WhatsApp ग्रुप में मुनाफे और सफल निकासी के स्क्रीनशॉट दिखाकर बनाया भरोसा; पहले ₹50 हजार निकालने दिया, बड़ी रकम की निकासी पर खड़ा किया रोक, Cyberabad Cyber Crime में केस

₹2.30 करोड़ का फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में निवेश, 49 वर्षीय सर्जन के खाते से उड़ाई पूरी रकम

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By Roopa
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हैदराबाद। हैदराबाद के बंदलागुड़ा जागीर में रहने वाले 49 वर्षीय निजी अस्पताल के सर्जन से कथित ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड में ₹2.30 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने पहले उन्हें WhatsApp ग्रुप में जोड़कर शेयर बाजार में संस्थागत निवेश, ब्लॉक ट्रेडिंग और IPO आवंटन के जरिए बड़े मुनाफे का भरोसा दिलाया। शुरुआती चरण में ₹50 हजार की निकासी की अनुमति देकर आरोपियों ने उनका विश्वास हासिल किया, लेकिन बाद में बड़ी रकम निकालने की कोशिश करने पर निकासी रोक दी गई।

पुलिस के अनुसार, कथित धोखाधड़ी की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई। पीड़ित को “Grow Invest Tech Pvt Ltd.j9” नाम के WhatsApp ग्रुप में अबिलाशा बिष्ट नाम से पहचान बताने वाली एक महिला ने जोड़ा था। उसने कथित तौर पर बताया कि यह ग्रुप लोगों को ट्रेडिंग कौशल विकसित करने में मदद करता है। ग्रुप का नेतृत्व ललित केशरे नामक व्यक्ति द्वारा किए जाने की बात कही गई, जिसे बाजार विश्लेषक के तौर पर पेश किया गया था।

इसके बाद पीड़ित को भारतीय शेयर बाजार में निवेश के लिए कथित संस्थागत खाते का विकल्प दिया गया। आरोपियों ने ब्लॉक ट्रेडिंग, IPO आवंटन और Qualified Institutional Buyer (QIB) ट्रेडिंग जैसी गतिविधियों में निवेश का प्रस्ताव रखा। सर्जन को एक वेब आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर QIB अकाउंट बनाने के लिए कहा गया। कथित तौर पर ग्रुप से जुड़े लोगों ने अकाउंट बनाने की प्रक्रिया में उनकी मदद की और इसके बाद अलग-अलग लाभार्थी बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए।

शिकायत के मुताबिक, कथित प्लेटफॉर्म खुद को पेशेवर निवेश व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करता था। WhatsApp ग्रुप में सदस्य नियमित रूप से भारी मुनाफे और सफल निकासी के स्क्रीनशॉट साझा करते थे। इन स्क्रीनशॉट के जरिए निवेशकों के बीच यह धारणा बनाई जाती थी कि प्लेटफॉर्म पर वास्तविक ट्रेडिंग हो रही है और लोग लगातार पैसा कमा रहे हैं।

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पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसके ट्रेडिंग अकाउंट में भी बड़ी रकम का मुनाफा दिखाई देने लगा। इससे उसे लगा कि उसका निवेश वास्तव में बढ़ रहा है। शुरुआती चरण में जब उसने रकम निकालने की कोशिश की तो उसे ₹50 हजार निकालने की अनुमति मिल गई। इस निकासी के बाद उसका भरोसा और मजबूत हुआ और उसने प्लेटफॉर्म पर और बड़ी रकम निवेश कर दी।

हालांकि, बाद में जब उसने बड़ी रकम निकालने का प्रयास किया तो उसकी निकासी की मांग कथित तौर पर खारिज, ब्लॉक या लगातार लंबित की जाने लगी। रकम वापस नहीं मिलने पर उसे संदेह हुआ कि पूरा प्लेटफॉर्म फर्जी हो सकता है। शिकायत के अनुसार, तब तक वह कुल ₹2,30,98,146 निवेश कर चुका था।

मामले का पता चलने के बाद पीड़ित ने Cyberabad Cyber Crime पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें पीड़ित से रकम ट्रांसफर कराई गई थी। साथ ही WhatsApp ग्रुप, कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और आरोपियों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा कि फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े मामलों में अपराधी अक्सर पहले पीड़ित को डिजिटल इंटरफेस पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाते हैं और छोटी निकासी की अनुमति देकर भरोसा कायम करते हैं। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराने के बाद निकासी रोक दी जाती है और विभिन्न बहानों से पैसा फंसाए रखा जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसकी वैधता, नियामकीय पंजीकरण और बैंक खाते की जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

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