नई दिल्ली। राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण नियमों को सख्ती से लागू किए जाने के बाद अब एक नया फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें फर्जी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) का बड़ा नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है। हाल ही में बिना वैध PUCC वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगाए जाने के बाद, अब ऐसे वाहन जो प्रदूषण जांच में फेल हो रहे हैं, उनके लिए हरियाणा स्थित कुछ केंद्रों के जरिए फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जा रहे हैं।
परिवहन संगठनों और शुरुआती शिकायतों के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण परीक्षण में फेल होने वाले वाहनों को दलालों के जरिए एक संगठित नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। यह पूरा खेल WhatsApp के माध्यम से चलाया जा रहा है, जिससे डिजिटल दुरुपयोग और सिस्टम में मौजूद खामियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, वाहन मालिक अपने नंबर प्लेट की तस्वीरें WhatsApp के जरिए दलालों को भेजते हैं। इसके बाद ये दलाल हरियाणा के कुछ PUC केंद्रों से संपर्क कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं। कई मामलों में असल वाहन की कोई फिजिकल जांच नहीं होती, बल्कि किसी अन्य वाहन की जांच के आधार पर प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है, जबकि रजिस्ट्रेशन विवरण मूल वाहन का ही रखा जाता है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में दूसरे वाहनों की फोटो और वीडियो का इस्तेमाल कर औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। इसके बाद PUCC प्रमाणपत्र को डिजिटल रूप से एडिट कर दिल्ली स्थित जांच केंद्र का उल्लेख कर दिया जाता है, जबकि वास्तविक प्रमाणपत्र जारी कहीं और से होता है। इस वजह से आम नागरिक और कई बार सिस्टम भी इस फर्जीवाड़े को पकड़ नहीं पाते।
दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने इस बढ़ते फर्जीवाड़े पर गंभीर चिंता जताई है। एसोसिएशन का दावा है कि पिछले एक महीने में ऐसे करीब 40 से 45 मामले सामने आ चुके हैं। इस संबंध में दिल्ली परिवहन विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और उपराज्यपाल को शिकायतें भेजी गई हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
एसोसिएशन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध प्रमाणपत्रों की प्रतियां भी जांच एजेंसियों को सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि राजधानी में वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को भी कमजोर कर सकता है, जो पहले से ही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा रैकेट तब सक्रिय होता है जब वाहन मालिक प्रदूषण जांच में फेल हो जाते हैं और वैध PUCC प्राप्त नहीं कर पाते। ऐसे वाहन मालिक दलालों से संपर्क करते हैं, जो सामान्य से दोगुनी रकम लेकर प्रमाणपत्र दिलाने का दावा करते हैं। इसके बाद हरियाणा के कुछ ऑपरेटरों को वाहन विवरण भेजा जाता है, जहां असली वाहन की जांच किए बिना किसी अन्य वाहन के आधार पर सर्टिफिकेट तैयार किया जाता है।
कुछ मामलों में PDF फाइल को एडिट कर जांच केंद्र की लोकेशन भी बदल दी जाती है, ताकि वह पूरी तरह वैध प्रतीत हो। बाद में ये फर्जी प्रमाणपत्र सरकारी वाहन पोर्टल पर भी अपलोड कर दिए जाते हैं, जिससे उनकी प्रामाणिकता और बढ़ जाती है।
पर्यावरण और परिवहन विशेषज्ञों ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह की गतिविधियां प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि उच्च प्रदूषण वाले वाहन फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे सड़क पर चलते रहे, तो वायु गुणवत्ता और भी खराब हो सकती है।
फिलहाल, प्रशासन इस नेटवर्क की गहन जांच में जुटा हुआ है। विभिन्न राज्यों के डेटा को क्रॉस-चेक कर गड़बड़ियों की पहचान की जा रही है। डिजिटल ऑडिट सिस्टम और जांच केंद्र कोड की निगरानी को और मजबूत किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच का विषय है कि क्या यह एक सीमित नेटवर्क है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है। आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई की संभावना है।
