टोडरपुर की शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज में वित्तीय अनियमितता के आरोप; करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण मिल के बजाय निजी कंपनी में लगाने का दावा, किसानों का 20 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया

150 करोड़ की संपत्ति गिरवी रखकर बढ़ाया कर्ज, निजी कंपनी में रकम लगाने का आरोप; जांच के आदेश

Roopa
By Roopa
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सहारनपुर। टोडरपुर स्थित शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 150 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की संपत्ति को गिरवी रखकर कर्ज बढ़ाने और अतिरिक्त रकम को कथित तौर पर निजी कंपनी में लगाने के आरोपों की अब शासन स्तर से जांच होगी। चीनी मिल के एक निदेशक की शिकायत पर शासन ने जिलाधिकारी को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में थाना चिलकाना में संबंधित निदेशक और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज है। पुलिस स्तर पर भी मामले की जांच जारी है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मिल के संचालन के लिए पहले करीब 25 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था। इसके बाद मिल की 150 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखकर कर्ज को कम ब्याज दर के नाम पर एचडीएफसी बैंक में स्थानांतरित कराया गया। आरोप है कि इसी संपत्ति के आधार पर बाद में करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण हासिल किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह रकम चीनी मिल के संचालन के बजाय निजी कंपनी में लगा दी गई।

मामला केवल कर्ज और संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में अन्य निदेशकों की सहमति के बिना अतिरिक्त धन लगाने, मिल के नियंत्रण में बदलाव करने और हिस्सेदारी बढ़ाने के भी आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के आधार पर प्रशासन अब कंपनी के वित्तीय लेनदेन, बैंक से लिए गए कर्ज और मिल की संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगा। पुलिस पहले से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर संबंधित पक्षों के बयान और दस्तावेज जुटा रही है।

शिकायत के अनुसार, शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड का संचालन तीन निदेशकों से जुड़े समूह के माध्यम से किया जाता है। इनमें मेयर कमोडिटीज इंडिया लिमिटेड, फेथ मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड और आरके एंड डी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े निदेशक शामिल हैं। मिल की संपत्ति को गिरवी रखने, कर्ज बढ़ाने और रकम के इस्तेमाल को लेकर इन्हीं कारोबारी हितों के बीच विवाद सामने आया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, चीनी मिल करीब 10 वर्षों तक बंद रही थी और वर्ष 2022 में दोबारा इसका संचालन शुरू कराया गया। मिल को फिर से चलाने के लिए शुरुआती दौर में करीब 25 करोड़ रुपये का कर्ज ऊंची ब्याज दर पर लिया गया था। बाद में आरोप है कि मिल की संपत्ति को गिरवी रखकर इस कर्ज को एचडीएफसी बैंक में स्थानांतरित कराया गया। इसके बाद उसी संपत्ति के आधार पर अतिरिक्त ऋण लेने का आरोप लगाया गया है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

शिकायतकर्ता का दावा है कि करीब 30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम मिल की मरम्मत, रखरखाव या संचालन में इस्तेमाल नहीं की गई। आरोप है कि रकम को निजी कंपनी की गतिविधियों में लगाया गया। इसी वजह से मिल के वित्तीय प्रबंधन और निदेशकों के बीच अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ गया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

विवाद तब और सामने आया जब बैंक की ओर से कर्ज की किश्त जमा नहीं होने को लेकर नोटिस जारी किया गया। शिकायत के अनुसार, वित्तीय संकट के चलते मिल की मरम्मत और रखरखाव का काम प्रभावित हुआ। कर्मचारियों के वेतन पर भी असर पड़ा और इस वर्ष मिल का संचालन नहीं हो सका। मिल के संचालन में आई इस रुकावट का असर किसानों के भुगतान पर भी पड़ा है।

गन्ना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज पर पेराई सत्र 2024-25 का किसानों का करीब 20 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है। प्रशासनिक जांच में अब यह भी देखा जाएगा कि मिल की वित्तीय स्थिति किस वजह से खराब हुई और कर्ज तथा उपलब्ध धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया। किसानों के बकाये और कर्मचारियों के वेतन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

शिकायतकर्ता ने शासन में शिकायत भेजने से पहले 8 जुलाई को थाना चिलकाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस के अनुसार, मामले में आरोपी पक्ष की ओर से भी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। इन दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है और पूरे प्रकरण में कानूनी सलाह भी ली जा रही है।

शासन के निर्देश के बाद जिलाधिकारी स्तर से होने वाली जांच में मिल की संपत्तियों के मूल्य, उन्हें गिरवी रखने की प्रक्रिया, बैंक से लिए गए कर्ज, अतिरिक्त 30 करोड़ रुपये के ऋण और उसके इस्तेमाल की पड़ताल की जाएगी। साथ ही निदेशकों के बीच हुए समझौतों, हिस्सेदारी में कथित बदलाव और मिल के नियंत्रण से जुड़े निर्णयों की भी जांच होगी। प्रशासनिक रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

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