मुंबई: Volkswagen से जुड़े करीब $1.4 अरब (लगभग ₹1.17 लाख करोड़) के टैक्स विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 16 महीने बाद एक असामान्य कदम उठाते हुए फैसला सुरक्षित रखने का पूर्व आदेश वापस ले लिया है। अदालत ने मामले को दोबारा सुनवाई के चरण में भेज दिया है। अब संबंधित पक्षों को एक बार फिर अपने तर्क अदालत के सामने रखने होंगे, जिसके बाद फैसला सुरक्षित किया जाएगा।
यह मामला अप्रैल 2025 में सुनवाई और दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुनाने के लिए सुरक्षित किया गया था। हालांकि, करीब 16 महीने गुजरने के बावजूद अदालत फैसला नहीं सुना सकी। अब हाईकोर्ट ने कहा है कि ‘काम की अत्यावश्यकता’ के कारण फैसला सुनाया नहीं जा सका। इसी आधार पर पहले से सुरक्षित फैसले को डी-रिजर्व करने का निर्णय लिया गया है।
क्या होता है फैसला डी-रिजर्व करना?
किसी मामले में जब अदालत सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखती है, तो इसका अर्थ होता है कि दोनों पक्षों की दलीलें समाप्त हो चुकी हैं और अब अदालत अपना निर्णय सुनाएगी। आमतौर पर इस चरण के बाद पक्षों को दोबारा पूरे मामले पर बहस करने की जरूरत नहीं होती।
Volkswagen के मामले में स्थिति अलग हो गई है। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाने के बजाय मामले को फिर से सुनवाई के लिए खोल दिया है। इसका मतलब है कि पक्षकारों को मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर दोबारा दलीलें पेश करनी होंगी।
नई पीठ का गठन होगा
अब इस मामले की अगली प्रक्रिया हाईकोर्ट में नई पीठ के गठन से शुरू होगी। अदालत को उम्मीद है कि करीब चार सप्ताह के भीतर पीठ का गठन कर दिया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को फिर से सुनवाई के दौरान अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा।
मामला उसी न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष भेजा जाएगा या नई पीठ इसका निर्धारण अदालत की प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत करेगी। सुनवाई पूरी होने के बाद फिर से फैसला सुरक्षित रखा जाएगा और उसके बाद निर्णय सुनाया जा सकेगा।
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मामला असामान्य क्यों माना जा रहा है?
फैसला सुरक्षित होने के बाद इतने लंबे अंतराल के पश्चात किसी मामले को दोबारा सुनवाई के लिए खोलना सामान्य प्रक्रिया नहीं है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि इस मामले में पीठ के किसी न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है।
हाईकोर्ट का ताजा कदम ऐसे समय आया है जब Volkswagen से जुड़े इस बड़े टैक्स विवाद में अंतिम न्यायिक निर्णय का इंतजार पहले ही लंबा हो चुका है। अब सुनवाई दोबारा शुरू होने के कारण मामले के निपटारे में और समय लगने की संभावना है।
इस प्रक्रिया का तत्काल अगला चरण नई पीठ का गठन और उसके बाद पक्षों की दोबारा सुनवाई है। सुनवाई पूरी होने पर अदालत फिर से निर्णय सुरक्षित करेगी। ऐसे में अप्रैल 2025 में जिस स्तर पर मामला पहुंचा था, उसे अब दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
Volkswagen के लिए भी यह विवाद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे जुड़ी कर देनदारी करीब $1.4 अरब, यानी लगभग ₹1.17 लाख करोड़, बताई गई है। हालांकि, अंतिम कानूनी स्थिति अब दोबारा होने वाली सुनवाई और उसके बाद हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी।
