बेंगलुरु। क्रिप्टोकरेंसी के जरिए करीब ₹5,000 करोड़ के कथित अनधिकृत सीमा-पार वित्तीय लेनदेन की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बेंगलुरु की एक कंपनी से जुड़े चार ठिकानों पर तलाशी ली। मंगलवार को की गई इस कार्रवाई में बेंगलुरु स्थित तीन और मध्य प्रदेश में एक स्थान शामिल है। जांच के दायरे में RPFAS Technologies Private Limited है, जो Mudrex और Saber.money नाम से क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े प्लेटफॉर्म संचालित करती है।
ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 37 के तहत ये तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी को कंपनी के खिलाफ बड़े पैमाने पर कथित उल्लंघनों की शिकायतें मिली थीं। प्रारंभिक पूछताछ और खुफिया जानकारी जुटाने के दौरान ऐसे संकेत मिले कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल अधिकृत बैंकिंग और विदेशी धन प्रेषण माध्यमों को दरकिनार कर एक देश से दूसरे देश में रकम भेजने के लिए किया जा सकता है।
जांच एजेंसी को विशेष रूप से USDT और USDC जैसे स्टेबलकॉइन के इस्तेमाल पर संदेह है। स्टेबलकॉइन ऐसी क्रिप्टोकरेंसी होती हैं, जिनका मूल्य सामान्यतः अमेरिकी डॉलर जैसी पारंपरिक मुद्रा से जुड़ा रहता है। ईडी को आशंका है कि इनके जरिए सीमा-पार धन हस्तांतरण किया गया और इस प्रक्रिया में फेमा के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ। एजेंसी यह पता लगा रही है कि संबंधित लेनदेन किस उद्देश्य से किए गए और क्या इनके लिए जरूरी नियामकीय अनुमति ली गई थी।
टैक्स हेवन देशों में शेल कंपनियों के इस्तेमाल की जांच
ईडी की प्रारंभिक जांच में टैक्स हेवन माने जाने वाले देशों और अधिकार क्षेत्रों में कथित शेल कंपनियों के इस्तेमाल के संकेत भी मिले हैं। एजेंसी बड़े पैमाने पर ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। ओटीसी कारोबार में क्रिप्टो संपत्तियों की खरीद-बिक्री सीधे पक्षों के बीच या विशेष डीलरों के माध्यम से होती है। ऐसे लेनदेन सामान्य एक्सचेंज ट्रेडिंग से अलग तरीके से किए जा सकते हैं।
जांच में Binance और Bybit जैसे विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित तौर पर विदेशी भुगतान किए जाने की आशंका भी शामिल है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इन प्लेटफॉर्म पर किए गए लेनदेन का संबंध बेंगलुरु की कंपनी से किस तरह था और क्या इनके जरिए भारतीय ग्राहकों या संस्थाओं की रकम विदेश भेजी गई।
एजेंसी के मुताबिक, संबंधित कंपनी पर ऐसे क्रिप्टो आधारित भुगतान और धन हस्तांतरण सेवाओं का विज्ञापन करने के आरोपों की भी जांच हो रही है, जिनके जरिए तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रकम भेजने की सुविधा देने का दावा किया गया। ईडी यह भी जांच रही है कि क्या कंपनी के पास इस तरह की भुगतान प्रणाली संचालित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की आवश्यक अनुमति थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कंपनी को ऐसी भुगतान प्रणाली चलाने के लिए आरबीआई से अधिकृत नहीं पाया गया है।
रुपये को क्रिप्टो में बदलने से लेकर बैंक खाते में निकासी तक जांच
जांच का एक प्रमुख हिस्सा कंपनी के ऑन-रैंप और ऑफ-रैंप सेवाओं से जुड़ा है। ऑन-रैंप सेवा के तहत उपयोगकर्ता भारतीय रुपये, अमेरिकी डॉलर या यूरो जैसी पारंपरिक मुद्राओं को क्रिप्टोकरेंसी में बदल सकते हैं। इसके विपरीत, ऑफ-रैंप सेवा के जरिए क्रिप्टो संपत्तियों को बेचकर प्राप्त रकम बैंक खाते में निकाली जा सकती है।
ईडी यह पता लगा रही है कि इन दोनों सुविधाओं का इस्तेमाल अधिकृत बैंकिंग और विदेशी धन प्रेषण चैनलों से बाहर रकम को एक देश से दूसरे देश में भेजने के लिए तो नहीं किया गया। एजेंसी के संदेह के मुताबिक, यदि इन सेवाओं के जरिए बिना जरूरी अनुमति और नियामकीय अनुपालन के अंतरराष्ट्रीय भुगतान किए गए, तो यह फेमा के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है।
तलाशी के दौरान जुटाई गई जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर लेनदेन की प्रकृति, धन के स्रोत, लाभार्थियों और विदेशी खातों तक रकम पहुंचने के रास्तों की पड़ताल की जाएगी। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि करीब ₹5,000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन में कंपनी की भूमिका क्या थी और क्या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से अधिकृत वित्तीय व्यवस्था से बाहर धन का हस्तांतरण किया गया। फिलहाल एजेंसी की जांच जारी है और तलाशी से जुड़े निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
