शीर्ष अदालत ने विवाद को ‘व्यावसायिक लेनदेन’ बताया, पक्षों को मध्यस्थता का निर्देश

₹30 करोड़ धोखाधड़ी मामला: सुप्रीम कोर्ट से विक्रम भट्ट और पत्नी को जमानत

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By Roopa
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मुंबई/उदयपुर: फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को कथित ₹30 करोड़ धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामला मुख्य रूप से व्यावसायिक लेनदेन से जुड़ा प्रतीत होता है और दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाना चाहिए। साथ ही अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने कहा कि जमानत इस उम्मीद के साथ दी जा रही है कि दोनों पक्ष भुगतान विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास करेंगे। अदालत ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में उपस्थित होकर समझौते की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया।

दोनों को पिछले वर्ष 7 दिसंबर को मुंबई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई उदयपुर के एक चिकित्सक की शिकायत पर हुई थी, जिन्होंने फिल्म बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगाया था। गिरफ्तारी के बाद दोनों को राजस्थान ले जाया गया, जहां इस मामले में एफआईआर दर्ज है।

इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी और एक अन्य आरोपी की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जांच प्रारंभिक चरण में है और इस समय रिहाई उचित नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि मामला व्यावसायिक प्रकृति का है और मध्यस्थता के जरिए समाधान संभव है।

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मामले की शुरुआत नवंबर में उदयपुर में दर्ज एफआईआर से हुई, जिसमें आठ लोगों को नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्दिया, जो इंदिरा आईवीएफ अस्पताल के संचालक हैं, ने आरोप लगाया कि उन्हें फिल्म परियोजना में निवेश करने के लिए बड़े मुनाफे का लालच दिया गया। उनके अनुसार, एक बायोपिक बनाने के लिए उन्होंने एक मध्यस्थ के जरिए विक्रम भट्ट से मुलाकात की थी।

शिकायत में कहा गया है कि करीब ₹7 करोड़ के निवेश से चार फिल्में बनाने और ₹100 से ₹200 करोड़ तक की संभावित कमाई का आश्वासन दिया गया था। आरोप है कि रकम ट्रांसफर करने के बाद परियोजना आगे नहीं बढ़ी। यह भी दावा किया गया कि विक्रम भट्ट ने अपनी पत्नी और बेटी को परियोजना से जुड़े एक फर्म के माध्यम से शामिल बताया था, जो श्वेतांबरी भट्ट के नाम पर पंजीकृत है।

राजस्थान पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत दिए जाने से मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी।

पिछले सप्ताह अदालत ने श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत दी थी और हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया था। अब दोनों को नियमित जमानत मिलने के बाद मामला मध्यस्थता प्रक्रिया और चल रही जांच पर केंद्रित रहेगा।

यह फैसला दंपति के लिए राहत जरूर है, लेकिन आपराधिक मामला और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप अब भी जांच के दायरे में हैं।

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