अहमदाबाद। शहर के नवरंगपुरा इलाके में एक डॉक्टर ने अस्पताल में जांच प्रयोगशाला शुरू कराने के नाम पर ₹59 लाख की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। डॉक्टर का आरोप है कि अस्पताल के प्रबंधन से जुड़े एक व्यक्ति ने प्रयोगशाला के लिए जगह और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। इसके बाद समझौते के तहत रकम ली गई, लेकिन कुछ महीनों बाद अस्पताल में प्रयोगशाला का संचालन बंद हो गया। मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार, डॉक्टर करीब 25 वर्षों से वासणा क्षेत्र में एक प्रयोगशाला चला रहे हैं। मई 2025 में उन्होंने अलग-अलग अस्पतालों में नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने की संभावनाएं तलाशनी शुरू की थीं। इसी दौरान एक परिचित के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति से उनका संपर्क हुआ। दोनों के बीच मिथाखली के पास सीजी रोड स्थित एक निजी अस्पताल में प्रयोगशाला शुरू करने को लेकर बातचीत हुई।
आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को अस्पताल के प्रबंधन से जुड़ा बताया और कहा कि जल्द ही अस्पताल का अधिग्रहण भी किया जा सकता है। डॉक्टर को भरोसा दिलाया गया कि प्रयोगशाला के लिए पर्याप्त जगह और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और इस कारोबार से अच्छा मुनाफा होगा।
इसके बाद 3 मई 2025 को डॉक्टर, उनकी पत्नी और संबंधित कारोबारी के बीच सात साल के लिए समझौता हुआ। इसमें तीन साल की लॉक-इन अवधि रखी गई थी। शिकायत के मुताबिक, डॉक्टर को ₹50 लाख की वापसी योग्य जमा राशि देनी थी और प्रयोगशाला के मासिक कारोबार का 35 फीसदी हिस्सा साझा करना था।
डॉक्टर ने समझौते के तहत तीन चेक जारी किए। इनमें ₹17 लाख का पहला चेक 5 मई, ₹17 लाख का दूसरा चेक 15 जून और ₹16 लाख का तीसरा चेक 31 जुलाई की तारीख का था। शिकायत में कहा गया है कि पहले दो चेक क्रमशः 7 मई और 18 जून को भुना लिए गए।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
इसी बीच 14 जुलाई को डॉक्टर से कथित तौर पर ₹25 लाख और मांगे गए। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने इसे तत्काल जरूरत बताते हुए 31 जुलाई से पहले रकम लौटाने का भरोसा दिया। डॉक्टर ने अपनी दूसरी फर्म के एचडीएफसी बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिए यह रकम संबंधित कारोबारी फर्म के एक्सिस बैंक खाते में भेजी। हालांकि, 31 जुलाई को रकम वापस मांगने पर कथित तौर पर भुगतान टाल दिया गया और तीसरा चेक भी वापस नहीं किया गया।
शिकायत के मुताबिक, 19 अगस्त 2025 को डॉक्टर को जानकारी मिली कि अस्पताल को संबंधित कारोबारी को बेचने का प्रस्तावित सौदा रद्द हो गया है। इसके बावजूद उन्हें बताया गया कि प्रयोगशाला का संचालन जारी रहेगा और नया समझौता किया जाएगा। डॉक्टर का आरोप है कि इसके बाद रकम वापस मांगने पर उन्हें अलग-अलग कारण बताए जाते रहे और भुगतान नहीं किया गया।
नवंबर 2025 में अस्पताल प्रबंधन ने कथित तौर पर प्रयोगशाला बंद कर दी। इसके बाद डॉक्टर ने आरोप लगाया कि प्रयोगशाला शुरू कराने के भरोसे पर उनसे रकम ली गई और बाद में समझौते का पालन नहीं किया गया।
हालांकि, शिकायत में दर्ज रकम और भुगतान के विवरण की पुलिस जांच में पुष्टि की जानी बाकी है। तीन चेकों की कुल राशि ₹50 लाख बताई गई है, जबकि अलग से ₹25 लाख का आरटीजीएस हस्तांतरण दर्ज है। ऐसे में शिकायत में बताए गए कुल ₹59 लाख के आंकड़े और लेनदेन के विवरण का मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
नवरंगपुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जांच में समझौते की शर्तों, बैंक खातों में हुए लेनदेन, पक्षों के बीच हुई बातचीत, अस्पताल की बिक्री से जुड़ी परिस्थितियों और प्रयोगशाला बंद किए जाने की वजहों की जांच की जा रही है। अस्पताल और संबंधित कंपनियों से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
