कोलकाता: पश्चिम बंगाल पुलिस के साइबर क्राइम विंग ने मंगलवार को जाने-माने उद्योगपति पवन रूइया को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने शेल कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर धन शोधन और ऑनलाइन धोखाधड़ी की। रूइया को कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में एक होटल के पास से हिरासत में लिया गया।
पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज मामला के तहत हुई है। शुरुआती जांच में पता चला कि रूइया परिवार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से करीब ₹315 करोड़ की राशि शेल कंपनियों और उनके सहयोगियों के खातों में भेजी गई थी।
इस गिरफ्तारी से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने रूइया और उनके परिवार को मिली अंतरिम सुरक्षा को रद्द कर दिया था, जिससे पुलिस की कार्रवाई के लिए रास्ता साफ हो गया। पिछले दिसंबर में कोर्ट ने पवन रूइया, उनके पुत्र राघव और बेटी पल्लवी को अग्रिम जमानत दी थी, जिन पर आरोप था कि उन्होंने देशभर से ऑनलाइन धोखाधड़ी के माध्यम से जुटाई गई राशि अपने खातों में जमा की थी।
जांच में सामने आया कि यह मामला एक वरिष्ठ नागरिक को लगभग ₹93 लाख के निवेश के झांसे में फंसाने और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए धोखा देने से जुड़ा है। रकम को शेल कंपनियों के माध्यम से कई खातों में स्थानांतरित किया गया।
साइबर क्राइम विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “जांच से पता चला कि यह पूरे देश में फैलाव रखने वाला एक बड़ा अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड रैकेट है। आरोपी और उनके सहयोगियों ने कई बैंकिंग चैनलों और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करके धन को विदेशों में भेजा और लॉन्ड्रिंग की।”
राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, रूइया और उनके नेटवर्क के खिलाफ देशभर में कम से कम 1,379 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हैं। इनमें से पश्चिम बंगाल से 100 से अधिक शिकायतें मिली हैं।
इस मामले में पहले दिल्ली एयरपोर्ट से राहुल वर्मा को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। वह कथित रूप से देश छोड़कर भागने का प्रयास कर रहा था और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। इसके बाद बराकपुर साइबर क्राइम थाने में इस धोखाधड़ी के बड़े नेटवर्क की जांच के लिए अलग से मामला दर्ज किया गया।
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पुलिस के मुताबिक, इस गिरफ्तारी से जांच में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि अब अधिकारियों के पास आरोपी के वित्तीय लेन-देन और सहयोगियों के खातों तक सीधे पहुंच है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े पैमाने के फ्रॉड में अक्सर सामाजिक इंजीनियरिंग और डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रकम को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए layered banking और cryptocurrencies का इस्तेमाल करके पैसा आसानी से विदेशों में भेजा जा सकता है।
रूइया को बुधवार को बिधाननगर ACJM कोर्ट में पेश किया जाएगा। अदालत में पेशी के दौरान पुलिस मामले की पूरी जानकारी और ट्रांजेक्शन डेटा प्रस्तुत करेगी, जिससे यह तय होगा कि आगे अग्रिम जमानत या रिमांड की कार्रवाई होगी।
इस गिरफ्तारी से स्पष्ट संकेत मिलता है कि पुलिस देशभर में फैल रहे बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट पर सख्त कार्रवाई कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम जनता को निवेश और ऑनलाइन लेन-देन में सतर्क रहना चाहिए और केवल मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
जांच अधिकारियों का अनुमान है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सहयोगियों की पहचान और गिरफ्तारी जल्द ही हो सकती है। साथ ही, पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी ने इन शेल कंपनियों या संदिग्ध क्रिप्टो लेन-देन के माध्यम से धोखाधड़ी का सामना किया है तो वह NCRP पोर्टल या नजदीकी साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराए।
