अजमेर में पुराने 5 रुपये के नोट के बदले लाखों रुपये दिलाने के झांसे में रिटायर महिला टीचर से ₹3.66 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया।

सोशल मीडिया का नया जाल: पुराने 5 रुपये के नोट के नाम पर ₹3.66 लाख की साइबर ठगी

Team The420
5 Min Read

अजमेर। सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक विज्ञापनों और अविश्वसनीय कमाई के दावों ने एक बार फिर साइबर ठगी की खतरनाक सच्चाई को उजागर किया है। राजस्थान के Ajmer में रहने वाली एक रिटायर महिला टीचर को पुराने 5 रुपये के नोट के बदले 48 लाख रुपये देने के झांसे में फंसाकर साइबर ठगों ने करीब ₹3.66 लाख की ठगी कर ली। यह पूरा मामला धीरे-धीरे एक संगठित डिजिटल जाल में बदल गया, जहां लालच, भरोसा और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लगातार पैसे ऐंठे गए।

मामले की शुरुआत फेसबुक पर दिखे एक विज्ञापन से हुई, जिसमें एक पुराने 5 रुपये के नोट की तस्वीर दिखाई गई थी। इस नोट पर खेत जोतते ट्रैक्टर का चित्र बना हुआ था। विज्ञापन में दावा किया गया था कि यदि किसी के पास ऐसा नोट है, तो उसे 48 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। इस आकर्षक ऑफर को देखकर महिला ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया और यहीं से ठगी का सिलसिला शुरू हो गया।

FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act

फोन पर बातचीत के दौरान ठगों ने खुद को पुराने नोट और सिक्कों के बड़े डीलर के रूप में पेश किया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय खरीदार हैं जो ऐसे दुर्लभ नोटों के बदले भारी रकम देने को तैयार हैं। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए केवल ₹520 ‘प्रोसेसिंग फीस’ के रूप में मांगी गई, जिसे महिला ने मामूली समझकर भुगतान कर दिया।

इसके बाद ठगों ने पूरे मामले को एक सुनियोजित प्रक्रिया में बदल दिया। कभी ‘आरबीआई क्लियरेंस’, कभी ‘फाइल चार्ज’, तो कभी ‘जीएसटी और ट्रांसफर ड्यूटी’ के नाम पर लगातार रकम मांगी जाती रही। हर बार यह भरोसा दिलाया गया कि अंतिम प्रक्रिया पूरी होते ही 48 लाख रुपये सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। धीरे-धीरे यह एक मनोवैज्ञानिक दबाव का खेल बन गया, जिसमें पीड़िता को बार-बार विश्वास दिलाकर भुगतान कराया गया।

ठगों की रणनीति बेहद संगठित थी। उन्होंने कई किश्तों में रकम वसूली और अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया ताकि लेनदेन को ट्रैक करना मुश्किल हो। इस दौरान पीड़िता ने विभिन्न खातों में कुल मिलाकर करीब ₹3,66,000 ट्रांसफर कर दिए। किसी भी स्तर पर न तो कोई वास्तविक लेनदेन हुआ और न ही किसी खरीद प्रक्रिया का प्रमाण दिया गया।

जब लगातार नई मांगें आने लगीं और पैसे वापस करने की बात पर टालमटोल शुरू हो गई, तब महिला को शक हुआ। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो ठगों ने अचानक संपर्क तोड़ दिया और धमकी भरे संदेश भेजने लगे। इसके बाद पूरा मामला स्पष्ट रूप से साइबर ठगी का निकला।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि पढ़े-लिखे और जागरूक लोग भी डिजिटल लालच के जाल में आसानी से फंस सकते हैं। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए पेशेवर भाषा, फर्जी दस्तावेज और ‘सरकारी प्रक्रिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे पूरा मामला असली प्रतीत होने लगा।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर पुराने नोट, दुर्लभ वस्तुएं या निवेश योजनाओं के नाम पर बड़े रिटर्न का लालच देते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य शुरुआत में छोटी रकम लेकर भरोसा बनाना और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम वसूलना होता है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ठगों के बैंक खातों व डिजिटल लेनदेन की ट्रैकिंग की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की ठगी से बचने के लिए किसी भी असामान्य या अविश्वसनीय ऑफर पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले आकर्षक लेकिन अवास्तविक लाभ के वादे अक्सर बड़े साइबर फ्रॉड का हिस्सा होते हैं, और थोड़ी सी लापरवाही भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article