वारसॉ। पोलैंड ने सोशल मीडिया कंपनी Meta पर फर्जी और धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए यूरोपीय आयोग से कंपनी पर €250 मिलियन (करीब ₹2,500 करोड़) का जुर्माना लगाने की मांग की है। पोलैंड के डिजिटल मामलों के मंत्री Krzysztof Gawkowski ने कहा कि देश की संबंधित सरकारी एजेंसियों और साइबर सुरक्षा टीमों की ओर से बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद Meta कथित तौर पर संदिग्ध विज्ञापनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।
मंत्री ने यूरोपीय आयोग को भेजे पत्र में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया टीम CERT Polska की जांच का हवाला दिया। इसके मुताबिक, टीम ने Meta के प्लेटफॉर्म पर 122 ऐसे विज्ञापनों की पहचान की, जिन्हें धोखाधड़ी से संबंधित माना गया।
122 विज्ञापनों की जांच, सिर्फ 10 हटाए गए
पोलिश अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आए 122 विज्ञापनों में से 106 मामलों में Meta ने उन्हें हटाने से इनकार कर दिया। यह कुल मामलों का करीब 86.8 प्रतिशत है। अधिकारियों के मुताबिक, केवल 10 विज्ञापन हटाए गए, जबकि छह मामलों में कथित तौर पर कोई जवाब नहीं दिया गया।
पोलैंड सरकार का कहना है कि यह स्थिति ऑनलाइन ठगी के बढ़ते खतरे को देखते हुए गंभीर चिंता का विषय है। फर्जी निवेश योजनाओं, नकली सेवाओं, भ्रामक उत्पादों और अवैध एप्लिकेशन के प्रचार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
Gawkowski ने Meta से फर्जीवाड़े, भ्रामक विज्ञापनों और अवैध एप्लिकेशन के प्रचार को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी तकनीकी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। Meta ने इस मामले में Reuters की टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया।
फर्जी विज्ञापनों को लेकर पहले भी विवाद
Meta के प्लेटफॉर्म पर फर्जी विज्ञापनों को लेकर पोलैंड में पहले भी विवाद सामने आ चुका है। अरबपति Rafal Brzoska ने कथित तौर पर उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल कर बनाए गए फर्जी विज्ञापनों को लेकर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की थी।
अप्रैल 2026 में वारसॉ की अपीलीय अदालत ने इस मामले में Meta की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। कंपनी की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया था कि उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले उपयोगकर्ताओं की धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों के लिए कंपनी को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
पोलैंड की मौजूदा शिकायत इसी व्यापक विवाद को आगे बढ़ाती है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी और उनके प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली धोखाधड़ीपूर्ण सामग्री की निगरानी का सवाल प्रमुख बन गया है।
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साइबर अपराध विशेषज्ञ ने बताया नया खतरा
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, सोशल मीडिया पर दिखने वाला पेशेवर विज्ञापन अब अपने आप में विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। उनके अनुसार, साइबर ठग कंपनियों और वित्तीय संस्थानों जैसी दिखने वाली प्रोफाइल, वेबसाइट और विज्ञापन तैयार कर लोगों को निवेश, नौकरी, खरीदारी या किसी सेवा के नाम पर फंसा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म स्तर पर विज्ञापन की जांच, भुगतान से जुड़े संकेतों की निगरानी और संदिग्ध खातों की तेज पहचान जरूरी है। किसी विज्ञापन में असामान्य रिटर्न, तत्काल भुगतान, निजी जानकारी या किसी अनजान एप्लिकेशन को डाउनलोड करने की मांग हो तो उपयोगकर्ता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
Meta पर बढ़ रहा नियामकीय दबाव
Meta को बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी विभिन्न देशों में बढ़ते नियामकीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में कंपनी ने किशोरों से जुड़े सोशल मीडिया नुकसान के दावों को निपटाने के लिए कई अमेरिकी राज्यों के साथ एक बड़े समझौते पर सहमति जताई है, हालांकि कंपनी ने गलत काम करने से इनकार किया है।
ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर नए नियम और प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। सरकारें विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी, फर्जी विज्ञापन और हानिकारक डिजिटल सामग्री को लेकर प्लेटफॉर्म कंपनियों से अधिक जवाबदेही की मांग कर रही हैं।
पोलैंड की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब यूरोपीय संघ में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और ऑनलाइन उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर निगरानी लगातार बढ़ रही है। अब यूरोपीय आयोग को यह तय करना है कि पोलैंड की शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और Meta के खिलाफ प्रस्तावित €250 मिलियन का जुर्माना लगाया जाता है या नहीं।
