बस्ती। आसान और बिना झंझट कर्ज दिलाने का लालच देकर लोगों को साइबर जाल में फंसाने और फिर उनकी तस्वीरों को अश्लील रूप देकर ब्लैकमेल करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बस्ती पुलिस और जिला साइबर प्रकोष्ठ ने पर्दाफाश किया है। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, सात नए फर्जी सिम कार्ड और तीन मोटरसाइकिल बरामद की हैं।
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की जा रही थी। इसी दौरान प्रतिबिंब पोर्टल से मिले सुराग और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर पुलिस को गिरोह की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद कोतवाली पुलिस और जिला साइबर प्रकोष्ठ की संयुक्त टीम ने गुरुवार को अमहट स्थित धोबी घाट पर घेराबंदी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बस्ती निवासी प्रद्युम्न चौरसिया, निखिल सिंह, गौरव सिंह और अफरोज के रूप में हुई है। प्रद्युम्न की उम्र 25 वर्ष, निखिल की 19 वर्ष, गौरव की 18 वर्ष और अफरोज की 19 वर्ष बताई गई है। पुलिस ने लकी सिंह, अश्वनी सिंह और पीयूष सिंह को वांछित आरोपी बनाया है। पुलिस इनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले माध्यमों के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। उन्हें कम समय में आसान और बिना किसी परेशानी के कर्ज दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद आरोपियों की ओर से भेजे गए लिंक खोलने या बताए गए निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाता था। पुलिस का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल फोन की गैलरी और संपर्क सूची तक पहुंच मिल जाती थी।
मोबाइल में मौजूद तस्वीरें हाथ लगने के बाद गिरोह का अगला चरण शुरू होता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी तस्वीरों में डिजिटल बदलाव कर उन्हें आपत्तिजनक और अश्लील रूप देते थे। इसके बाद पीड़ितों को धमकी दी जाती थी कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए तो इन तस्वीरों को उनके दोस्तों, रिश्तेदारों और मोबाइल संपर्क सूची में मौजूद लोगों के बीच प्रसारित कर दिया जाएगा। बदनामी के डर का फायदा उठाकर आरोपियों पर रकम वसूलने का आरोप है।
Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions
पुलिस की जांच में अब तक राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर दर्ज 12 शिकायतों का संबंध इस गिरोह से सामने आया है। इन शिकायतों में पीड़ित महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, झारखंड, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों से बताए गए हैं। इससे गिरोह के कई राज्यों में सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, अब तक जिन शिकायतों की जांच की गई है, उनमें जबरन वसूली की रकम ₹35,725 सामने आई है। हालांकि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि गिरोह ने अलग-अलग लोगों से मिलकर अब तक करीब ₹12 लाख से ₹15 लाख तक की रकम वसूली हो सकती है। पुलिस बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और मोबाइल उपकरणों में मौजूद साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य वास्तविक वसूली की रकम और गिरोह से जुड़े अन्य पीड़ितों का पता लगाना है।
गिरफ्तार आरोपी प्रद्युम्न चौरसिया पर गिरोह को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने में भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि वह पहले गिरोह के सदस्यों को 30 से 40 सिम कार्ड उपलब्ध करा चुका था। शिकायतों के बाद जब किसी नंबर को बंद कर दिया जाता था तो आरोपी उसकी जगह नया सिम कार्ड इस्तेमाल करते थे, ताकि पुलिस की कार्रवाई से बचा जा सके।
पुलिस के मुताबिक, चारों आरोपी गुरुवार को अमहट के धोबी घाट पर फर्जी सिम कार्ड की एक और खेप हासिल करने के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान पुलिस टीम ने उन्हें पकड़ लिया। मामले में कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और दूरसंचार अधिनियम, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने लोगों से अनजान कर्ज प्रस्तावों के झांसे में नहीं आने और किसी भी संदिग्ध संदेश या लिंक पर प्रतिक्रिया नहीं देने की अपील की है। साइबर ठगी या ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग की स्थिति में पीड़ितों से तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने या राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर मामला दर्ज कराने को कहा गया है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ गिरोह के अन्य सदस्यों और इससे जुड़े मामलों की भी जांच कर रही है।
