरी हुई। स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच के बाद मामला सीआईडी को दिया गया और फिर राज्य सरकार के फैसले के बाद केंद्रीय एजेंसी ने इसकी जिम्मेदारी संभाली। सीबीआई अब पहले की जांच में जुटाए गए दस्तावेजों के साथ नए सिरे से वित्तीय और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल करेगी।
क्यूनेट से जुड़े कथित धन संचलन मामलों में तेलंगाना में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। मार्च 2026 में पुलिस ने तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में कथित अवैध धन संचलन गतिविधियों से जुड़े मामलों में 32 लोगों को गिरफ्तार किया था। उन मामलों में बहुस्तरीय विपणन नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर लोगों से रकम जुटाने और निवेश गतिविधियों की जांच की गई थी।
अब सिद्धिपेट मामले में सीबीआई कथित वित्तीय नेटवर्क की कड़ियों, आरोपियों की भूमिकाओं, निवेश के तौर-तरीकों और हरिकृष्ण से जुड़े लेनदेन की जांच करेगी। एजेंसी यह भी निर्धारित करेगी कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य मौजूद हैं और युवक की मौत से पहले की आर्थिक परिस्थितियों का कथित निवेश गतिविधियों से क्या संबंध था। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और तथ्य सामने आने की संभावना है।
