कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में राज्य कर विभाग (SGST) ने आयरन और स्क्रैप कारोबार से जुड़ी नौ संदिग्ध फर्जी फर्मों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की नौ टीमों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में एक साथ छापेमारी कर कथित तौर पर ₹390 करोड़ की बोगस सप्लाई और करीब ₹72.12 करोड़ की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का मामला पकड़ा है। जांच में कई फर्में मौके पर अस्तित्वहीन मिलीं, जबकि कुछ ऐसे लोगों के नाम पर GST पंजीकरण पाया गया, जिन्हें अपने नाम से फर्म संचालित होने की जानकारी तक नहीं थी।
कार्रवाई के दौरान विभाग ने मौके पर ही करीब ₹1.34 करोड़ की ITC ब्लॉक की है। आठ फर्मों के खिलाफ संबंधित थानों में FIR दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। सभी नौ इकाइयों के पास Central GST का पंजीकरण था। विभाग ने इनके पंजीकरण को रद्द कराने के लिए CGST अधिकारियों को भी पत्र भेजा है।
कागजों पर चल रही थीं कई फर्में
SGST की टीमों ने जिन स्थानों पर जांच की, वहां कई फर्मों का घोषित कारोबार स्थल मिला ही नहीं। कुछ जगहों पर दूसरी इकाइयां कारोबार करती मिलीं, जबकि संबंधित फर्मों के नाम पर केवल दस्तावेजों में खरीद-बिक्री और ITC का लेनदेन दर्ज था।
जांच में जरौली स्थित एक फर्म को पूरी तरह अस्तित्वहीन पाया गया। विभाग के अनुसार, इस इकाई ने कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 1 दिसंबर 2025 को पंजीकरण कराया था और इसके जरिए करीब ₹19.14 करोड़ की ITC अन्य व्यापारियों को पास ऑन की गई।
बसंत विहार स्थित चंदन सर्विसेज भी मौके पर कारोबार करती नहीं मिली। विभाग के अनुसार, फर्म ने 28 अक्टूबर 2025 को पंजीकरण लिया और करीब ₹9.93 करोड़ की ITC का लेनदेन किया। कार्रवाई के दौरान करीब ₹98.51 लाख की ITC ब्लॉक की गई।
रामबाग की बालाजी इंटरप्राइजेज के घोषित पते पर भी संबंधित कारोबार नहीं मिला। जांच में करीब ₹11.50 करोड़ की ITC पास ऑन किए जाने की जानकारी सामने आई, जिसमें से ₹36 लाख की ITC ब्लॉक की गई।
सर्वोदय नगर की फर्म ने दिखाई ₹76 करोड़ की ITC
सर्वोदय नगर स्थित एक अन्य बालाजी इंटरप्राइजेज को भी जांच में फर्जी पाया गया। विभाग के मुताबिक इस फर्म ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब ₹76 करोड़ की ITC अन्य व्यापारियों को पास ऑन की थी। अधिकारियों ने इसमें से करीब ₹70 करोड़ की ITC रिवर्स कराई है।
चमनगंज की न्यू ट्रेड इंटरप्राइजेज भी जांच के दौरान कारोबार करती नहीं मिली। विभाग के अनुसार, इस फर्म ने करीब ₹4.74 करोड़ की ITC पास ऑन की थी। इसके अलावा देहलीसुजानपुर की अर्जुन ट्रेडर्स के अस्तित्व पर भी सवाल मिले। विभाग के अनुसार, इस फर्म के जरिए करीब ₹4.83 करोड़ की ITC पास ऑन की गई।
भवानीपुर की अब्दुल ट्रेडर्स और गोपालनगर की इंडियन ट्रेडिंग कंपनी भी जांच के दायरे में आईं। अब्दुल ट्रेडर्स के नाम पर करीब ₹4.74 करोड़ की ITC का लेनदेन पाया गया, जबकि इंडियन ट्रेडिंग कंपनी की खरीद को कथित तौर पर बोगस पाया गया और करीब ₹16.83 करोड़ की ITC पास ऑन किए जाने की जानकारी सामने आई। संबंधित ITC को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions
पंजीकरण के 25 दिन में ₹2 करोड़ की बिक्री
देहलीसुजानपुर में पंजीकृत रिषभ ट्रेडर्स ने जांच अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से खींचा। इस फर्म का पंजीकरण 30 जुलाई 2026 को हुआ था, लेकिन महज 25 दिनों में करीब ₹2 करोड़ की बिक्री दिखाई गई। जांच के दौरान खरीद से संबंधित जरूरी दस्तावेज मौके पर नहीं मिले। विभाग के अनुसार, कार्रवाई के बाद व्यापारी से करीब ₹37 लाख सरकारी कोष में जमा कराए गए।
फर्जी ITC नेटवर्क की आगे भी जांच
SGST अब इन फर्मों से जुड़े अन्य कारोबारियों और कंपनियों के डेटा का विश्लेषण कर रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित फर्जी ITC किन व्यापारियों ने क्लेम की, किन इकाइयों को पास ऑन की गई और पूरे नेटवर्क में कितनी फर्में शामिल हो सकती हैं।
विभाग अब बैंकिंग रिकॉर्ड, GST रिटर्न, ई-वे बिल, खरीद-बिक्री के दस्तावेज और ITC के ट्रांजेक्शन पैटर्न का मिलान कर रहा है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कागजों पर दिखाई गई सप्लाई के पीछे वास्तविक कारोबार था या केवल टैक्स क्रेडिट हासिल करने के लिए लेनदेन तैयार किए गए थे।
करीब ₹390 करोड़ की कथित बोगस सप्लाई और ₹72.12 करोड़ की फर्जी ITC का यह मामला सामने आने के बाद SGST ने आयरन-स्क्रैप सेक्टर में ऐसे अन्य संदिग्ध कारोबारियों की भी जांच तेज करने के संकेत दिए हैं। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाएगी।
