नई दिल्ली: मोटर बीमा दावों में बढ़ती कथित धोखाधड़ी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों को राज्य स्तर पर समर्पित Special Investigation Team (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह कदम ऐसे मामलों में एक संभावित संगठित पैटर्न सामने आने के बाद उठाया है, जिसमें एक ही वाहन को अलग-अलग दुर्घटनाओं में शामिल दिखाकर कई बीमा दावे किए जाने के संकेत मिले। कोर्ट ने आशंका जताई कि इस तरह की धोखाधड़ी बड़े पैमाने पर हो सकती है और इसे रोकने के लिए राज्यों तथा बीमा कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 17 अगस्त को The Oriental Insurance Company Ltd v Tuni Pati & Ors मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश जारी किए। मामला मूल रूप से ओडिशा हाईकोर्ट के 19 मई 2022 के फैसले को चुनौती देने से जुड़ा था। शुरुआत में विवाद इस सवाल तक सीमित था कि दुर्घटना में शामिल बताया गया वाहन वास्तव में वही वाहन था या नहीं।
सुनवाई आगे बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसे संकेत आए कि कथित फर्जी बीमा दावों में एक “fixed pattern” हो सकता है। एक ही वाहन को कई दुर्घटनाओं में शामिल दिखाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद कोर्ट ने कहा कि मामला संभावित रूप से “enormous proportion” की धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है। इसके बाद अदालत ने कार्यवाही का दायरा बढ़ाते हुए ऐसे फर्जी दावों की पहचान और रोकथाम पर व्यापक ध्यान केंद्रित किया।
कोर्ट ने कहा कि फर्जी बीमा दावों का असर केवल बीमा कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। बड़ी संख्या में गलत दावों के भुगतान से बीमा कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है और अंततः इसका असर वास्तविक पॉलिसीधारकों पर पड़ सकता है। कंपनियों को अपनी वित्तीय स्थिति बनाए रखने के लिए प्रीमियम बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है, जिससे ईमानदार ग्राहकों की लागत बढ़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक राज्य को संभावित फर्जी बीमा दावों की जांच के लिए समर्पित SIT बनाने का निर्देश दिया है। बीमा कंपनियों को ऐसे सभी शिकायतों और मामलों की जानकारी संबंधित SIT को भेजनी होगी, जिनमें धोखाधड़ी की आशंका हो। राज्यों को इन टीमों के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने और जांच की प्रक्रिया के बारे में अदालत को जानकारी देने को कहा गया है।
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कोर्ट ने बीमा कंपनियों को संदिग्ध मामलों में “pick and choose approach” अपनाने से भी स्पष्ट रूप से रोका है। कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि धोखाधड़ी के संकेत देने वाले सभी दावों को SIT तक पहुंचाया जाए। यदि किसी कंपनी द्वारा चुनिंदा मामलों को ही जांच के लिए भेजने की बात सामने आती है, तो उसके शीर्ष प्रबंधन को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
यदि SIT कार्रवाई की सिफारिश करती है या बीमा कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज होती है, तो संबंधित कंपनी को अपने अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी तुरंत शुरू करनी होगी। अदालत ने बीमा कंपनियों से आंतरिक स्तर पर भी यह जांच करने को कहा है कि कहीं उनके कर्मचारी या अधिकारी कथित धोखाधड़ी में मिलीभगत तो नहीं कर रहे थे।
कोर्ट ने Motor Accident Claims Tribunal द्वारा धोखाधड़ी या मिलीभगत के आधार पर खारिज किए गए दावों के लिए भी अलग प्रक्रिया तय की है। ऐसे मामलों का विवरण संबंधित बीमा कंपनी को तत्काल उस राज्य की SIT को भेजना होगा, जहां दावा किया गया था। इसके साथ कंपनी को अपनी आंतरिक जांच कर यह पता लगाना होगा कि उसके किसी अधिकारी की “contributory collusion” में भूमिका थी या नहीं।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में लागू व्यवस्था का भी उल्लेख हुआ। राज्य ने बताया कि बीमा कंपनियों से मिली संभावित धोखाधड़ी की शिकायतों की जांच के लिए विशेष SIT बनाई गई है। राज्य के अनुसार उसे 2,188 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 1,029 से अधिक की जांच पूरी की जा चुकी है। इन मामलों में 533 आरोपियों के खिलाफ 231 FIR दर्ज की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की कार्रवाई की सराहना की।
कोर्ट के समक्ष बीमा दावों में दोहराए जाने वाले पैटर्न की पहचान के लिए साझा डिजिटल डेटाबेस बनाने का सुझाव भी रखा गया। प्रस्ताव के अनुसार बीमा कंपनियां यह जांच सकेंगी कि एक ही वाहन, व्यक्ति या संस्था अलग-अलग कंपनियों के दावों में बार-बार तो नहीं दिखाई दे रही। ऐसे सिस्टम को VAHAN, SARATHI और अन्य दुर्घटना डेटाबेस से जोड़ने पर दुर्घटना, वाहन और स्थान की जानकारी का सत्यापन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में IRDAI, वित्त मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और General Insurance Council को भी पक्षकार बनाया है। इन संस्थाओं से मौजूदा जिम्मेदारियों और फर्जी बीमा दावों से निपटने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों पर हलफनामा मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे होगी।
