बुधवार सुबह यूट्यूब की सेवाएं वैश्विक स्तर पर प्रभावित रहीं, जिससे कई देशों में यूज़र वीडियो देखने, लॉग-इन करने और होम फीड लोड करने में असमर्थ रहे। रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर पर भारत, अमेरिका और ब्रिटेन से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं।
आउटेज डेटा के मुताबिक अकेले अमेरिका में 3.2 लाख से अधिक यूज़र्स ने समस्या की रिपोर्ट की, जबकि सुबह के एक घंटे के भीतर करीब 20,000 शिकायतें दर्ज हुईं। अधिकांश यूज़र्स को मोबाइल ऐप में दिक्कत आई, जबकि कई लोगों ने वीडियो स्ट्रीमिंग और अकाउंट साइन-इन में भी परेशानी बताई।
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कई यूज़र्स को ऐप या वेबसाइट खोलने पर “Something went wrong” संदेश दिखाई दिया। कुछ मामलों में यूट्यूब का इंटरफेस आंशिक रूप से लोड हुआ—साइडबार और सर्च बार दिखे, लेकिन वीडियो थंबनेल, रिकमेंडेशन और चैनल पेज लोड नहीं हुए। विशेषज्ञों के अनुसार यह पैटर्न आमतौर पर बैकएंड या कंटेंट डिलीवरी सिस्टम में गड़बड़ी का संकेत होता है, न कि डिवाइस या इंटरनेट कनेक्शन की समस्या का।
सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने ब्लैंक होमपेज और लॉग-इन एरर के स्क्रीनशॉट साझा किए। कई लोगों ने बताया कि फोन रीस्टार्ट करने या ऐप रीइंस्टॉल करने के बाद भी समस्या बनी रही, जिससे स्पष्ट हुआ कि दिक्कत सर्वर-साइड थी।
यूट्यूब ने संक्षिप्त बयान जारी कर कहा कि वह समस्या की जांच कर रहा है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हालांकि कंपनी ने आउटेज का कारण नहीं बताया और न ही सेवाएं पूरी तरह बहाल होने की समयसीमा दी।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की बड़े पैमाने की गड़बड़ी अक्सर बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटाबेस या कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN) में खराबी से जुड़ी होती है। जब यूज़र फीड या ऑथेंटिकेशन से जुड़े कोर सिस्टम प्रभावित होते हैं, तो प्लेटफॉर्म का ढांचा लोड हो जाता है लेकिन कंटेंट दिखाई नहीं देता।
इस आउटेज का असर उन यूज़र्स पर ज्यादा पड़ा जो काम, पढ़ाई और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए यूट्यूब पर निर्भर हैं। कंटेंट क्रिएटर्स ने डैशबोर्ड एक्सेस और वीडियो अपलोड में दिक्कत बताई, जबकि दर्शक तय समय पर होने वाले लाइव सेशन नहीं देख सके।
भारत में यह समस्या सुबह के पीक यूसेज टाइम पर सामने आई, जिससे छात्रों, प्रोफेशनल्स और न्यूज़ कंज्यूमर्स को परेशानी हुई। स्मार्ट टीवी यूज़र्स ने भी लॉग-इन और अकाउंट सिंक न होने की शिकायत की।
हाल के महीनों में यह यूट्यूब की सबसे व्यापक गड़बड़ियों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि एक साथ कई क्षेत्रों और डिवाइसों पर असर देखा गया। हालांकि बाद में कुछ यूज़र्स के लिए आंशिक सेवाएं बहाल हुईं, लेकिन कई जगह इंटरमिटेंट लोडिंग की समस्या बनी रही।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर वाले प्लेटफॉर्म में सेवाएं चरणबद्ध तरीके से बहाल होती हैं। यदि समस्या डेटा रूटिंग या लॉग-इन सिस्टम से जुड़ी हो, तो रिकवरी में सामान्य सर्वर आउटेज से अधिक समय लग सकता है।
कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि गड़बड़ी तकनीकी खराबी, सॉफ्टवेयर अपडेट फेल होने या नेटवर्क-स्तर की समस्या से जुड़ी थी। अब तक किसी साइबर हमले या सुरक्षा उल्लंघन के संकेत नहीं मिले हैं।
यूज़र्स को सलाह दी गई है कि ऐसे आउटेज के दौरान बार-बार लॉग-इन की कोशिश या ऐप को बार-बार इंस्टॉल न करें, क्योंकि इससे समस्या हल नहीं होती और अकाउंट अस्थायी रूप से लॉक हो सकता है।
कंपनी की ओर से मूल कारण की पहचान और सिस्टम स्थिर होने के बाद विस्तृत अपडेट जारी किए जाने की उम्मीद है।
