निचली अदालत का फैसला पलटा; उत्पाद उत्तरदायित्व कानून के तहत पीड़ित परिवारों को कार्रवाई की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट का झटका: ‘जहर’ बिक्री केस में अमेजन को झेलना होगा मुकदमा

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By Roopa
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वॉशिंगटन: ऑनलाइन रिटेल दिग्गज अमेजन को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया है कि प्लेटफॉर्म को उन परिवारों द्वारा दायर मुकदमों का सामना करना होगा, जिनके परिजनों ने वेबसाइट से खरीदे गए ‘सोडियम नाइट्राइट’ का सेवन कर आत्महत्या कर ली थी। अदालत ने निचली अदालत के उस निर्णय को पलट दिया, जिसमें आत्महत्या को स्वतंत्र कारण मानते हुए अमेजन को लापरवाही के आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।

इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार वॉशिंगटन राज्य के उत्पाद उत्तरदायित्व कानून के तहत अपनी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा सकेंगे। यह मामला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और खतरनाक उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र में ले आया है।

मामले में चार परिवारों ने आरोप लगाया है कि अमेजन ने न केवल सोडियम नाइट्राइट की बिक्री की अनुमति दी, बल्कि अपने एल्गोरिदम के जरिए ऐसे अन्य उत्पाद भी सुझाए जो आत्महत्या में इस्तेमाल हो सकते थे। परिवारों का कहना है कि प्लेटफॉर्म की सिफारिश प्रणाली ने इन उत्पादों को एक साथ दिखाकर जोखिम को बढ़ाया, जो लापरवाही की श्रेणी में आता है।

सोडियम नाइट्राइट एक रासायनिक पदार्थ है, जिसका उपयोग खाद्य संरक्षण और औद्योगिक प्रक्रियाओं में वैध रूप से किया जाता है, लेकिन अधिक मात्रा में यह घातक हो सकता है। पीड़ित पक्ष का तर्क है कि ऐसे संवेदनशील उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के दौरान पर्याप्त चेतावनी, निगरानी और नियंत्रण तंत्र नहीं अपनाया गया।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह फैसला अमेजन को दोषी ठहराने के लिए नहीं है, बल्कि केवल मुकदमे की सुनवाई का रास्ता खोलता है। अब निचली अदालत में यह तय किया जाएगा कि कंपनी की भूमिका उत्पाद उत्तरदायित्व और लापरवाही के दायरे में आती है या नहीं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से एल्गोरिदमिक सिफारिशों, जोखिम वाले उत्पादों की सूची और उपभोक्ता सुरक्षा मानकों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। यदि अदालत यह मानती है कि प्लेटफॉर्म की सिफारिश प्रणाली ने जोखिम बढ़ाया, तो भविष्य में ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने एल्गोरिदम और उत्पाद लिस्टिंग नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है।

यह मामला तकनीकी कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी को लेकर चल रही व्यापक बहस से भी जुड़ा है, जिसमें यह प्रश्न उठता रहा है कि क्या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केवल ‘मध्यस्थ’ हैं या वे अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उत्पादों और सिफारिशों के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार हैं।

अमेजन की ओर से इस फैसले पर विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी पूर्व में कह चुकी है कि वह उपभोक्ता सुरक्षा को प्राथमिकता देती है और जोखिम वाले उत्पादों की बिक्री पर अपनी नीतियों की समीक्षा करती रहती है।

अब निचली अदालत में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी, जहां साक्ष्यों और विशेषज्ञ गवाही के आधार पर यह तय किया जाएगा कि प्लेटफॉर्म ने उचित सावधानी बरती थी या नहीं। इस मुकदमे का परिणाम न केवल अमेजन, बल्कि वैश्विक ई-कॉमर्स उद्योग की नीतियों और नियामकीय ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है।

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