दिल्ली में फ्लैट डील के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले आरोपी राहुल पासवान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके बहु-शहरी प्रॉपर्टी फ्रॉड नेटवर्क की जांच कर रही है।

‘फर्जी डील, असली ठगी’: लाखों की धोखाधड़ी करने वाला आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में प्रॉपर्टी निवेश के नाम पर ठगी करने वाले एक वांछित आरोपी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। कई मामलों में फरार चल रहे इस आरोपी की पहचान राहुल पासवान के रूप में हुई है, जो लोगों को फ्लैट और संपत्ति दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करता था। वह लक्ष्मी नगर क्षेत्र के एक मामले में घोषित भगोड़ा भी था और उसके खिलाफ विभिन्न शहरों में शिकायतें दर्ज थीं।

जांच के अनुसार, आरोपी को कश्मीरी गेट इलाके से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह शहर छोड़ने की कोशिश कर रहा था। विशेष इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में टीम ने पहले आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी और फिर मौके पर दबोच लिया। गिरफ्तारी से पहले उसकी मूवमेंट पर लगातार निगरानी की जा रही थी, ताकि उसे बिना किसी जोखिम के पकड़ा जा सके।

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मामले के रिकॉर्ड के मुताबिक, राहुल पासवान को 3 फरवरी 2023 को लक्ष्मी नगर थाने में दर्ज एक धोखाधड़ी केस में भगोड़ा घोषित किया गया था। यह मामला अप्रैल 2022 में दर्ज हुआ था, जिसमें उसके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े प्रावधान लगाए गए थे। इसके अलावा, उसके खिलाफ अन्य कई मामलों में भी संलिप्तता सामने आई है।

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी खुद को प्रॉपर्टी डीलर बताकर लोगों से संपर्क करता था। वह संभावित खरीदारों और विक्रेताओं को भरोसे में लेकर उन्हें फ्लैट या अन्य संपत्तियां दिखाता और शुरुआती भुगतान के तौर पर मोटी रकम वसूल करता था। इसके बाद वह अचानक संपर्क तोड़ देता और फरार हो जाता, जिससे पीड़ितों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ लक्ष्मी नगर क्षेत्र में तीन अलग-अलग धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी उसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उसका नेटवर्क एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने अलग-अलग जगहों पर लोगों को निशाना बनाया।

आरोपी पिछले एक साल से हरियाणा के फरीदाबाद में छिपकर रह रहा था और लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, ताकि गिरफ्तारी से बच सके। हालांकि, तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उसकी लोकेशन का पता लगाया गया और उसे काबू में किया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में आरोपी अक्सर पेशेवर अंदाज में काम करते हैं। वे खुद को वैध ब्रोकर या डीलर के रूप में पेश करते हैं और लोगों को आकर्षक ऑफर देकर फंसाते हैं। एक बार भरोसा बन जाने के बाद वे बड़ी रकम लेकर फरार हो जाते हैं, जिससे पीड़ितों को कानूनी प्रक्रिया में लंबा संघर्ष करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रॉपर्टी निवेश से जुड़े ऐसे धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए आरोपी आसानी से लोगों तक पहुंच बना लेते हैं और उन्हें कम समय में ज्यादा लाभ का लालच देकर फंसा लेते हैं। ऐसे में निवेश करने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच और सत्यापन करना बेहद जरूरी हो जाता है।

यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि बिना पूरी जांच के किसी भी प्रॉपर्टी डील में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर जब डील जल्दी फाइनल करने का दबाव बनाया जाए या पूरी जानकारी साझा न की जाए, तो सतर्क रहना आवश्यक है।

फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उससे जुड़े अन्य मामलों और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस ठगी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल थे और कुल कितनी रकम की धोखाधड़ी की गई।

इस गिरफ्तारी से उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य पीड़ितों को भी न्याय मिलेगा और प्रॉपर्टी निवेश के नाम पर सक्रिय ऐसे संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।

 

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