सीजीएसटी दिल्ली दक्षिण आयुक्तालय की कार्रवाई; कई आपूर्तिकर्ता फर्में जांच में गैर-मौजूद, निष्क्रिय या रद्द मिलीं, अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

₹140.14 करोड़ के फर्जी बिलों से ₹25.22 करोड़ का आईटीसी फर्जीवाड़ा, दिल्ली में आयरन-स्टील कारोबारी गिरफ्तार

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By Roopa
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नई दिल्ली। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) दिल्ली दक्षिण आयुक्तालय ने करीब ₹140.14 करोड़ के कथित फर्जी चालानों के जरिए ₹25.22 करोड़ से अधिक के अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने, उसका इस्तेमाल करने और आगे हस्तांतरित करने के आरोप में आयरन-स्टील कारोबारी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई फर्जी आईटीसी दावों के खिलाफ चलाए जा रहे प्रवर्तन अभियान के तहत की गई।

सीजीएसटी दिल्ली दक्षिण आयुक्तालय की एंटी-एवेजन शाखा ने कारोबारी को 17 सितंबर को केंद्रीय जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, जांच में सामने आया कि संबंधित फर्म ने कई आपूर्तिकर्ताओं की ओर से जारी चालानों के आधार पर आईटीसी का दावा किया था। जांच के दौरान इनमें से कई आपूर्तिकर्ता फर्में गैर-मौजूद, गैर-कार्यशील, निलंबित या रद्द पाई गईं। क्षेत्रीय सत्यापन के दौरान कुछ ऐसी फर्मों के घोषित कारोबारी पते भी जांचे गए, जहां कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं मिली।

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कारोबारी फर्म ने वास्तविक रूप से माल प्राप्त किए बिना ही इन चालानों के आधार पर आईटीसी का दावा किया। इसके बाद कथित तौर पर बिना किसी वास्तविक माल आपूर्ति के अन्य प्राप्तकर्ताओं को चालानों के जरिए यह क्रेडिट आगे हस्तांतरित किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, मामले में करीब ₹140.14 करोड़ के चालानों से संबंधित ₹25.22 करोड़ से अधिक के कथित फर्जी आईटीसी की जांच की जा रही है। आईटीसी के तहत कारोबारी नियमों और निर्धारित शर्तों के अधीन इनपुट पर चुकाए गए पात्र जीएसटी को अपनी कर देनदारी के विरुद्ध समायोजित कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक आपूर्ति के बिना जारी किए गए फर्जी चालानों के आधार पर आईटीसी का दावा नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

विभाग ने बताया कि गिरफ्तारी जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 70 के तहत दर्ज किए गए बयानों के आधार पर की गई। जांच एजेंसी ने कथित लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और आपूर्तिकर्ताओं की वास्तविक स्थिति की भी पड़ताल की।

मामले में सामने आई आपूर्तिकर्ता फर्मों की स्थिति जांच का अहम हिस्सा है। कई फर्मों के अस्तित्व और कारोबारी गतिविधियों की पुष्टि नहीं होने से विभाग ने उन चालानों की वास्तविकता पर सवाल उठाया, जिनके आधार पर आईटीसी का दावा किया गया था। क्षेत्रीय सत्यापन में कारोबारी गतिविधि नहीं मिलने की जानकारी भी जांच में शामिल है।

फिलहाल विभाग इस कथित आईटीसी फर्जीवाड़े से जुड़े लेनदेन और इसमें शामिल अन्य पक्षों की भूमिका की जांच कर रहा है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। यह जांच यह निर्धारित करने पर भी केंद्रित होगी कि फर्जी चालानों के जरिए आईटीसी का लाभ लेने और उसे आगे पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन से कारोबारी या संस्थान शामिल थे।

सीजीएसटी की कार्रवाई ऐसे मामलों पर केंद्रित प्रवर्तन अभियान का हिस्सा है, जिसमें बिना वास्तविक माल या सेवा आपूर्ति के चालानों के आधार पर आईटीसी का दावा किए जाने की जांच की जाती है। दिल्ली दक्षिण आयुक्तालय की इस कार्रवाई में ₹25.22 करोड़ से अधिक के कथित अनुचित आईटीसी और करीब ₹140.14 करोड़ के चालानों से जुड़े लेनदेन की जांच जारी है।

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