गोवा की महिला से ₹2.60 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी से शुरू हुई जांच का दायरा 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक फैला; 400 बैंक खातों, शेल कंपनियों और ₹27,850 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन की पड़ताल

₹30,000 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर ED का शिकंजा, तीन और गिरफ्तारियां; 300 शिकायतों और 163 FIR से जुड़े तार

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By Roopa
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पणजी। देशभर में फैले कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला करीब ₹30,000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन वाले एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ा है, जिसके तार कई राज्यों में सक्रिय कंपनियों, बैंक खातों, नकद जमा और विदेशी मुद्रा लेनदेन तक फैले मिले हैं।

ED के सूत्रों के अनुसार, भुषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू को गुरुवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया। पणजी की विशेष अदालत ने तीनों को 1 सितंबर तक ED की हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले 23 अगस्त को एजेंसी ने मुंबई के फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल एजेंसी की हिरासत में हैं।

जांच की शुरुआत गोवा पुलिस की ओर से 9 जून 2025 को दर्ज FIR के बाद हुई। मामला गोवा की एक महिला से जुड़ा है, जिसे साइबर ठगों ने कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराया और 21 मई से 2 जून 2025 के बीच अलग-अलग ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स’ में ₹2.60 करोड़ ट्रांसफर कराने का आरोप है।

डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें जालसाज खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर पीड़ित को ऑडियो या वीडियो कॉल पर निगरानी में होने का झांसा देते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर रकम ट्रांसफर कराई जाती है। सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसे मामलों की तत्काल शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर की जा सकती है।

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ED के मुताबिक, महिला से ठगी गई रकम को करीब 400 बैंक खातों में जमा कराया गया। इसके बाद कथित तौर पर रकम को नकद निकाला गया और RBI से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स के जरिए विदेशी मुद्रा में बदला गया। जांच में सामने आए बैंकिंग रिकॉर्ड ने एजेंसी को कमोडिटी ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेक्स कारोबार से जुड़ी कई संस्थाओं तक पहुंचाया।

इन संस्थाओं के बीच आपस में जुड़े लेनदेन का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। ED के अनुसार, इन कंपनियों ने ₹27,850 करोड़ से अधिक के बैंकिंग लेनदेन किए। इनके खातों में ₹2,904 करोड़ की नकद जमा भी दर्ज हुई। इनमें से ₹584.70 करोड़ की रकम देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित 61,448 बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीन लेनदेन के जरिए जमा की गई।

जांच एजेंसी ने इन बैंक खातों को देशभर में दर्ज करीब 300 साइबर फ्रॉड शिकायतों और 163 FIR से जुड़ा पाया है। ये मामले 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज हैं और इनमें कुल ₹417.49 करोड़ के नुकसान की शिकायत की गई है। इससे संकेत मिलता है कि गोवा की महिला से जुड़ा मामला किसी एक घटना तक सीमित नहीं था, बल्कि कथित तौर पर व्यापक वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा था।

ED ने जुलाई में गोवा और मुंबई में दो चरणों में तलाशी अभियान चलाया था। इसके बाद 21 अगस्त को भी तलाशी ली गई। इन कार्रवाइयों के दौरान करीब ₹3.25 करोड़ नकद जब्त किए गए। एजेंसी अब बैंकिंग लेनदेन, कंपनियों के निदेशकों, नकद जमा और विदेशी मुद्रा में हुए रूपांतरण के बीच संबंधों की जांच कर रही है।

जांच में कथित शेल या डमी कंपनियों के संचालन का एक खास तरीका भी सामने आया है। ED के अनुसार, कुछ कंपनियों में एक कमरे के आवास में रहने वाले ड्राइवरों और कर्मचारियों को निदेशक बनाया गया था। एजेंसी को आशंका है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल वास्तविक लाभार्थियों को छिपाने और साइबर ठगी की रकम को कई स्तरों पर घुमाने के लिए किया गया।

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