WAPCOS पंकज दुबे+4 पकड़े—ठेका रेटकार्ड से ₹10L घूस।

₹10 लाख की रिश्वत लेते WAPCOS प्रोजेक्ट मैनेजर गिरफ्तार, ठेकों में चला ‘कमीशन रैकेट’

Team The420
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सरकारी उपक्रम वाप्कोस लिमिटेड के परियोजना प्रबंधक पंकज दुबे को ठेका दिलाने के बदले ₹10 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में ठेकेदार बबलू सिंह यादव समेत कुल पांच आरोपियों को पकड़ा गया। एजेंसी ने लखनऊ, गाजीपुर, देवरिया और भुवनेश्वर में एक साथ छापेमारी कर कथित घूसखोरी के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

जांच के मुताबिक ओडिशा के रायगढ़ा में इमली प्रसंस्करण इकाई के निर्माण के लिए लगभग ₹11.81 करोड़ का ठेका दिलाने के बदले कमीशन की डील हुई थी। आरोप है कि कुल ठेका राशि का करीब 13 प्रतिशत रिश्वत के रूप में तय किया गया था। इसी सौदे के तहत ₹25 लाख की नकद रकम गाजीपुर से लखनऊ लाई गई थी, जिसे परियोजना प्रबंधक के करीबी को सौंपा जाना था।

सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा ने इस मामले में आठ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। गिरफ्तार आरोपियों में चालक शुभम कुमार पाल, राजेश कुमार सिंह और राहुल वर्मा शामिल हैं, जो कथित तौर पर नकदी के परिवहन और वितरण में भूमिका निभा रहे थे। एजेंसी के अनुसार ठेका हासिल करने के लिए ठेकेदार और अधिकारियों के बीच पहले से तय कमीशन व्यवस्था लागू थी और रकम चरणबद्ध तरीके से ली जाती थी।

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देवरिया में निवेश का खुलासा

जांच में सामने आया कि आरोपी परियोजना प्रबंधक का भाई पवन दुबे कथित काली कमाई को देवरिया में जमीन खरीद और निर्माण कार्यों में लगा रहा था। तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो आय से अधिक संपत्ति की ओर इशारा करते हैं। राहुल वर्मा पर नकद लेनदेन का प्रबंधन और ठेकेदारों से वसूली कराने का आरोप है, जबकि बिचौलिया गोपाल मिश्रा कथित तौर पर ठेकेदारों से संपर्क साधता था।

सूत्रों के अनुसार ठेकों में रिश्वत वसूली के लिए बाकायदा ‘रेट कार्ड’ तय था—निविदा दिलाने के लिए 4 से 6 प्रतिशत, स्वीकृति पत्र (एलओए) जारी कराने के लिए 4 प्रतिशत और बिल पास कराने के लिए 3 प्रतिशत। अभिषेक ठाकुर नामक सहयोगी ठेकेदारों से सीधे सौदेबाजी करता था और अन्य आरोपी रकम की वसूली व वितरण में लगे रहते थे।

हवाला एंगल की भी जांच

छापेमारी के दौरान एजेंसी को नकदी के अलावा लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और एक संकेतक नोट मिला है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि बड़ी रकम हवाला के जरिए भी स्थानांतरित की जाती थी। वित्तीय ट्रेल खंगालने के लिए बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई

लखनऊ स्थित चार परिसरों के अलावा गाजीपुर और देवरिया में आवासीय ठिकानों तथा भुवनेश्वर में कार्यालय और अन्य स्थानों पर तलाशी ली गई। एजेंसी आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही है और आय के ज्ञात स्रोतों से तुलना की जा रही है। प्रारंभिक जांच में अन्य ठेकों में भी इसी तरह की वसूली के संकेत मिले हैं, जिससे मामला आय से अधिक संपत्ति और आपराधिक साजिश की धाराओं तक बढ़ सकता है।

गिरफ्तार आरोपियों को विशेष अदालत में पेश कर रिमांड मांगा जाएगा। एजेंसी का कहना है कि नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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