85% डाउन वाली लॉटरी व्यवस्था में कथित टेंडर मैनेज करने की जांच तेज; सात ठेकेदार फर्में ब्लैकलिस्ट, बैंक खातों और संपत्तियों की वित्तीय पड़ताल शुरू

कानपुर नगर निगम टेंडर घोटाला: 6 FIR, दो ठेकेदार गिरफ्तार; ₹100 करोड़ के टेंडर रद्द

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By Roopa
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कानपुर: कानपुर नगर निगम में कथित टेंडर घोटाले को लेकर पुलिस और नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। ठेके दिलाने की प्रक्रिया में कथित हेरफेर, रंगदारी और धमकी के आरोपों के बीच अब तक छह FIR दर्ज की जा चुकी हैं और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले का कथित मुख्य आरोपी गोविंद शर्मा अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें राजस्थान और मध्य प्रदेश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

कार्रवाई के बाद नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। जांच में आरोप है कि कुछ ठेकेदारों ने लॉटरी आधारित व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग कर चुनिंदा लोगों को काम दिलाने का तंत्र बना रखा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और ठेकों के आवंटन को प्रभावित करने में किसकी क्या भूमिका थी।

नगर निगम की शिकायत पर स्वरूपनगर थाने में पांच मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि एक FIR फजलगंज थाने में एक ठेकेदार की शिकायत पर दर्ज हुई है। पुलिस ने गोविंद शर्मा, संदीप जैन और रज्जन बाजपेयी के खिलाफ रंगदारी और धमकी से जुड़े आरोपों में मुकदमा दर्ज किया है। संदीप जैन और रज्जन बाजपेयी को गिरफ्तार किया जा चुका है।

85% डाउन वाली व्यवस्था में कथित खेल

जांच का एक प्रमुख बिंदु लॉटरी सिस्टम के जरिए करीब 85% डाउन पर टेंडर मैनेज किए जाने का आरोप है। पुलिस और नगर निगम के अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि क्या टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लगातार काम दिलाया जाता था।

इस कथित व्यवस्था ने नगर निगम की पुरानी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। जांच में टेंडर फाइलों, आवंटन रिकॉर्ड और संबंधित ठेकेदारों की गतिविधियों का मिलान किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गड़बड़ी कुछ चुनिंदा टेंडरों तक सीमित थी या इसका दायरा बड़ा था।

₹100 करोड़ के टेंडर रद्द

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम ने करीब ₹100 करोड़ के टेंडर रद्द कर दिए हैं। इससे उन विकास कार्यों के आवंटन पर रोक लग गई है, जिनकी प्रक्रिया कथित तौर पर विवादित व्यवस्था से जुड़ी थी।

नगर निगम ने लंबित विकास कार्यों के आवंटन के लिए पुरानी लॉटरी व्यवस्था को भी समाप्त करने का फैसला किया है। अब ऐसे कार्य ऑनलाइन ई-टेंडरिंग के माध्यम से आवंटित किए जाएंगे। इससे पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और टेंडर प्रक्रिया की निगरानी आसान होने की उम्मीद है।

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सात ठेकेदार फर्में ब्लैकलिस्ट

नगर निगम ने कार्रवाई के तहत सात ठेकेदार फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया है। इन फर्मों के बैंक खातों और संपत्तियों की वित्तीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित टेंडर हेरफेर से जुड़े लोगों के बीच किसी तरह का वित्तीय लेनदेन हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि जिन फर्मों को ठेके मिले, उनके पास संबंधित कार्यों को पूरा करने की वास्तविक क्षमता और संसाधन थे या नहीं।

अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच अब केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं है। पुलिस और नगर निगम अधिकारी टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रहे हैं। टेंडर तैयार करने, स्वीकृति देने और काम आवंटित करने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

जांच में यह देखा जा रहा है कि कहीं किसी अधिकारी ने कथित तौर पर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी तो नहीं की। यदि किसी अधिकारी की मिलीभगत या लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

गोविंद शर्मा की तलाश में दबिश

मामले के कथित मुख्य आरोपी गोविंद शर्मा की तलाश जारी है। पुलिस टीमें राजस्थान और मध्य प्रदेश में उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से कथित टेंडर नेटवर्क, ठेकों के आवंटन में कथित हेरफेर और अन्य आरोपियों की भूमिका से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

फिलहाल छह FIR, दो गिरफ्तारियां, सात फर्मों की ब्लैकलिस्टिंग और करीब ₹100 करोड़ के टेंडर रद्द होने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस और नगर निगम अब कथित टेंडर हेरफेर, वित्तीय लेनदेन, रंगदारी और संभावित मिलीभगत की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटे हैं। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

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