ट्रंप की चेतावनी: ईरान की ओर बढ़ा अमेरिकी सैन्य बेड़ा, पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

Team The420
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वॉशिंगटन/नई दिल्ली | अमेरिका और ईरान के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंध एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान की दिशा में एक “विशाल सैन्य बेड़ा” भेज रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर जारी विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।

स्विट्ज़रलैंड में विश्व आर्थिक मंच (डावोस) की बैठक से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ाई जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम एहतियातन है और इसका उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि टकराव को रोकना है।

“हमारे कई जहाज उस दिशा में जा रहे हैं, सिर्फ एहतियात के तौर पर,” ट्रंप ने कहा। “मैं नहीं चाहता कि कुछ भी हो, लेकिन हम ईरान की गतिविधियों पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।”

पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती

रॉयटर्स से बातचीत में अमेरिकी अधिकारियों ने, नाम न छापने की शर्त पर, बताया कि विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाज आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बलों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने पर भी विचार किया जा रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में यह तैनाती एक “डिटरेंस” रणनीति का हिस्सा है। हालांकि तैनाती की अवधि और पैमाने को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक विमानवाहक पोत समूह की मौजूदगी से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।

ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका संघर्ष से बचना चाहता है। “हो सकता है कि हमें इसका इस्तेमाल ही न करना पड़े। देखते हैं आगे क्या होता है,” उन्होंने कहा।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी सख्त रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को यूरेनियम संवर्धन दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं देगा, जिससे परमाणु हथियार विकसित किए जा सकें।

“अगर वे फिर से ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें कहीं और जाना पड़ेगा,” ट्रंप ने कहा। “और हम वहां भी उतनी ही आसानी से कार्रवाई करेंगे।”

ट्रंप ने यह दावा भी दोहराया कि अमेरिका की पिछली चेतावनियों के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की कथित योजनाओं को रोक दिया था, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

अमेरिकी बयानबाजी पर ईरान ने कड़ा जवाब दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर ने अमेरिका और इजरायल को “गलत आकलन” से बचने की चेतावनी दी।

ईरानी सरकारी टेलीविजन पर जारी बयान में पाकपुर ने कहा,
“इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और ईरान की सेनाओं की उंगली ट्रिगर पर है। हम पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं और किसी भी खतरे का जवाब देंगे।”

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ईरान के संयुक्त सैन्य कमान मुख्यालय के प्रमुख जनरल अली अब्दोल्लाही अलीआबादी ने भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकाने, सैन्य अड्डे और हित “वैध लक्ष्य” माने जाएंगे।

ईरान में विरोध प्रदर्शन और मौतों के आंकड़े

यह बयानबाजी ऐसे समय हो रही है, जब ईरान में दिसंबर के अंत से व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ईरानी अधिकारियों ने इस सप्ताह पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि प्रदर्शनों और सुरक्षा कार्रवाई के दौरान 3,117 लोगों की मौत हुई है।

ईरान के शहीद और पूर्व सैनिक फाउंडेशन के अनुसार, मृतकों में बड़ी संख्या सुरक्षा बलों के सदस्यों और आम नागरिकों की थी, जबकि अन्य को विदेशी समर्थित उपद्रवी बताया गया। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इन आंकड़ों को चुनौती दी है।
ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के अनुसार, 3,428 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अमेरिका स्थित HRANA संगठन ने 4,902 मौतों और 26,500 से अधिक गिरफ्तारियों का दावा किया है। देशव्यापी इंटरनेट बंदी के चलते स्वतंत्र जांच कठिन बनी हुई है।

वैश्विक चिंता और आगे की दिशा

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य तैनाती ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को और अधिक नाजुक बना दिया है। दोनों पक्ष ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन किसी भी तरह की गलत गणना गंभीर सैन्य टकराव में बदल सकती है।

फिलहाल, अमेरिका का कहना है कि वह हालात पर नजर रखते हुए टकराव से बचना चाहता है, जबकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह तनाव केवल सैन्य दबाव तक सीमित रहता है या कूटनीतिक प्रयासों से हालात संभालने की कोई नई पहल सामने आती है।

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