करेंसी चेस्ट की वैन पर लंबे समय से तैनात था गिरफ्तार चालक; एनआईए खंगाल रही नकदी की आवाजाही, बैंक कर्मचारियों से संपर्क और जाली नोटों के स्रोत से जुड़ी कड़ियां

17.29 करोड़ के जाली नोट और आठ साल पुराना कनेक्शन, चालक से पूछताछ में खुलेंगे कई राज

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By Roopa
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सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में चालक की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। करीब आठ साल तक करेंसी चेस्ट की वैन पर तैनात रहे चालक से पूछताछ के जरिए जांच एजेंसी नकदी की आवाजाही से लेकर बैंक के अंदर और बाहर उसके संपर्कों तक की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। लंबे समय तक करेंसी चेस्ट से जुड़े रहने के कारण उसे वहां की कार्यप्रणाली, नकदी के परिवहन और कर्मचारियों की गतिविधियों की जानकारी होने की आशंका है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस पहलू की पड़ताल कर रही है कि चालक की भूमिका केवल नकदी के परिवहन तक सीमित थी या उसे जाली नोटों से जुड़ी किसी गतिविधि की जानकारी भी थी। जांच एजेंसी उसके संपर्क में रहे बैंक कर्मचारियों और अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और उपलब्ध डिजिटल जानकारी के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह नियमित रूप से किन लोगों के संपर्क में था और करेंसी चेस्ट से जुड़ी गतिविधियों के दौरान उसकी किन लोगों से बातचीत होती थी।

चालक की करीब आठ साल पुरानी तैनाती जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करेंसी चेस्ट की वैन के जरिए नकदी के एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन की प्रक्रिया में शामिल रहने के कारण उसे नकदी की आवाजाही से जुड़े कई स्तरों की जानकारी होने की संभावना है। एजेंसी यह भी जांच रही है कि नकदी के परिवहन के दौरान वह किन कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के संपर्क में आता था। बैंक से बाहर के किसी संदिग्ध व्यक्ति से संपर्क होने की स्थिति में उसकी प्रकृति और उद्देश्य की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच का सबसे अहम सवाल यह है कि 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट आखिर करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जाली नोट कहां से आए, उन्हें किस माध्यम से बैंक तक पहुंचाया गया और इस प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि जाली नोटों के बदले असली मुद्रा का इस्तेमाल हुआ या नहीं और यदि हुआ तो वह रकम कहां गई।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

चालक से यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसे जाली नोटों के बारे में कब और किस परिस्थिति में जानकारी हुई। उसके बयान को बैंक के रिकॉर्ड, अन्य आरोपियों से मिली जानकारी और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों से मिलाकर देखा जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता कर रही है कि यदि उसे किसी स्तर पर इस मामले की जानकारी थी तो उसने उसके बाद किन लोगों से संपर्क किया और क्या किसी व्यक्ति को इसकी सूचना दी गई।

करेंसी चेस्ट में तैनात बैंक कर्मचारियों की गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी संबंधित अवधि में कर्मचारियों की ड्यूटी, नकदी के आने-जाने के रिकॉर्ड और करेंसी चेस्ट से जुड़े कामकाज की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास है कि जाली नोटों की आवाजाही में बैंक के भीतर किसी कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं। संदिग्ध लेनदेन और कर्मचारियों के आपसी संपर्क की जानकारी को भी जांच से जोड़ा जा रहा है।

एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि करेंसी चेस्ट में नकदी पहुंचने से लेकर जाली नोटों की पहचान होने तक निर्धारित प्रक्रिया के कौन-कौन से चरण अपनाए गए। रिकॉर्ड में दर्ज नकदी और वास्तविक रूप से मिली मुद्रा के बीच अंतर की भी पड़ताल की जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि जाली नोटों को असली नोटों के बीच किस स्तर पर शामिल किया गया और उनकी पहचान होने में कितना समय लगा।

इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उनके संपर्कों की जांच के आधार पर संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश भी जारी है।

जांच अब केवल करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों तक सीमित नहीं रह गई है। एजेंसी जाली नोटों के स्रोत, उन्हें बैंक तक पहुंचाने वाले लोगों, संभावित अंदरूनी मददगारों और असली मुद्रा से जुड़े कथित लेनदेन की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। चालक से पूछताछ और उसके करीब आठ साल के कार्यकाल से जुड़े संपर्कों की पड़ताल के बाद जांच में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। एजेंसी यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के पीछे कितने लोगों का नेटवर्क था और बैंक की व्यवस्था में सेंध किस स्तर पर लगी।

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