फर्जी बिलों के जरिए ₹7.70 करोड़ के भुगतान का दावा; जल परियोजनाओं के शिलान्यास समारोहों पर ₹3.28 करोड़ खर्च को भी नियमों का उल्लंघन बताया, 91.69% जल गुणवत्ता बजट पड़ा रहा अप्रयुक्त

जल जीवन मिशन में ₹122 करोड़ के भुगतान पर CAG की आपत्ति, बिना अनिवार्य सत्यापन ठेकेदारों को दी रकम

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By Roopa
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जयपुर। जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने सवाल उठाए हैं। CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 तक 26 क्षेत्रीय जलापूर्ति परियोजनाओं के ठेकेदारों को करीब ₹122.31 करोड़ का भुगतान अनिवार्य थर्ड-पार्टी निरीक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी किए बिना कर दिया गया। ऑडिट में इसके अलावा ₹7.70 करोड़ के फर्जी और कूटरचित बिलों के आधार पर किए गए कथित अनियमित भुगतान का भी खुलासा हुआ है।

CAG ने परियोजनाओं की खरीद, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था और योजना के तहत किए गए अन्य खर्चों की भी समीक्षा की। रिपोर्ट में कई मामलों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं होने, टेंडर में देरी और योजना के लिए उपलब्ध राशि का पर्याप्त उपयोग नहीं किए जाने पर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

फर्जी बिलों के आधार पर ₹7.70 करोड़ का भुगतान

ऑडिट में पाया गया कि कुछ चयनित कार्यों के लिए कथित तौर पर झूठे और कूटरचित बिल तैयार किए गए। इन बिलों के आधार पर करीब ₹7.70 करोड़ का भुगतान किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ भुगतान ऐसे बिलों के आधार पर किए गए जो दूसरे ठेकेदारों से संबंधित थे।

CAG ने इन भुगतानों को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है। ऑडिट के दौरान संबंधित रिकॉर्ड की जांच में यह सवाल उठा कि दूसरे ठेकेदारों के बिलों का इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया गया और भुगतान से पहले दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया।

टेंडर से पहले ही खरीद लिए गए पाइप

करौली में जल जीवन मिशन की एक परियोजना में पाइप की खरीद को लेकर भी CAG ने आपत्ति दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस टेंडर के जरिए इन सामग्रियों की खरीद की जानी थी, उसके खुलने से पहले ही पाइप खरीद लिए गए थे।

बाद में इन पाइपों को आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी होने से पहले ही सोजत सिटी भेज दिया गया। CAG ने इस घटनाक्रम को टेंडर और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने वाला बताया है। ऑडिट में यह भी जांच का विषय बनाया गया कि खरीद और सामग्री के स्थानांतरण में निर्धारित नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।

शिलान्यास समारोहों पर ₹3.28 करोड़ खर्च

जल जीवन मिशन के तहत परियोजनाओं के शिलान्यास समारोहों पर हुए खर्च को लेकर भी CAG ने गंभीर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2024 में रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान सामने आया कि वर्ष 2022-23 में विभिन्न जलापूर्ति परियोजनाओं के शिलान्यास समारोहों पर ₹3.28 करोड़ खर्च किए गए।

CAG के अनुसार, JJM के दिशा-निर्देशों में परियोजना राशि का इस्तेमाल सहायक गतिविधियों और प्रचार-प्रसार के लिए करने की अनुमति नहीं है। ऐसे में समारोहों पर किया गया खर्च नियमों के अनुरूप नहीं था।

राज्य सरकार ने नवंबर 2025 में अपने जवाब में कहा था कि इन समारोहों पर खर्च को वित्त विभाग की मंजूरी प्राप्त थी। हालांकि, CAG ने इस जवाब को स्वीकार नहीं किया और कहा कि किसी अन्य स्तर की स्वीकृति के बावजूद JJM के निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। इस मामले में ऑडिट आपत्ति कायम रखी गई।

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जल गुणवत्ता निगरानी का 91.69% बजट खर्च नहीं हुआ

CAG ने जल गुणवत्ता निगरानी और सर्वेक्षण गतिविधियों में भी धन के कम इस्तेमाल पर सवाल उठाया। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 20 जनवरी 2025 तक इन गतिविधियों के लिए ₹486.23 करोड़ का बजट उपलब्ध था। इसमें से केवल ₹40.39 करोड़ खर्च किए गए।

इस तरह कुल आवंटित राशि का सिर्फ 8.31% इस्तेमाल हुआ, जबकि ₹445.84 करोड़ यानी 91.69% राशि खर्च नहीं की जा सकी। CAG ने योजना के उद्देश्य और उपलब्ध धन के उपयोग के बीच इस बड़े अंतर को गंभीरता से दर्ज किया है।

टेंडर में देरी से 1.52 लाख ग्रामीण परिवार प्रभावित

CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की कथित लापरवाही के कारण कुछ टेंडर रद्द हुए और सितंबर 2024 तक संबंधित परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका। इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार, बारां, झालावाड़ और कोटा जिलों के 14 गांवों में रहने वाले 1,52,437 ग्रामीण परिवार तीन साल से अधिक समय तक जल जीवन मिशन के पानी से वंचित रहे।

बार-बार बढ़ती रही परियोजनाओं की समयसीमा

बारां में क्षेत्रीय जलापूर्ति परियोजना पर काम कर रहे ठेकेदारों द्वारा निर्धारित समयसीमा को बार-बार बढ़ाए जाने का मामला भी CAG ने दर्ज किया है। ऑडिट के मुताबिक, परियोजना को समय पर पूरा कराने और टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में विभाग की सक्रियता पर्याप्त नहीं रही।

CAG की रिपोर्ट में टेंडर अंतिम रूप देने की प्रक्रिया, परियोजनाओं की निगरानी और समय पर काम पूरा कराने की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि योजना में सिर्फ वित्तीय अनियमितताएं ही नहीं, बल्कि योजना क्रियान्वयन और निगरानी से जुड़ी कमियां भी सामने आई हैं। अब इन आपत्तियों पर संबंधित विभाग की कार्रवाई और जवाब महत्वपूर्ण होगा।

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