मुंबई और वडोदरा में सात ठिकानों और तीन बैंक लॉकरों पर छापे; दो खातों में रखे करीब ₹27 लाख फ्रीज, फर्जी दस्तावेजों से लोन की रकम डायवर्ट करने और शेल कंपनियों के जरिए राउंड-ट्रिपिंग का आरोप

₹160.55 करोड़ के Bilpower बैंक लोन फ्रॉड में ED का बड़ा एक्शन, ₹12.20 करोड़ के जेवर और ₹43.90 लाख नकद जब्त

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By Roopa
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मुंबई। ₹160.55 करोड़ के कथित बैंक लोन फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई और वडोदरा में तलाशी के दौरान करीब ₹12.20 करोड़ मूल्य के आभूषण और ₹43.90 लाख नकद जब्त किए हैं। एजेंसी ने सात आवासीय और कारोबारी परिसरों के अलावा तीन बैंक लॉकरों की भी तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान दो बैंक खातों में जमा करीब ₹27 लाख की रकम फ्रीज की गई, जबकि तीन बैंक लॉकर सील कर दिए गए।

ED के मुताबिक, यह कार्रवाई 25 अगस्त को मुंबई जोनल कार्यालय की टीम ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत की। जांच की शुरुआत State Bank of India (SBI) की शिकायत के आधार पर CBI की Economic Offences Wing, Delhi द्वारा दर्ज FIR से हुई थी। CBI ने 30 सितंबर 2024 को Bilpower Limited, उसके निदेशकों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

SBI से लिए कर्ज की रकम डायवर्ट करने का आरोप

ED की जांच के अनुसार, Bilpower Limited ने SBI से विभिन्न प्रकार की ऋण सुविधाएं हासिल की थीं। इनमें cash credit, working capital term loan, funded interest term loan, corporate loan और non-fund-based facilities शामिल थीं। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने बैंक से प्राप्त ऋण राशि को कथित तौर पर दूसरे स्थानों पर डायवर्ट किया और अपने खातों की पुस्तकों में हेरफेर की।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित लेनदेन के चलते SBI को करीब ₹160.55 करोड़ का नुकसान हुआ। Bilpower Limited transformer laminations और cores के निर्माण के कारोबार से जुड़ी कंपनी थी।

2005 से SBI के साथ बैंकिंग संबंध

ED के मुताबिक, Bilpower Limited का SBI के साथ बैंकिंग संबंध वर्ष 2005 से था। कंपनी को समय-समय पर अलग-अलग वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। जांच के दौरान एजेंसी ने कथित तौर पर ऐसे लेनदेन का पता लगाया जिनमें कुछ शेल या फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल बैंक की रकम को डायवर्ट करने के लिए किए जाने का आरोप है।

एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक से हासिल रकम किन कंपनियों और खातों में भेजी गई तथा वहां से उसका अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ। जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को संबंधित कंपनियों, व्यक्तियों और संपत्तियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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फर्जी दस्तावेजों से Letter of Credit का इस्तेमाल

ED का आरोप है कि कथित शेल कंपनियों के पक्ष में Letters of Credit जारी किए गए। इन लेनदेन में फर्जी दस्तावेज पेश किए गए और उन्हें कथित तौर पर वास्तविक दस्तावेजों के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद बैंक से निकलने वाली रकम को आगे उन संस्थाओं तक पहुंचाया गया जिन्हें चौधरी परिवार के सदस्यों या उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित किए जाने का आरोप है।

जांच एजेंसी इसे बैंक की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने और कथित तौर पर राउंड-ट्रिपिंग के लिए इस्तेमाल किए गए वित्तीय नेटवर्क के रूप में देख रही है।

सात ठिकानों पर तलाशी, अहम दस्तावेज बरामद

तलाशी के दौरान ED को अचल संपत्तियों, जमीन और मशीनरी से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। इसके अलावा खाताबही, लेजर, अन्य वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। एजेंसी इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर कथित वित्तीय लेनदेन का पूरा नेटवर्क समझने की कोशिश कर रही है।

जांच के दौरान बरामद ₹12.20 करोड़ के आभूषण और ₹43.90 लाख नकद भी एजेंसी की कार्रवाई का अहम हिस्सा हैं। ED यह जांच करेगी कि इन संपत्तियों और नकदी का स्रोत क्या था और क्या इनका संबंध कथित बैंक लोन फ्रॉड से हासिल रकम से है।

जांच अभी जारी

मामले में Bilpower Limited के प्रबंधन से जुड़े राजेंद्र कुमार चौधरी, सुरेश कुमार चौधरी और नरेश कुमार चौधरी के नाम जांच में सामने आए हैं। ED अब कंपनी, उसके निदेशकों, सहयोगी संस्थाओं और कथित शेल कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

फिलहाल जांच एजेंसी का मुख्य फोकस ₹160.55 करोड़ के कथित बैंक नुकसान से जुड़े धन के वास्तविक प्रवाह, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, शेल कंपनियों की भूमिका और संपत्तियों में रकम के निवेश पर है। ED ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर की जाएगी।

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