फर्जी अभिलेखों से योजना में कराया गया पंजीकरण; 1,700 IP एड्रेस संदिग्ध मिले, तीन से छह किस्तों में खातों में पहुंची सरकारी रकम

पीएम किसान सम्मान निधि में ₹315 करोड़ का फर्जीवाड़ा, 4.45 लाख आवेदकों पर FIR

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By Roopa
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प्रतापगढ़। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में करीब 4.45 लाख आवेदनों और लाभार्थी रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों और गलत तरीके से कराए गए पंजीकरण के जरिए सरकारी योजना का लाभ लिया गया और करीब ₹315 करोड़ की राशि खातों में पहुंचाई गई। मामले में 1,700 से अधिक IP एड्रेस भी संदिग्ध या फर्जी पाए गए हैं।

मामला वर्ष 2019-20 के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में कराए गए पंजीकरण से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने योजना की प्रक्रिया में गलत तरीके से सीधी एंट्री कर फर्जी अभिलेखों के आधार पर अपना पंजीकरण कराया। इसके बाद पात्रता नहीं होने के बावजूद योजना की किस्तें उनके बैंक खातों में पहुंचती रहीं।

जांच में सामने आया बड़े नेटवर्क का दावा

मामले की जांच कृषि निदेशालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग और पुलिस विभाग की ओर से अलग-अलग स्तर पर की गई। जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन और रिकॉर्ड सामने आए, जिनमें लाभार्थियों की जानकारी संदिग्ध पाई गई। जांच एजेंसियों ने करीब 4.45 लाख लोगों के डेटा की पड़ताल में अनियमितताएं मिलने का दावा किया है।

जांच में यह भी सामने आया कि इन पंजीकरणों के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर योजना में ऐसे लोगों को शामिल कराया गया, जो इसके लिए पात्र नहीं थे। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका और आपसी संबंधों की जांच कर रही है।

लाखों खातों में पहुंची करोड़ों की रकम

जांच के अनुसार, फर्जी तरीके से पंजीकरण कराने वाले लोगों में से बड़ी संख्या में लाभार्थियों को योजना की किस्तें भी जारी हो गईं। कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड के मुताबिक, करीब 3.75 लाख लोगों के बैंक खातों में तीन किस्तों के जरिए ₹225 करोड़ पहुंचाए गए।

इसके अलावा लगभग 75 हजार लोगों को छह किस्तों के रूप में करीब ₹90 करोड़ का भुगतान किया गया। इस तरह सरकारी खजाने से कुल करीब ₹315 करोड़ की राशि ऐसे लाभार्थियों तक पहुंचने की बात सामने आई है, जिनके पंजीकरण को जांच में फर्जी या नियमों के विपरीत पाया गया।

पुलिस अब इन खातों और लेन-देन की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी रकम किसके नियंत्रण वाले खातों में पहुंची और बाद में उसका इस्तेमाल या निकासी किस तरह की गई।

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1,700 IP एड्रेस भी जांच के घेरे में

जांच के दौरान करीब 1,700 IP एड्रेस भी संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस अब इन IP एड्रेस से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और पंजीकरण गतिविधियों की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि बड़ी संख्या में आवेदन किन स्थानों या उपकरणों से किए गए थे और क्या एक ही व्यक्ति या समूह ने कई आवेदनों को ऑनलाइन दर्ज कराया था।

डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस कथित सिंडिकेट के तकनीकी संचालन से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है।

प्रतापगढ़ के साथ कई जिलों तक फैला मामला

फर्जीवाड़े में प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील के लोगों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। इसके अलावा प्रयागराज, कौशांबी, अमेठी और सुल्तानपुर के लोगों के नाम भी जांच में सामने आए हैं। इससे आशंका है कि यह मामला केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि कई जिलों में लाभार्थी पंजीकरण कराने का नेटवर्क सक्रिय था।

BNS और IT Act की धाराओं में केस

उप कृषि निदेशक की तहरीर पर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की छह धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की दो धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल लोगों की पहचान के लिए दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।

जांच का अगला चरण सरकारी रकम की रिकवरी पर केंद्रित रहेगा। पुलिस फर्जी तरीके से हासिल की गई करीब ₹315 करोड़ की राशि की वसूली के लिए संबंधित बैंक खातों और लाभार्थियों की वित्तीय गतिविधियों की भी पड़ताल करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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