पुणे। ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने वाली एक कंपनी को कथित तौर पर फर्जी इनवॉयस और रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए करीब ₹3 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के मामले में पौड पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों में कंपनी का एक कर्मचारी और तलोजा स्थित एक फर्म की दो महिला संचालक शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2023 से फरवरी 2026 के बीच कंपनी में कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाली मेटल शीट की ऐसी खेपों के फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए, जो वास्तव में कंपनी को मिली ही नहीं थीं।
मामले की शिकायत कंपनी के फैक्टरी मैनेजर ने पौड पुलिस में दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक, कंपनी वर्ष 2021 से तलोजा स्थित फर्म से अलग-अलग ग्रेड की मेटल शीट खरीद रही थी। आरोपी कर्मचारी कंपनी के स्टोर विभाग में तैनात था और उसके जिम्मे आने वाले माल का रिकॉर्ड रखना, बिल लेखा विभाग को भेजना तथा आपूर्तिकर्ताओं को किए जाने वाले भुगतान की प्रक्रिया पर नजर रखना शामिल था।
कंपनी को कथित गड़बड़ी का पता दिसंबर 2025 में रिकॉर्ड की जांच के दौरान चला। अधिकारियों ने पाया कि बड़ी मात्रा में मेटल शीट को पिरंगुट स्थित एक कंपनी को भेजे जाने के रूप में दर्ज किया गया था, लेकिन वास्तविक रूप से प्राप्त सामग्री की मात्रा रिकॉर्ड में दिखाई गई मात्रा से कम थी। इसके बाद कंपनी ने अपने स्टॉक और डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच शुरू की। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि कई प्रविष्टियों में बदलाव किया गया था और रिकॉर्ड में दिखाई गई सामग्री के अनुरूप वास्तविक स्टॉक मौजूद नहीं था।
इसके बाद कंपनी ने संबंधित इनवॉयस की जांच की। इस दौरान कई बिल ऐसे मिले जिनके साथ वजन मापने वाले कांटे की रसीदें मेल नहीं खा रही थीं। पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी पाया गया कि कुछ मूल वजन पर्चियों को हटाकर उनकी जगह तलोजा स्थित फर्म की वजन पर्चियां लगाई गई थीं। इससे कागजी रिकॉर्ड में सामग्री की आपूर्ति और वजन को सही दिखाने की कोशिश किए जाने का संदेह हुआ।
कंपनी ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की और खरीद विभाग के एक इंजीनियर, डिजाइन विभाग के एक सहायक प्रबंधक तथा स्टोर विभाग के कर्मचारी से पूछताछ की। तीनों ने रिकॉर्ड में बदलाव की जानकारी होने से इनकार किया। इसके बाद कंपनी ने निष्पक्ष जांच के लिए एक वकील को आंतरिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी। पुलिस के अनुसार, दो कर्मचारियों ने वकील के सामने अपना पक्ष रखा, लेकिन आरोपी कर्मचारी जांच में शामिल नहीं हुआ और कंपनी को बताए बिना कथित तौर पर गायब हो गया।
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आंतरिक जांच के दौरान दोनों कर्मचारियों ने कंपनी को बताया कि आरोपी कर्मचारी ने उनकी यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल किए थे। इसके बाद कंपनी ने पिछले करीब तीन वर्षों में आरोपी कर्मचारी द्वारा तैयार किए गए इनवॉयस और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। इसी जांच में कथित वित्तीय गड़बड़ी की पूरी तस्वीर सामने आने लगी।
पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2023 से फरवरी 2026 के बीच तलोजा स्थित कंपनी को कुल 2,788 टन मेटल शीट की मांग के मुकाबले 1,870 टन सामग्री की आपूर्ति करनी थी। हालांकि, जांच में करीब 546 टन मेटल शीट ऐसी पाई गईं, जिन्हें कंपनी को वास्तव में प्राप्त नहीं हुआ था। इस सामग्री की कीमत करीब ₹3 करोड़ बताई गई है।
आरोप है कि आरोपी कर्मचारी ने अलग-अलग कर्मचारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल कर सिस्टम में फर्जी इनवॉयस तैयार किए। इन इनवॉयस में 546 टन मेटल शीट की आपूर्ति और प्राप्ति दर्ज कर दी गई, जबकि वास्तविक रूप से सामग्री कंपनी तक नहीं पहुंची थी। इन रिकॉर्ड के आधार पर लेखा विभाग ने तलोजा स्थित फर्म को भुगतान कर दिया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने और भुगतान कराने की पूरी प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका थी।
जांच में तलोजा स्थित फर्म की दो महिला संचालकों की कथित भूमिका भी सामने आई है। पुलिस उनके और कंपनी के आरोपी कर्मचारी के बीच संपर्क, इनवॉयस, वजन पर्चियों, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे लेनदेन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित धोखाधड़ी में कुल कितनी रकम का इस्तेमाल हुआ और इससे कितने दस्तावेज प्रभावित हुए।
पौड पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी से संबंधित धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब कंपनी के डिजिटल रिकॉर्ड, यूजर आईडी के इस्तेमाल, इनवॉयस और बैंकिंग लेनदेन की जांच कर रही है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
