सीतापुर। पैन कार्ड बनवाने के नाम पर ग्रामीणों से आधार कार्ड और बायोमेट्रिक जानकारी हासिल करने के कथित मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। मिश्रिख कोतवाली क्षेत्र के खुर्शीदाबाद गांव में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 65 से 70 ग्रामीणों के आधार और बायोमेट्रिक विवरण जुटाए जाने की बात सामने आई है। अब जांच इस दिशा में की जा रही है कि इस डेटा का इस्तेमाल उनकी सहमति के बिना कितने सिम कार्ड, बैंक खाते या अन्य सेवाएं शुरू कराने में किया गया।
मामला 26 अगस्त को तब सामने आया, जब कुछ संदिग्ध लोग खुर्शीदाबाद गांव में ग्रामीणों से पैन कार्ड बनवाने के नाम पर आधार कार्ड लेने लगे। आरोप है कि उनसे बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा भी लगवाया जा रहा था। गतिविधियों पर संदेह होने के बाद ग्रामीणों ने संदिग्धों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद थाना पुलिस और साइबर टीम ने पूछताछ शुरू की।
एक सिम ने खोला फर्जीवाड़े का राज
जांच के दौरान पुलिस को एक अहम जानकारी मिली। एक ग्रामीण जब नया सिम कार्ड लेने पहुंचा तो उसे पता चला कि उसके आधार नंबर से पहले ही एयरटेल का सिम जारी किया जा चुका था। इसके बाद ग्रामीणों को संदेह हुआ कि पैन कार्ड बनाने के नाम पर ली जा रही आधार और बायोमेट्रिक जानकारी का कहीं और इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि हरदोई जिले के पांच लोग गांव पहुंचे थे और ग्रामीणों के आधार दस्तावेज तथा बायोमेट्रिक जानकारी जुटा रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि डेटा एकत्र करने के पीछे किसकी भूमिका थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया गया।
तीन आरोपी गिरफ्तार, दो की भूमिका की जांच
पुलिस ने करन कुमार निवासी पटेल नगर, माधोगंज, अभिषेक निवासी फजलपुर, माधोगंज और हरिश्चन्द्र निवासी जुटैला, बघौली को गिरफ्तार किया है। वहीं पिन्टू उर्फ मुनेन्द्र और विकास की भूमिका की जांच की जा रही है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर जुटाए गए बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल केवल मोबाइल सिम जारी कराने के लिए किया गया या इसके जरिए बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं में भी फर्जीवाड़ा किया गया। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन और संपर्कों की भी जांच कर रही है।
फिंगरप्रिंट मशीन, मोबाइल और दस्तावेज बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पुराना रजिस्टर, पैन कार्ड बनवाने की रसीदें, चार मोबाइल फोन, बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन, तीन आधार कार्ड और दो स्टाम्प बरामद किए हैं। इन सामानों को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सामग्री की तकनीकी जांच कर पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ग्रामीणों की पहचान संबंधी जानकारी किस तरह दर्ज या साझा की गई। रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों से भी संभावित पीड़ितों तथा कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
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कितने सिम और बैंक खाते खुले, जांच जारी
पुलिस की जांच का सबसे अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि ग्रामीणों के आधार और बायोमेट्रिक विवरण का इस्तेमाल कितनी बार किया गया। पुलिस यह भी जांच रही है कि इन दस्तावेजों के आधार पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हुए और कितने बैंक खाते या अन्य वित्तीय सेवाएं शुरू की गईं।
साइबर सेल बैंकिंग और टेलीकॉम रिकॉर्ड की मदद से डेटा के संभावित दुरुपयोग की कड़ियां जोड़ रही है। यदि किसी ग्रामीण के नाम पर बिना जानकारी के सिम या खाता खोला गया है, तो पुलिस उसके जरिए हुए लेनदेन और गतिविधियों की भी जांच करेगी।
विशेषज्ञ बोले- बायोमेट्रिक डेटा देना गंभीर जोखिम
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, आधार और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग पहचान संबंधी धोखाधड़ी से लेकर वित्तीय अपराध तक में किया जा सकता है। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, अपराधी कई बार पैन कार्ड, सरकारी योजना या दूसरी वैध सेवा का नाम लेकर लोगों से संवेदनशील पहचान संबंधी जानकारी हासिल करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति या संस्था को आधार की प्रति, OTP या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण देने से पहले उसकी पहचान और सेवा की वैधता की पुष्टि करनी चाहिए। विशेष रूप से ऐसे मामलों में सावधानी जरूरी है, जहां दस्तावेज लेने के साथ मशीन पर अंगूठा भी लगवाया जा रहा हो।
नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत केस दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 65 से 70 ग्रामीणों से जुटाए गए आधार और बायोमेट्रिक डेटा का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ। सिम कार्ड, बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों की जांच पूरी होने के बाद मामले के नेटवर्क और संभावित वित्तीय नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
