गोरखपुर। बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक निजी बैंक के शाखा प्रबंधक और दो कर्मचारियों पर ग्राहक के खाते से छेड़छाड़ कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है। पीड़ित की तहरीर पर अदालत ने मामला दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
यह मामला कैंट थाना क्षेत्र के पार्क रोड स्थित बैंक शाखा से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, आरोपितों में शाखा प्रबंधक कृष्ण मोहन पांडेय, कर्मचारी विवेक पांडेय और प्रिया शामिल हैं। पीड़ित का आरोप है कि तीनों ने मिलकर साजिश के तहत उसके खाते में अनधिकृत गतिविधियां कीं, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
खजनी क्षेत्र के चोतरवा निवासी रणजीत सिंह, जो सेक्टर-15 गीडा में जय श्री लक्ष्मी गृह उद्योग के प्रोपराइटर हैं, ने बताया कि उनका खाता उक्त शाखा में संचालित है। उन्होंने 22 जून 2025 को अपने खाते से ₹81,000 अपनी मां के खाते में ट्रांसफर किए थे, जो सामान्य प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक हो गया। लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने संदेह पैदा करना शुरू कर दिया।
अगले दिन उन्होंने अपने व्यवसाय के लिए यूपीआई स्कैनर लगवाने के उद्देश्य से शाखा प्रबंधक से संपर्क किया। निर्देश मिलने पर बैंक कर्मचारी उनके पास पहुंचे और परीक्षण के तौर पर ₹1 का ट्रांजेक्शन किया गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन करीब तीन सप्ताह बाद स्थिति अचानक बदल गई।
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15 जुलाई 2025 को रणजीत सिंह के मोबाइल का नेटवर्क अचानक बंद हो गया। शुरुआत में इसे सामान्य तकनीकी समस्या समझा गया, लेकिन 17 जुलाई को नया सिम लेने के बाद जब उन्होंने अपने बैंक खाते में लॉगिन करने की कोशिश की, तो वह असफल रहे। इस पर उन्होंने शाखा प्रबंधक से संपर्क किया, जिन्होंने यूजर आईडी में समस्या होने की बात कही।
अगले दिन उन्हें ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक दुकान पर बुलाया गया, जहां शाखा प्रबंधक और दोनों कर्मचारियों ने उनका मोबाइल अपने पास लेकर बैंक का मोबाइल ऐप डाउनलोड किया और लॉगिन करने की प्रक्रिया शुरू की। पीड़ित का आरोप है कि जैसे ही लॉगिन किया गया, उनके खाते में ₹4.47 लाख की नेगेटिव बैलेंस दिखने लगी।
रणजीत सिंह के अनुसार, बैंक कर्मचारियों ने इसे “सिस्टम की त्रुटि” बताते हुए शाम तक ठीक करने का आश्वासन दिया। हालांकि, स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई। उसी दिन शाम तक उनके खाते का बैलेंस बढ़कर ₹5.07 लाख माइनस हो गया, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में बैंक कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके खाते को साइबर शिकायत के चलते फ्रीज कर दिया गया है। पीड़ित का आरोप है कि यह सब एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया और धीरे-धीरे उनके खाते को 20 लाख रुपये से अधिक के माइनस में पहुंचा दिया गया।
मामले को अदालत में ले जाने के बाद कोर्ट ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए केस दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, डिजिटल लॉग और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
यह मामला बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक सुरक्षा और कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासतौर पर मोबाइल ऐप इंस्टॉलेशन, सिम बदलने और खाते तक पहुंच की प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर चिंता जताई जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या बैंक कर्मचारियों ने निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया या इसमें कोई व्यापक नेटवर्क शामिल है। फिलहाल मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर संकेत देती है कि वित्तीय संस्थानों को अपनी आंतरिक निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा, ताकि ग्राहकों का भरोसा कायम रखा जा सके और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
