नोएडा के सेक्टर 76 से गिरफ्तार चार आरोपियों पर फर्जी टेक सपोर्ट एजेंट बनकर विदेशी नागरिकों को ठगने और रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का आरोप है।

‘रिव्यू टास्क से शुरू, लाखों की ठगी पर खत्म’: वर्क-फ्रॉम-होम स्कैम में युवक से ₹7.44 लाख की ठगी

Team The420
5 Min Read

चंडीगढ़। ऑनलाइन वर्क-फ्रॉम-होम जॉब के नाम पर साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक को करीब ₹7.44 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। फर्जी टास्क और निवेश के झांसे में फंसाकर साइबर ठगों ने धीरे-धीरे उसकी पूरी रकम हड़प ली। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि उसे नवंबर 2024 में अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संदेश मिलने शुरू हुए, जिनमें घर बैठे पार्ट-टाइम काम करने का ऑफर दिया गया था। शुरुआत में उसे बेहद आसान टास्क दिए गए, जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रिव्यू पोस्ट करना। इन छोटे-छोटे कामों के बदले उसे मामूली भुगतान भी किया गया, जिससे उसका भरोसा जीत लिया गया।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

कुछ टास्क पूरा करने के बाद उसे ₹300 का भुगतान किया गया। इसके बाद उसे एक टेलीग्राम ग्रुप “VVIP Webbull” में जोड़ा गया, जहां उसे बताया गया कि वह निवेश करके कुछ ही मिनटों में अच्छा मुनाफा कमा सकता है। यहीं से ठगी का असली खेल शुरू हुआ।

शिकायत के मुताबिक, आरोपी लगातार उसे अलग-अलग ‘टास्क’ और ‘इंवेस्टमेंट प्लान’ में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करते रहे। हर बार उसे भरोसा दिलाया जाता था कि कुछ ही समय में रकम के साथ मुनाफा भी वापस मिल जाएगा। इसी लालच और भरोसे में आकर पीड़ित ने कई किश्तों में अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए।

करीब दो महीने के दौरान उसने Axis Bank, HDFC Bank, RBL Bank और Punjab National Bank समेत कई बैंकों के खातों में कुल ₹7,44,824 ट्रांसफर किए। ठगों ने लेन-देन को विश्वसनीय दिखाने के लिए हर बार नई जानकारी और निर्देश दिए, जिससे पीड़ित को शक न हो।

आरोपियों ने पीड़ित के लिए एक फर्जी वेबसाइट पर लॉगिन अकाउंट भी बना दिया, जहां उसे उसकी ‘कमाई’ और ‘रिटर्न’ दिखाए जाते थे। लेकिन जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उसे बताया गया कि उसका अकाउंट ‘फ्रीज’ हो गया है। इसे अनफ्रीज करने के लिए उससे अतिरिक्त ₹2.5 लाख जमा करने को कहा गया।

पीड़ित ने यह रकम भी जमा कर दी, लेकिन इसके बाद भी उसे पैसे नहीं मिले। इसके बजाय ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर और रकम की मांग शुरू कर दी। कभी ‘लो क्रेडिट स्कोर’ तो कभी ‘सिस्टम एरर’ का हवाला देकर उसे और भुगतान करने के लिए दबाव बनाया गया।

आखिरकार जब पीड़ित को शक हुआ और उसने पैसे निकालने पर जोर दिया, तो ठगों ने उससे संपर्क तोड़ दिया। टेलीग्राम ग्रुप डिलीट कर दिए गए और सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए। इसके बाद उसने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इस तरह के मामलों में ठग पहले छोटे-छोटे भुगतान कर भरोसा जीतते हैं और फिर बड़े निवेश के नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्क-फ्रॉम-होम और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर चल रहे ऐसे स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं और उन्हें त्वरित मुनाफे का लालच देते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि ऑनलाइन जॉब या निवेश से जुड़े किसी भी ऑफर पर आंख बंद कर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। खासतौर पर जब शुरुआत में मामूली रकम देकर भरोसा जीतने की कोशिश की जाए, तो सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित बैंक खातों व डिजिटल ट्रेल के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

 

हमसे जुड़ें

Share This Article