कोच्चि। अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी को केरल लाने के वादे से जुड़े वित्तीय लेनदेन अब प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में आ गए हैं। ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विदेश भेजी गई रकम के स्रोत, हस्तांतरण के तरीके और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, करीब ₹126 करोड़ की रकम विदेश भेजे जाने का अनुमान है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम किस उद्देश्य से और किन माध्यमों के जरिए विदेश भेजी गई।
ईडी की जांच फिलहाल प्रारंभिक चरण में है। एजेंसी ने विदेश धन भेजे जाने से संबंधित बैंकिंग और वित्तीय दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही मेसी को केरल लाने के लिए कथित तौर पर किए गए प्रायोजन समझौते और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं का मुख्य सवाल यह है कि विदेश भेजी गई रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या उसके हस्तांतरण के दौरान विदेशी मुद्रा संबंधी सभी आवश्यक नियमों का पालन किया गया।
जांच के शुरुआती दौर में ईडी ने संबंधित सरकारी विभागों से दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया है। एजेंसी ने पिछले दिनों वस्तु एवं सेवा कर विभाग से भी मामले से जुड़ी जानकारी हासिल की थी। जीएसटी से मिली सूचनाओं और ईडी के पास उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है, ताकि लेनदेन की पूरी कड़ी को समझा जा सके।
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एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि विदेश में भुगतान के लिए किस बैंकिंग माध्यम का इस्तेमाल किया गया। रकम किन खातों से भेजी गई, भुगतान किस संस्था या व्यक्ति को किया गया और इसके बदले भारत में कौन-सी सेवाएं या अधिकार हासिल होने थे, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि विदेश भेजी गई रकम का हिसाब संबंधित वित्तीय और कर दस्तावेजों में सही तरीके से दर्ज किया गया था या नहीं।
मेसी को केरल लाने की योजना को लेकर राज्य में पहले से ही काफी उत्सुकता थी। अर्जेंटीना के विश्व कप विजेता कप्तान को केरल में लाने की संभावित योजना ने फुटबॉल प्रशंसकों के बीच विशेष 관심 पैदा किया था। इसी योजना से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन में अब जांच एजेंसी की दिलचस्पी बढ़ गई है। हालांकि, मौजूदा जांच में यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि विदेश भेजी गई पूरी रकम वास्तव में मेसी को केरल लाने की योजना से संबंधित थी या उसके भीतर अन्य वित्तीय लेनदेन भी शामिल थे।
ईडी कथित प्रायोजन समझौते की वास्तविकता और उसकी शर्तों की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि समझौता किन पक्षों के बीच हुआ, इसमें कितनी रकम तय की गई थी और भुगतान की शर्तें क्या थीं। इसके अलावा, यह भी जांच का हिस्सा है कि समझौते के तहत विदेश में भुगतान करने के लिए आवश्यक अनुमति और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत जांच में रकम के स्रोत और अंतिम लाभार्थी की पहचान महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से ईडी बैंक खातों, भुगतान निर्देशों, समझौतों, कर संबंधी रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल ईडी ने मामले में प्रारंभिक जांच के स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। विदेश भेजी गई ₹126 करोड़ की अनुमानित रकम, उसके स्रोत और इस्तेमाल को लेकर जांच आगे बढ़ने के साथ तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है। एजेंसी की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि लेनदेन में विदेशी मुद्रा कानून का उल्लंघन हुआ था या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
