ग्राहकों की जमा रकम खातों में जमा करने के बजाय कथित तौर पर खुद रखता था संचालक; पासबुक में हाथ से रकम लिखकर कियोस्क की मुहर लगाई, शिकायत से पहले आरोपी फरार

पासबुक में पेन से फर्जी एंट्री कर छिपाया ₹1 करोड़ का खेल, SBI कियोस्क संचालक पर ग्रामीणों से ठगी का आरोप

Roopa
By Roopa
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धमतरी, 26 अगस्त। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कियोस्क सेंटर के जरिए ग्रामीणों से कथित बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। भखारा थाना क्षेत्र के कोर्रा गांव में संचालित कियोस्क सेंटर के संचालक केशव साहू पर आरोप है कि उसने ग्राहकों से जमा के नाम पर रकम ली, लेकिन उसे उनके बैंक खातों में जमा नहीं किया। प्रारंभिक जांच में करीब ₹1,00,75,000 की धोखाधड़ी सामने आई है, जबकि शिकायतों के आधार पर कुल रकम करीब ₹1.75 करोड़ तक होने की बात सामने आई है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।

आरोप है कि केशव साहू ग्रामीणों से पैसे लेकर उन्हें बैंक खाते में जमा करने के बजाय कथित तौर पर अपने पास रख लेता था। ठगी को छिपाने के लिए उसने पासबुक प्रिंटिंग मशीन का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय ग्राहकों की पासबुक में जमा रकम खुद पेन से लिख देता था। इसके बाद हाथ से लिखी गई एंट्री पर कियोस्क सेंटर की मुहर भी लगा देता था, जिससे ग्राहक उसे बैंक की आधिकारिक एंट्री समझते रहे।

ग्रामीणों का भरोसा बना रहने के कारण कथित फर्जीवाड़ा लंबे समय तक सामने नहीं आया। कई ग्राहक पासबुक में लिखी रकम और लगी हुई मुहर को ही जमा राशि का प्रमाण मानते थे। उन्हें यह संदेह नहीं हुआ कि उनके खातों में वास्तव में रकम जमा हुई भी है या नहीं।

मामला तब सामने आया जब कुछ ग्राहकों ने अपने खातों का वास्तविक बैलेंस SBI की मुख्य शाखा या अन्य बैंकिंग माध्यमों से जांचा। जांच में उन्हें पासबुक में दर्ज रकम और बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूद वास्तविक बैलेंस के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। इसके बाद ग्राहकों ने मामले की शिकायत की और एक-एक कर अन्य पीड़ित भी सामने आने लगे।

पुलिस अब कियोस्क से जुड़े बैंक रिकॉर्ड और ग्राहकों की पासबुक में दर्ज एंट्री की जांच कर रही है। हाथ से लिखी गई रकम का मिलान बैंक के डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड से किया जा रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कितने ग्राहकों से रकम ली गई और वास्तव में कितनी राशि उनके खातों में जमा नहीं हुई।

प्राथमिक जांच के आधार पर अब तक करीब ₹1,00,75,000 की वित्तीय अनियमितता सामने आने की जानकारी है। हालांकि, शिकायतों और बैंक रिकॉर्ड के विस्तृत मिलान के बाद ठगी की वास्तविक रकम स्पष्ट होगी। पुलिस पीड़ितों की सटीक संख्या भी जुटा रही है।

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इस मामले ने बैंकिंग कियोस्क और स्थानीय बैंकिंग प्रतिनिधियों पर निर्भर ग्राहकों के लिए लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि की जरूरत को भी सामने ला दिया है। पासबुक में हाथ से लिखी गई एंट्री और मुहर को बैंक में रकम जमा होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। ग्राहकों को प्रत्येक जमा के बाद बैंक से प्राप्त आधिकारिक संदेश, डिजिटल स्टेटमेंट या खाते के वास्तविक बैलेंस की जांच करनी चाहिए।

पुलिस के मुताबिक, औपचारिक शिकायत दर्ज होने से पहले ही आरोपी केशव साहू फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस उसके संभावित ठिकानों के साथ-साथ कथित तौर पर ठगी से जुड़े बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपी ने अकेले ही कथित फर्जीवाड़ा किया या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। कियोस्क के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, पासबुक एंट्री और अन्य दस्तावेजों की जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, सभी शिकायतों की पुष्टि और बैंक रिकॉर्ड के विस्तृत ऑडिट के बाद ही ठगी की अंतिम रकम सामने आएगी। जिन ग्राहकों ने आरोपी के कियोस्क के जरिए पैसे जमा किए थे, उनके खातों की भी जांच की जा रही है।

यह मामला दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सेवाओं के लिए किसी व्यक्ति पर अत्यधिक भरोसा करना किस तरह वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है। कथित तौर पर बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड में रकम दर्ज किए बिना पासबुक में हाथ से एंट्री कर आरोपी ने ग्राहकों को वास्तविक स्थिति से अनजान रखा।

फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश, वित्तीय लेनदेन की जांच और पीड़ितों की पहचान में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ठगी की वास्तविक रकम, प्रभावित ग्राहकों की संख्या और मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका स्पष्ट होगी।

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