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उरई की एमडी ड्रग्स फैक्टरी के पीछे मुंबई से फंडिंग, कानपुर के रिजवान पर सप्लाई नेटवर्क का संदेह

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By Roopa
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कानपुर/उरई। जालौन के उरई में गुलाब जल बनाने की आड़ में संचालित हो रही मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स फैक्टरी के खुलासे के बाद जांच का दायरा कानपुर से मुंबई और महाराष्ट्र के सांगली तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस अवैध कारोबार के पीछे करोड़ों रुपये की फंडिंग करने वाला मुंबई का ख्यालुद्दीन और ड्रग्स की सप्लाई का नेटवर्क संभालने वाला कानपुर का रिजवान अहम कड़ी हैं। फैक्टरी में इस्तेमाल होने वाले पांच प्रकार के केमिकल कानपुर से खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इनपुट मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने केमिकल सप्लायरों और संभावित नेटवर्क की पड़ताल शुरू कर दी है। उधर, फैक्टरी के संचालन की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं होने और उसकी कथित लापरवाही के मामले में एक दरोगा और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है।

गुरुवार को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की संयुक्त टीम ने डकोर थाना क्षेत्र के ऐरी-रमपुरा गांव में छापा मारकर इस फैक्टरी का भंडाफोड़ किया था। यहां गुलाब जल बनाने की फैक्टरी की आड़ में एमडी ड्रग्स तैयार की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान संतोष गावड़े और हेमंत कुशवाहा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। जांच में मुख्य आरोपी के रूप में शैलेंद्र पाल का नाम सामने आया है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

मुंबई से हो रही थी फैक्टरी के लिए फंडिंग

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के जिस कथित ड्रग्स नेटवर्क से संतोष गावड़े के संबंध सामने आए हैं, उसमें ख्यालुद्दीन नाम के व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि वही उरई में फैक्टरी स्थापित करने और उसे संचालित करने के लिए मोटी रकम उपलब्ध करा रहा था। बताया जा रहा है कि ख्यालुद्दीन ने कम समय में करोड़ों रुपये का ड्रग्स कारोबार खड़ा किया है। हालांकि, महाराष्ट्र पुलिस के उपलब्ध रिकॉर्ड में उसका नाम अब तक सामने नहीं आने की बात भी जांच से जुड़े सूत्रों ने कही है। एजेंसियां उसके वित्तीय लेनदेन और गिरफ्तार आरोपियों से संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

कानपुर के रिजवान तक पहुंची सप्लाई चेन

पूछताछ और शुरुआती जांच में कानपुर के रिजवान का नाम भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, ड्रग्स तैयार होने के बाद उसकी सप्लाई के लिए रिजवान से जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि तैयार एमडी ड्रग्स को किन लोगों तक पहुंचाया जाता था और इसके वितरण के लिए किन शहरों में संपर्क बनाए गए थे। रिजवान की भूमिका और ख्यालुद्दीन से उसके कथित संबंधों की भी जांच की जा रही है।

कानपुर से खरीदे गए पांच तरह के केमिकल

जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी फैक्टरी में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों की खरीद से जुड़ी मिली है। एजेंसियों से साझा किए गए इनपुट के मुताबिक, सल्फ्यूरिक एसिड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, टॉल्विन और सोडियम कार्बोनेट कानपुर से खरीदे गए थे। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इनकी खरीद में रिजवान ने मदद की थी या इसके लिए अलग से कोई आपूर्ति नेटवर्क सक्रिय था।

जांच एजेंसियां कानपुर में इन रसायनों के बड़े कारोबारियों और औद्योगिक सप्लायरों की जानकारी जुटा रही हैं। ये रसायन विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में भी इस्तेमाल होते हैं, इसलिए उनकी खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

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छोटे ड्रमों में कार से पहुंचाया जाता था कच्चा माल

जांच में यह भी पता चला है कि कानपुर के एक व्यापारी के माध्यम से कच्चा माल छोटे-छोटे ड्रमों में भरकर कार से रमपुरा पहुंचाया जाता था। परिवहन का यह तरीका कथित तौर पर इसलिए अपनाया गया था, ताकि बड़ी खेप की तरह किसी की नजर न पड़े। एजेंसियां संबंधित व्यापारी की पहचान और उसकी कारोबारी गतिविधियों की जांच कर रही हैं।

फैकरी के संचालन में शामिल तीनों मुख्य आरोपियों शैलेंद्र पाल, हेमंत और संतोष गावड़े की गतिविधियां भी जांच के घेरे में हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, आरोपी दिन में फैक्टरी बंद रखते थे और रात के अंधेरे में वहां आते-जाते थे। उनके इस्तेमाल वाले वाहनों पर नंबर प्लेट भी नहीं होती थी। इससे उनकी पहचान और वाहनों की आवाजाही का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। संतोष गावड़े के इंजीनियर होने की जानकारी भी सामने आई है।

मोबाइल और सोशल मीडिया से खुलेगा नेटवर्क

डीआरआई और एटीएस गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन तथा सोशल मीडिया अकाउंट की जांच कर रही हैं। एजेंसियों को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों से केमिकल उपलब्ध कराने वाले लोगों, परिवहन व्यवस्था संभालने वालों और ड्रग्स की सप्लाई से जुड़े अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सकेगा। फरार आरोपी शैलेंद्र पाल का मोबाइल फोन बंद बताया जा रहा है। उसकी तलाश के साथ उसके संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

फैक्टरी की ओपनिंग पार्टी में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी का आरोप

इस मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गुलाब जल फैक्टरी के नाम पर शैलेंद्र पाल ने जब परिसर की शुरुआत की थी, तब आयोजित दावत में डकोर थाने के कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हुए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, शैलेंद्र ने पड़ोस में स्थित गौशाला से बिजली और पानी की व्यवस्था कर रखी थी, ताकि नए कनेक्शन के लिए आवेदन करने पर फैक्टरी की गतिविधियां संदेह के घेरे में न आएं। यह भी आरोप है कि शैलेंद्र पहले उरई में जुआ खिलवाने के धंधे से जुड़ा था और भाई से विवाद के बाद ऐरी-रमपुरा लौटकर उसने गुलाब जल की आड़ में ड्रग्स का कारोबार शुरू किया।

दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित

फैक्टरी का लंबे समय तक संचालन होने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं मिलने के मामले में पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई की है। हल्का चौकी प्रभारी दरोगा प्रेम पाल सिंह और दो सिपाहियों राजेश वर्मा तथा अंकित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। तीनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मी क्षेत्र में नियमित रूप से आते-जाते थे, लेकिन रात में संदिग्ध वाहनों की आवाजाही और फैक्टरी की गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया गया। पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशन सोनी के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर पुलिस से लापरवाही हुई है। इसी आधार पर तीनों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि इतनी बड़ी अवैध फैक्टरी लंबे समय तक कैसे संचालित होती रही और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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