कानपुर: गोविंद नगर में एक बड़े जीएसटी फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें 37.13 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। जांच में यह सामने आया कि मुरादाबाद निवासी फर्म संचालक अरविंद सिंह ने बोगस फर्म का पंजीकरण कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और कर देय राशि में गड़बड़ी की।
सहायक आयुक्त राज्यकर प्रभाकर कुमार चौधरी द्वारा दर्ज रिपोर्ट में बताया गया कि अरविंद सिंह ने संजय नगर, सीटीआई रोड के पते पर बीते साल 28 फरवरी को अपनी फर्म का पंजीकरण कराया। पंजीकरण के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 में फर्म ने लगभग 204 करोड़ रुपये की खरीद और 206 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई। इसके आधार पर 36.74 करोड़ रुपये का ITC लिया गया और 37.13 करोड़ रुपये कर देय दिखाया गया।
थाना प्रभारी रीकेश कुमार सिंह ने बताया कि फर्म के पंजीकरण में उपयोग किए गए दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। नगर निगम के रिकॉर्ड में पंजीकृत संपत्ति का असली मालिक कोई और निकला। इससे स्पष्ट हुआ कि पंजीकरण कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कराया गया और वास्तविक कारोबार मौजूद नहीं था।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के फ्रॉड का उद्देश्य केवल सरकारी खजाने से बड़ी रकम निकालना और नकली बिलिंग के माध्यम से ITC क्लेम करना होता है। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के पंजीकरण और वित्तीय विवरण पूरी तरह से कागजों तक सीमित थे और वास्तविक कारोबारी लेन-देन नहीं हुआ।
राज्यकर विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। रिपोर्ट दर्ज कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस और कर विभाग की संयुक्त टीम वर्तमान में अरविंद सिंह के संपत्तियों और लेन-देन की पड़ताल कर रही है ताकि फ्रॉड के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े पैमाने के GST फ्रॉड अब आम होते जा रहे हैं। अक्सर फर्जी कंपनियां केवल कागजी कारोबार दिखाकर ITC क्लेम करती हैं, जिससे लाखों या करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से गायब हो जाते हैं। ऐसे मामलों में पंजीकरण और वित्तीय विवरण की स्वतंत्र और सख्त जांच अत्यंत आवश्यक है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि फ्रॉड रोकने के लिए व्यापारिक संस्थाओं की पृष्ठभूमि और उनके वास्तविक कारोबार की प्रामाणिक जाँच पहले से होनी चाहिए। केवल कागजी दस्तावेजों पर भरोसा करना बड़े राजस्व घाटे का कारण बन सकता है।
इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी संदिग्ध फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है। इस तरह के फ्रॉड का खुलासा यह दर्शाता है कि कर प्रणाली और व्यापारिक व्यवहार में पारदर्शिता की कमी बड़े आर्थिक अपराधों को बढ़ावा देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला GST फ्रॉड की रोकथाम के लिए जागरूकता और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण है। सरकारी विभागों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी और संयुक्त जांच इस तरह के फ्रॉड को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
इस घटना ने व्यापार और कर प्रणाली में जवाबदेही और सख्त निगरानी की आवश्यकता को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोषियों को उचित कानूनी कार्रवाई के तहत सजा मिले और सरकारी खजाने की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
