तीन साल तक सोसाइटी खाते से धन निकासी का आरोप, नए प्रबंधन द्वारा ऑडिट में बड़े वित्तीय अंतर का खुलासा

पुणे हाउसिंग सोसाइटी घोटाला: पूर्व प्रशासक और सहयोगी पर ₹32 लाख की कथित हेराफेरी का मामला दर्ज

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By Roopa
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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे शहर के करवे नगर क्षेत्र में एक हाउसिंग सोसाइटी में बड़े वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जहां पूर्व अधिकृत प्रशासक और उसके सहयोगी पर सोसाइटी के बैंक खाते से लगभग ₹32 लाख की कथित हेराफेरी का आरोप लगा है। इस घटना ने सहकारी हाउसिंग प्रबंधन में वित्तीय निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस के अनुसार, यह शिकायत नवनिर्वाचित प्रबंधन समिति द्वारा दर्ज कराई गई है। समिति का आरोप है कि पूर्व प्रशासक के कार्यकाल के दौरान सोसाइटी के फंड का बड़ा हिस्सा गलत तरीके से निकाल लिया गया। आरोपियों की पहचान अतुल रमेश महाजन (पूर्व प्रशासक एवं ऑडिटर) और उनके सहयोगी शिवाजी भीमराव राठोड़ के रूप में की गई है।

शिकायत में कहा गया है कि यह अनियमितता तब सामने आई जब नए प्रबंधन ने अप्रैल 2026 में कॉसमॉस बैंक में नियमित केवाईसी प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान पाया गया कि सोसाइटी के खाते में लगभग ₹40 लाख होने चाहिए थे, जिसमें फिक्स्ड डिपॉजिट, ब्याज और अन्य शेष राशि शामिल थी, लेकिन खाते में केवल ₹1.44 लाख ही मौजूद थे।

इस बड़े अंतर ने प्रबंधन समिति को पिछले पांच वर्षों के बैंक स्टेटमेंट की विस्तृत जांच के लिए मजबूर किया। आंतरिक ऑडिट में कथित तौर पर सामने आया कि मार्च 2023 से जनवरी 2026 के बीच कई चेकों के जरिए करीब ₹32 लाख की निकासी की गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि ये चेक “ओम मीडिया” और शिवाजी राठोड़ के नाम पर जारी किए गए थे, जिससे इन लेनदेन की वैधता पर सवाल उठे हैं। सोसाइटी सदस्यों का आरोप है कि अतुल महाजन, जिन्हें प्रशासक के रूप में वित्तीय नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी दी गई थी, ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए बिना अनुमति के धन निकासी करवाई।

शिकायत के अनुसार, महाजन को उप-पंजीयक कार्यालय द्वारा 2021 से 2025 तक अधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया था, क्योंकि उस अवधि में समय पर चुनाव नहीं हो पाए थे। इस दौरान उन्होंने बैंकिंग और वित्तीय निर्णयों पर पूर्ण नियंत्रण रखा।

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नए प्रबंधन के मार्च 2026 में कार्यभार संभालने के बाद नियमित जांच के दौरान वित्तीय गड़बड़ियां उजागर हुईं, जिसके बाद आंतरिक ऑडिट कराया गया। ऑडिट में कई संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच का फोकस अब धन के प्रवाह का पता लगाने और यह निर्धारित करने पर है कि क्या इस कथित घोटाले में अन्य लोग भी शामिल थे। यह भी जांच की जा रही है कि क्या रकम को छिपाने के लिए किसी मध्यस्थ या फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी सोसाइटी में ऐसे मामले अक्सर तब सामने आते हैं जब लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण रहता है। उनका कहना है कि नियमित ऑडिट और पारदर्शी बैंकिंग प्रणाली से ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।

फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस जल्द ही उन्हें पूछताछ के लिए बुला सकती है। अधिकारी बैंक रिकॉर्ड, चेक ट्रेल और लेनदेन के पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।

इस घटना के बाद सोसाइटी के सदस्यों में नाराजगी है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उन्होंने सहकारी सोसाइटियों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की भी अपील की है।

मामले की जांच जारी है और पुलिस वित्तीय दस्तावेजों व संबंधित बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। आने वाले दिनों में जांच में और अहम खुलासे होने की संभावना है।

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