टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर और निजी कंपनियों से मिलीभगत की जांच; उदित राय और नागेंद्र यादव के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट, पंकज वर्मा को 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत

₹1,943 करोड़ के STP प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार की जांच तेज, पूर्व DJB CEO समेत दो को कोर्ट में बुलाया

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By Roopa
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नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े करीब ₹1,943 करोड़ के टेंडर मामले में जांच तेज हो गई है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) उदित प्रकाश राय और नागेंद्र यादव के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी करते हुए दोनों को 29 अगस्त को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) कर रही है। कथित घोटाले में पूर्व दिल्ली मंत्री सत्येंद्र जैन का नाम भी सामने आया है।

ड्यूटी जज नेहा पालीवाल शर्मा ने ACB की ओर से दायर आवेदन पर प्रोडक्शन वारंट जारी किए। एजेंसी का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के अलावा निजी कंपनियों, तकनीकी सेवा प्रदाताओं और बिचौलियों के बीच संबंध तथा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

10 STP को चार पैकेज में बांटा गया था

मामला दिल्ली में 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के विस्तार और उन्नयन के लिए जारी किए गए टेंडरों से जुड़ा है। दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की 10 मई 2024 की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के मुताबिक, 10 STP को चार पैकेज में बांटा गया था और इनकी कुल टेंडर कीमत करीब ₹1,943 करोड़ थी।

ACB का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने निजी ठेकेदारों, तकनीकी कंपनियों और बिचौलियों के साथ कथित मिलीभगत कर टेंडर की शर्तों को प्रभावित किया। एजेंसी के अनुसार, लागत अनुमान बढ़ाने और पर्यावरणीय मानकों को कमजोर करने जैसे कथित कदमों के जरिए चुनिंदा कंपनियों को ठेके दिलाने की कोशिश की गई। इससे सरकारी खजाने को नुकसान और निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचने का आरोप है।

पंकज वर्मा को 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत

मामले में सृजनहार एंटरप्राइजेज के मालिक पंकज वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था। दो दिन की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

ACB ने अदालत में कहा कि वर्मा से पूछताछ के जरिए सृजनहार एंटरप्राइजेज को कथित तौर पर मामले में शामिल करने के उद्देश्य और उसकी कारोबारी गतिविधियों को समझना जरूरी है। जांच एजेंसी ने सृजनहार और यूरोटेक के बीच मार्केट किए गए उत्पादों से संबंधित समझौते तथा सृजनहार से धनवाइन इंजीनियरिंग को दिए गए कथित ऋण की भी जांच की मांग की।

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₹1.22 करोड़ के ट्रांसफर की भी पड़ताल

जांच में करीब ₹1.22 करोड़ के एक वित्तीय लेनदेन को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ACB के अनुसार, यूरोटेक से सृजनहार के माध्यम से धनवाइन इंजीनियरिंग को यह रकम प्राप्त हुई थी। इसके अलावा धनवाइन इंजीनियरिंग से विनोद चौहान को ₹81 लाख और नागेंद्र यादव से जुड़ी फर्म को ₹43 लाख ट्रांसफर किए जाने की भी जांच हो रही है।

ACB का कहना है कि इन लेनदेन के वास्तविक उद्देश्य और इस्तेमाल का पता लगाना जरूरी है। एजेंसी यह भी जांचना चाहती है कि सरकारी खजाने को वास्तविक नुकसान कितना हुआ और कथित साजिश में किन अधिकारियों तथा निजी पक्षों की भूमिका रही।

बचाव पक्ष ने दी अलग तस्वीर

पंकज वर्मा की ओर से पेश बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत का विरोध किया। दलील दी गई कि मूल एफआईआर में न तो वर्मा का व्यक्तिगत रूप से नाम था और न ही उनकी कंपनी का। बचाव पक्ष के अनुसार, सृजनहार एंटरप्राइजेज का यूरोटेक के साथ वैध समझौता था और वर्मा ने STP स्थलों पर तकनीकी पर्यवेक्षण का काम किया था।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कंपनी के वेतन, श्रम भुगतान और अन्य कारोबारी खर्च कथित गबन की रकम से अधिक थे। ₹1.22 करोड़ के ट्रांसफर को भी वैध, ब्याज-मुक्त और बिना सुरक्षा वाला निदेशक ऋण बताया गया, जिसे धनवाइन इंजीनियरिंग के वित्तीय विवरणों में दर्ज किया गया था।

जांच का दायरा बढ़ने की संभावना

ACB अब टेंडर प्रक्रिया, कंपनियों के बीच कारोबारी समझौतों, अधिकारियों के संपर्क और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एजेंसी का कहना है कि हिरासत में पूछताछ से कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका, सरकारी नुकसान की वास्तविक राशि और ठेकों से जुड़े वित्तीय प्रवाह की जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।

उदित राय और नागेंद्र यादव की 29 अगस्त को होने वाली पेशी जांच के लिहाज से अहम मानी जा रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और आरोपियों की अंतिम जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

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