बिहार में खुद को ED डायरेक्टर बताकर भोजपुर DM पर दबाव बनाने की कोशिश करने वाले शातिर जालसाज को पटना से गिरफ्तार किया गया।

मैं ईडी डायरेक्टर बोल रहा हूं…’—फर्जी कॉल से डीएम को फंसाने की साजिश, पटना से शातिर जालसाज गिरफ्तार

Team The420
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बिहार में प्रशासनिक तंत्र को झकझोर देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर जालसाज ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का डायरेक्टर बताकर भोजपुर के जिला अधिकारी (DM) को फंसाने की कोशिश की। आरोपी ने न केवल फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया, बल्कि दबाव बनाकर प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप करने का प्रयास भी किया। हालांकि समय रहते सतर्कता बरतते हुए आरोपी को पटना से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान अभिषेक अग्रवाल उर्फ अभिषेक भोपलका के रूप में हुई है, जिसे कोतवाली इलाके से एसटीएफ और पटना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दबोचा गया। जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर उच्च अधिकारियों को निशाना बना रहा था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब आरोपी ने भोजपुर डीएम तनय सुल्तानिया को कई बार फोन कर खुद को ईडी डायरेक्टर बताते हुए दबाव बनाने की कोशिश की। वह अपने प्रभाव का हवाला देकर प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप करने और कथित रूप से निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। शुरुआती बातचीत में ही प्रशासनिक स्टाफ को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद मामला गंभीरता से लिया गया।

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इस संदिग्ध गतिविधि के बाद 28 अप्रैल को नवादा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामला दर्ज होते ही पुलिस और एसटीएफ सक्रिय हो गई और आरोपी की तलाश तेज कर दी गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, अभिषेक अग्रवाल कोई साधारण ठग नहीं है, बल्कि वह पहले भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल रह चुका है। वर्ष 2022 में उसने खुद को एक वरिष्ठ अधिकारी बताकर तत्कालीन डीजीपी को भी भ्रमित करने की कोशिश की थी। उस दौरान मामला सामने आने पर उसे गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया था।

इस बार आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि वह फर्जी सिम कार्ड, नकली पहचान और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर उच्च अधिकारियों को ब्लैकमेल करने और प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश करता था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का नेटवर्क केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं था, बल्कि वह विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से भी संपर्क स्थापित कर अपने प्रभाव का झूठा प्रदर्शन करता था। उसके पास से कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।

अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं या फिर यह किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसी संभावना के आधार पर जांच को और विस्तार दिया जा रहा है।

इस घटना ने बिहार प्रशासनिक व्यवस्था में साइबर और फर्जी पहचान आधारित अपराधों को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी और डिजिटल सत्यापन प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने किन-किन अधिकारियों या संस्थानों को निशाना बनाने का प्रयास किया था। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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