रामपुर। आधार कार्ड बनाने और अपडेट करने की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का रामपुर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में डाकघर के ब्रांच पोस्टमास्टर (बीपीएम) समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य आधार संबंधी काम के लिए आने वाले लोगों से धोखे से दोबारा अंगूठा लगवाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन के लिए किया जाता था।
मामला सिविल लाइंस क्षेत्र के पसियापुरा जनूबी गांव का है। पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह 20 जून को अपने बच्चे का आधार कार्ड बनवाने के लिए गांव के पंचायत घर पहुंची थीं। वहां आधार बनाने के लिए किट लेकर काम कर रहे डाकघर से जुड़े दो कर्मचारियों ने बच्चे का आधार कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिया। इसी दौरान कथित तौर पर महिला से दोबारा अंगूठा लगवाया गया।
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महिला के मुताबिक, उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि दोबारा लिया जा रहा अंगूठा किसी अन्य प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस जांच के अनुसार, इसी बायोमीट्रिक जानकारी का कथित तौर पर दुरुपयोग कर महिला के नाम पर एक बैंक खाता चालू कराया गया। खाते के खुलने और उसके इस्तेमाल की जानकारी महिला को तत्काल नहीं हुई।
फर्जी खाते का पता तब चला जब 22 अगस्त को महाराष्ट्र के ठाणे के निजामपुरा क्षेत्र की पुलिस की ओर से महिला को एक नोटिस मिला। इसमें उसके नाम से जुड़े खाते से ₹1.70 लाख के कथित अवैध वित्तीय लेनदेन का उल्लेख था। नोटिस में डिजिटल अरेस्ट से संबंधित चेतावनी भी दी गई थी। अचानक अपने नाम पर वित्तीय लेनदेन और पुलिस कार्रवाई की जानकारी मिलने से महिला हैरान रह गई। इसके बाद उसने मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में बैंक खाते, आधार से जुड़ी जानकारी और बायोमीट्रिक प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ी गईं। इसके बाद पुलिस को ऐसे नेटवर्क का पता चला, जिसमें लोगों की पहचान संबंधी जानकारी का इस्तेमाल बैंक खाते खुलवाने के लिए किए जाने का आरोप है।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने गिरोह से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें डाकघर का एक ब्रांच पोस्टमास्टर भी शामिल है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कितने लोगों के नाम पर इसी तरह बैंक खाते खोले गए और इन खातों का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 29 सिम कार्ड भी बरामद किए हैं। जांच एजेंसियां इन सिम कार्ड के इस्तेमाल, उनसे जुड़े मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में लगी है कि गिरोह के तार किन राज्यों और किन अन्य लोगों से जुड़े हैं।
साइबर अपराध की जांच में ऐसे बैंक खातों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने या आगे भेजने के लिए किया जाता है। ऐसे खातों को अक्सर दूसरे लोगों के दस्तावेजों या पहचान संबंधी जानकारी के जरिए संचालित करने की कोशिश की जाती है। इस मामले में पुलिस यह पता लगा रही है कि महिला के नाम पर खोले गए खाते से कथित ₹1.70 लाख का लेनदेन किस उद्देश्य से किया गया और रकम आगे किन खातों या व्यक्तियों तक पहुंची।
पुलिस के सामने अब गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने, अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने और फर्जी खातों से जुड़े लेनदेन की जांच करने की चुनौती है। बरामद सिम कार्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
