व्हाट्सऐप पर .apk फाइल और संदिग्ध लिंक के जरिए फोन हैक; Future Crime Research Foundation ने जारी की चेतावनी

फेसबुक ट्रैवल स्कैम का शिकार बना बेंगलुरु का टेक प्रोफेशनल, ₹11.5 लाख की ठगी

Roopa
By Roopa
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बेंगलुरु में एक टेक प्रोफेशनल साइबर ठगी का शिकार हो गया, जहां फेसबुक पर दिखाए गए फर्जी ट्रैवल ऑफर के जरिए उससे करीब ₹11.5 लाख की ठगी कर ली गई। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क की एक और गंभीर मिसाल माना जा रहा है, जिसमें सस्ते अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल पैकेज के नाम पर लोगों को फंसाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित को फेसबुक पर एक स्पॉन्सर्ड विज्ञापन दिखा, जिसमें बेहद कम कीमत पर विदेश यात्रा पैकेज, होटल बुकिंग और फ्लाइट सुविधाओं का दावा किया गया था। कीमत सामान्य बाजार दर से काफी कम होने के कारण उसने इसे वास्तविक मान लिया और दिए गए संपर्क नंबर पर बातचीत शुरू कर दी।

आरोपियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित ट्रैवल एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित का भरोसा जीतने की कोशिश की। बातचीत के दौरान उन्हें आकर्षक ब्रोशर, यात्रा कार्यक्रम (itinerary) और फर्जी ग्राहक रिव्यू भी भेजे गए, जिससे भरोसा और मजबूत हो गया। इसके बाद जल्द बुकिंग का दबाव बनाया गया, यह कहते हुए कि यह ऑफर सीमित समय के लिए है।

इसके बाद ठगों ने अलग-अलग चरणों में पैसे की मांग शुरू कर दी। पहले बुकिंग चार्ज, फिर फ्लाइट और होटल कन्फर्मेशन फीस, उसके बाद टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर कई ट्रांजैक्शन कराए गए। इस तरह कुल मिलाकर पीड़ित से करीब ₹11.5 लाख विभिन्न बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के जरिए ट्रांसफर करवा लिए गए।

भुगतान पूरा होने के बाद जब पीड़ित ने बुकिंग कन्फर्मेशन मांगा, तो आरोपी लगातार टालमटोल करने लगे। कुछ समय बाद उनके मोबाइल नंबर बंद हो गए और फेसबुक पेज भी हटा दिया गया, जिससे पूरे फ्रॉड का खुलासा हुआ।

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इसके बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क हो सकता है, जो अलग-अलग राज्यों में फैले हुए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स और क्लोन ट्रैवल वेबसाइट्स के जरिए लोगों को निशाना बनाता है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधी तकनीकी हैकिंग से ज्यादा मनोवैज्ञानिक (psychological) तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। वे भरोसा बनाने के बाद धीरे-धीरे छोटे-छोटे भुगतान लेकर पीड़ित को बड़े नुकसान की ओर धकेल देते हैं। नकली इनवॉइस, प्रोफेशनल चैट सपोर्ट और डिजिटल रसीदें इस धोखाधड़ी को वास्तविक दिखाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने चेतावनी दी है कि ऐसे फ्रॉड अब तकनीक से ज्यादा सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित हैं। उनके अनुसार, अपराधी लोगों के भरोसे, जल्दबाजी और भावनात्मक फैसलों का फायदा उठाकर उन्हें भुगतान के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी ट्रैवल ऑफर को केवल आधिकारिक और रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म से ही सत्यापित करना चाहिए।

वहीं Future Crime Research Foundation ने भी इस तरह के मामलों में बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। संस्था के अनुसार, अब साइबर अपराधी AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें ऑटोमेटेड चैटबॉट, फर्जी AI-जेनरेटेड प्रोफाइल और नकली रिव्यू शामिल हैं, जिससे ऑफर पूरी तरह असली जैसा प्रतीत होता है।

फाउंडेशन ने इस ट्रेंड को “High-Trust Digital Fraud Model” बताया है और कहा है कि भविष्य में ऐसे स्कैम और अधिक जटिल और पहचान में मुश्किल हो सकते हैं। इसके लिए प्लेटफॉर्म स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग, रियल-टाइम विज्ञापन जांच और जागरूकता अभियान की जरूरत बताई गई है।

अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान विज्ञापन या सस्ते ट्रैवल ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी भुगतान से पहले कंपनी की वैधता, रजिस्ट्रेशन और आधिकारिक वेबसाइट की जांच करना बेहद जरूरी है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और साइबर क्राइम टीमें इस नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और संभावित अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच कर रही हैं।

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