कानपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कार्यरत IAS अधिकारी के पिता को ₹6.12 लाख की साइबर ठगी का शिकार बना लिया गया। यह घटना तब सामने आई जब बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन की जांच शुरू हुई और जांच की कड़ी धीरे-धीरे पीड़ित के घरेलू देखभाल से जुड़े लोगों तक पहुंच गई। मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि दो आरोपी अभी फरार हैं।
पीड़ित पारस नाथ सिंह, कानपुर के नौबस्ता क्षेत्र के निवासी हैं और आयु संबंधी कारणों से चलने-फिरने में असमर्थ बताए जाते हैं। वे दिल्ली में तैनात IAS अधिकारी राजीव सिंह के पिता हैं, जबकि उनके दूसरे पुत्र भारतीय रिजर्व बैंक में कार्यरत हैं। पुलिस के अनुसार, यह पूरा खेल भरोसे और नजदीकी संबंधों का फायदा उठाकर अंजाम दिया गया।
जांच की शुरुआत तब हुई जब एक युवक योगेश पनकी थाने पहुंचा और अपने बैंक खाते के फ्रीज होने की शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत ने पुलिस को संदिग्ध लेनदेन की परतें खोलने का मौका दिया। जांच में सामने आया कि योगेश के खाते में जो रकम आई थी, वह कई चरणों में ट्रांसफर होते हुए पारस नाथ सिंह के खाते से निकली थी।
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पुलिस जांच में पता चला कि पीड़ित की देखभाल के लिए पहले प्रियांशु नामक युवक को रखा गया था, जो बाद में काम छोड़कर चला गया। इसके बाद फतेहपुर निवासी राज ठाकुर को देखभाल की जिम्मेदारी दी गई। राज ठाकुर के साथ विशाल मिश्रा भी समय-समय पर देखभाल करता था और दोनों को बैंकिंग लेनदेन की भी जानकारी थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, राज ठाकुर ने पीड़ित के बैंक खातों का संचालन संभाला हुआ था, जबकि विशाल मिश्रा उसकी अनुपस्थिति में सहायता करता था। इसी दौरान सागर नामक व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई, जो कथित रूप से पूरे ट्रांजैक्शन नेटवर्क को मैनेज कर रहा था। सागर के संपर्क में योगेश, रोहित और आकाश जैसे लोग भी थे, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सागर ने कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया और इसके बदले करीब ₹10,000 कमीशन लिया। इस तरह पैसे को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर उसके मूल स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई, जिससे यह एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का मामला प्रतीत होता है।
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब बैंकिंग सिस्टम में संदिग्ध ट्रांजैक्शन को चिह्नित कर कुछ खातों को फ्रीज किया गया। इसके बाद साइबर सेल ने पैसे के पूरे फ्लो को ट्रेस किया और जांच की दिशा सीधे पीड़ित के खाते तक पहुंच गई। इसके बाद देखभाल से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें कई अहम खुलासे हुए।
पुलिस ने राज ठाकुर, विशाल मिश्रा और सागर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि दो अन्य आरोपी फरार हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक छोटे गिरोह तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है।
जांच एजेंसियां अब मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और डिजिटल चैट की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि पूरे षड्यंत्र का खुलासा किया जा सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना बनाया है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बुजुर्ग और निर्भर लोगों की वित्तीय सुरक्षा कितनी कमजोर है, खासकर तब जब उनके बैंकिंग कार्यों तक कई बाहरी लोगों की पहुंच हो। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सभी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और ठगी गई राशि की बरामदगी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
