नई दिल्ली। गोवा की एक महिला से कथित तौर पर हुई ₹2.96 करोड़ की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी की जांच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क तक पहुंचाया है। एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े 163 से अधिक मामलों में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 333 पीड़ित सामने आए हैं और इन मामलों में कुल नुकसान ₹417.49 करोड़ से अधिक बताया गया है।
मामले की शुरुआत मई-जून 2025 में हुई उस शिकायत से हुई, जिसमें महिला को कथित तौर पर कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर फोन करने वाले जालसाजों ने एक आपराधिक जांच में फंसने का डर दिखाया। आरोप है कि लगातार 10 दिन से अधिक समय तक उसे दबाव में रखा गया और अलग-अलग किस्तों में ₹2.96 करोड़ ट्रांसफर करा लिए गए।
गोवा की शिकायत से सैकड़ों खातों तक पहुंची जांच
FIR दर्ज होने के बाद ED ने महिला द्वारा ट्रांसफर की गई रकम का वित्तीय ट्रेल खंगाला। जांच में एजेंसी को कथित तौर पर पता चला कि पैसा नए खोले गए और निष्क्रिय पड़े बैंक खातों समेत कई खातों के जरिए तेजी से इधर-उधर भेजा गया।
ED के अनुसार, रकम को सैकड़ों लाभार्थी खातों में घुमाने के बाद नकदी और विदेशी मुद्रा में बदलने का आरोप है। जांच आगे बढ़ने पर कमोडिटी ट्रेडिंग, यात्रा, वित्तीय गतिविधियों और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों का नेटवर्क सामने आया।
एजेंसी का आरोप है कि RBI से संबंधित विदेशी मुद्रा लाइसेंस रखने वाली कुछ कंपनियों का कथित तौर पर संदिग्ध अपराध से प्राप्त रकम को स्थानांतरित और परिवर्तित करने के लिए दुरुपयोग किया गया।
ड्राइवर और कर्मचारियों के नाम पर कंपनियां
जांच में कई कंपनियों के औपचारिक निदेशक ऐसे लोगों को पाए जाने का दावा किया गया है, जिनकी आर्थिक क्षमता सीमित थी। इनमें कर्मचारी, ड्राइवर और एक कमरे के मकान में रहने वाले लोग शामिल बताए गए हैं।
ED का आरोप है कि दस्तावेजों में ये लोग कंपनियों के निदेशक थे, लेकिन कंपनियों, उनके बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों का वास्तविक नियंत्रण अन्य व्यक्तियों के पास था। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन कंपनियों का संचालन वास्तव में कौन कर रहा था और साइबर ठगी की रकम को किस तरह अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया।
20 राज्यों में 333 पीड़ित, ₹417 करोड़ से ज्यादा नुकसान
ED ने विभिन्न FIR और वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान नेटवर्क का व्यापक स्वरूप सामने आने का दावा किया। एजेंसी के मुताबिक, 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 163 से अधिक FIR में 333 पीड़ितों की पहचान हुई है।
इन मामलों में रिपोर्ट किया गया कुल नुकसान ₹417.49 करोड़ से अधिक है। जांच में 101 मामलों में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि पीड़ित की रकम नेटवर्क से जुड़ी दो या उससे अधिक संस्थाओं के जरिए आगे भेजी गई।
हालांकि, नेटवर्क से जुड़े संस्थाओं और बैंक खातों में हुआ कुल लेनदेन कथित साइबर ठगी की रकम से कई गुना अधिक था। ED के अनुसार, जांच के दायरे में आई कंपनियों और खातों में करीब ₹27,850 करोड़ के बैंकिंग लेनदेन दर्ज हुए।
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₹2,904 करोड़ नकद जमा होने का दावा
जांच एजेंसी ने बड़े पैमाने पर नकदी के लेनदेन का भी पता लगाने का दावा किया है। ED के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़ी संस्थाओं ने करीब ₹2,904 करोड़ नकद जमा किए। इनमें से लगभग ₹584.70 करोड़ 61,448 bulk note acceptance machine लेनदेन के जरिए अलग-अलग स्थानों पर जमा किए जाने का दावा है।
एजेंसी को संदेह है कि कई खातों और कंपनियों के बीच रकम को तेजी से घुमाने का उद्देश्य कथित अपराध से प्राप्त धन की परतें बनाना और उसके मूल स्रोत को छिपाना था। जांच में यह भी सामने आया कि गोवा की महिला से ठगी गई रकम कथित डिजिटल अरेस्ट के कुछ ही घंटों के भीतर इस नेटवर्क में पहुंच गई थी।
PMLA के तहत दो गिरफ्तार
जांच के दौरान ED ने 23 अगस्त 2026 को Fahim Moin Hussain Sayed और Naim Mueen Sayyed को गिरफ्तार किया। दोनों को Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
एजेंसी का आरोप है कि दोनों की भूमिका व्यापक साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में थी। जांचकर्ताओं द्वारा उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जो कथित तौर पर कंपनियों और बैंक खातों को नियंत्रित कर रहे थे।
मुंबई-गोवा में 20 से अधिक ठिकानों पर तलाशी
ED ने 17 जुलाई और 21 अगस्त को मुंबई तथा गोवा में 20 से अधिक ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान करीब ₹3.25 करोड़ नकद, डिजिटल उपकरण, कारोबारी रिकॉर्ड और वैधानिक रजिस्टर जब्त किए जाने का दावा किया गया है। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच जारी है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में अपराधी सिर्फ पीड़ित से रकम नहीं ठगते, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में रकम को तेजी से कई स्तरों पर घुमाकर उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि एक पीड़ित की शिकायत से सामने आया व्यापक वित्तीय नेटवर्क यह दिखाता है कि साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच संबंध कितना संगठित हो सकता है।
ED की जांच अभी जारी है। गिरफ्तार आरोपियों और अन्य व्यक्तियों या कंपनियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
