ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 38 वर्षीय एक महिला ने कथित तौर पर उस समय आत्महत्या कर ली, जब उसे पता चला कि उसका बैंक खाता देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज कई साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, महिला को राजस्थान पुलिस की ओर से पूछताछ के लिए नोटिस मिलने के बाद मामले की जानकारी हुई थी। इसके बाद उसे आशंका हुई कि अलग-अलग राज्यों में पुलिस पूछताछ के लिए उसे बार-बार जाना पड़ सकता है।
मृतका की पहचान डोंबिवली ईस्ट स्थित साईराम सोसायटी निवासी देविका अरमुगम पंडारम के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, राजस्थान के चूरू साइबर सेल थाने से अधिकारी 8 अगस्त को उसके घर पहुंचे थे। उन्होंने उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज एक ऑनलाइन फ्रॉड मामले में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस दिया था।
पुलिस के मुताबिक, मामले में आरोप था कि देविका के बैंक ऑफ महाराष्ट्र खाते का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी से जुड़ी रकम के लेनदेन के लिए किया गया। नोटिस मिलने के बाद महिला मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए ठाणे पुलिस आयुक्तालय के साइबर क्राइम विभाग पहुंची।
वहां अधिकारियों ने कथित तौर पर उसे बताया कि उसका बैंक खाता कई राज्यों में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों में सामने आया है। इन मामलों के तार हरियाणा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात और तमिलनाडु से जुड़े बताए गए। यह जानकारी मिलने के बाद महिला कथित तौर पर बेहद तनाव में आ गई।
परिजनों के अनुसार, महिला इस बात को लेकर परेशान थी कि उसे अलग-अलग राज्यों में जाकर पुलिस के सामने पूछताछ के लिए उपस्थित होना पड़ सकता है। पुलिस ने बताया कि मंगलवार शाम करीब चार बजे उसने अपने घर पर खुद को गंभीर रूप से घायल कर लिया।
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परिजन उसे तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां से उसे इलाज के लिए महानगरपालिका द्वारा संचालित शास्त्री नगर अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मामले में आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला का बैंक खाता साइबर फ्रॉड के मामलों में किस तरह इस्तेमाल हुआ और क्या खाते का इस्तेमाल उसकी जानकारी या सहमति के बिना किया गया था।
यह मामला साइबर अपराध की जांच के दौरान सामने आने वाली एक गंभीर चुनौती की ओर भी ध्यान खींचता है। कई मामलों में साइबर अपराधी दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने या निकालने के लिए कर सकते हैं। ऐसे खातों का विवरण बाद में पीड़ितों की शिकायतों और पुलिस जांच में सामने आ सकता है। इससे वास्तविक खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकते हैं, भले ही उसकी भूमिका अभी स्पष्ट न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को पता चलता है कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड में हुआ है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत बैंक को इसकी जानकारी देनी चाहिए और सभी बैंकिंग रिकॉर्ड, लेनदेन का विवरण, संदेश तथा संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। इसके साथ ही संबंधित साइबर क्राइम थाने या जांच एजेंसी के सामने अपना पक्ष और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
पुलिस की जांच अभी जारी है। महिला के बैंक खाते का कथित तौर पर विभिन्न साइबर फ्रॉड मामलों में किस प्रकार इस्तेमाल हुआ और इसके पीछे कौन लोग थे, इसका वास्तविक पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
