लखनऊ। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए करीब ₹27 करोड़ की कथित कर चोरी के मामले में जांच का सामना कर रहे पूर्व बसपा एमएलसी शाहनवाज राणा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब उनकी आय और चल-अचल संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। जांच एजेंसी राणा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA) का मामला दर्ज करने की संभावनाएं भी तलाश रही है। इसके लिए करीब दो दशक पुराने आयकर रिटर्न, बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
ईडी वर्ष 2007 में एमएलसी बनने से पहले और उसके बाद के वर्षों में राणा की घोषित आय, निवेश, कारोबार तथा अर्जित चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि उनकी घोषित आय और संपत्ति में वृद्धि के बीच कोई असामान्य अंतर तो नहीं है। इसके लिए वर्षों से दाखिल किए गए आयकर रिटर्न की जानकारी को बैंक खातों और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड से मिलाने की तैयारी है।
जांच का दायरा राणा तक सीमित नहीं है। उनके करीबी परिजनों के बैंक खातों और उनके नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं किसी अन्य व्यक्ति या कारोबारी इकाई के नाम पर ऐसी संपत्तियां तो नहीं खरीदी गईं, जिनका वास्तविक संबंध राणा से हो। कारोबार और कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
राणा एक मीडिया हाउस का संचालन भी करते हैं। इस संस्थान से जुड़े परिसरों पर ईडी ने हाल में छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर एजेंसी अब कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़ रही है।
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संपत्तियों और बैंक खातों से जुड़े सुराग
तलाशी के दौरान राणा और उनके परिजनों के नाम पर करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों से जुड़े सुराग मिलने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी को कथित तौर पर ऐसी वित्तीय गतिविधियों की जानकारी भी मिली है, जिनमें कुछ कंपनियों के जरिए रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाने और बाद में नकदी निकाले जाने की आशंका है।
ईडी संबंधित बैंकों से राणा और उनके परिवार से जुड़े खातों का विस्तृत लेन-देन रिकॉर्ड हासिल करेगी। इन रिकॉर्ड का मिलान आयकर रिटर्न में घोषित आय, निवेश और संपत्तियों से किया जाएगा। यदि बैंकिंग लेन-देन और घोषित आय के बीच महत्वपूर्ण अंतर सामने आता है तो एजेंसी इसे आय से अधिक संपत्ति के संभावित मामले के तौर पर आगे बढ़ा सकती है।
फर्जी आईटीसी मामले में पूछताछ के बाद दर्ज होगा बयान
ईडी की जांच फर्जी आईटीसी से जुड़े मूल मामले से भी जुड़ी हुई है। एजेंसी राणा को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। पूछताछ के दौरान फर्जी आईटीसी मामले में उनकी भूमिका, कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े सवालों के जवाब लिए जाने की संभावना है। उनका बयान भी दर्ज किया जा सकता है।
जांच में सहयोग नहीं करने या सामने आए तथ्यों के आधार पर आवश्यकता महसूस होने पर ईडी आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि गिरफ्तारी या नया आय से अधिक संपत्ति मामला दर्ज करने का फैसला जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल ईडी का जोर पुराने वित्तीय रिकॉर्ड को खंगालने और आय तथा संपत्तियों का विस्तृत मिलान करने पर है। करीब 20 साल की वित्तीय गतिविधियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राणा की घोषित आय के मुकाबले उनकी संपत्तियों में कोई ऐसी वृद्धि हुई है या नहीं, जिसका संतोषजनक स्रोत उपलब्ध नहीं है।
